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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 21 मार्च को ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियान से टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान पीएम मोदी ने उन्हें ईद और नौरोज की बधाई दी।

PM Modi speaks to Iran President Masoud Pezeshkian: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 21 मार्च को ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियान से टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान पीएम मोदी ने उन्हें ईद और नवरोज की बधाई दी। उन्होंने पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालातों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। 28 फरवरी को क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह दूसरी बड़ी वार्ता है।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर दी बातचीत की जानकारी
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों (Critical Infrastructure) पर हो रहे हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। पीएम ने कहा कि इस तरह के हमले न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा पैदा करते हैं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) को भी बाधित करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह त्योहारी सीजन पश्चिम एशिया में शांति और समृद्धि लेकर आएगा।

समुद्री रास्तों की सुरक्षा भारत की प्राथमिकता
बातचीत का एक मुख्य केंद्र समुद्री व्यापार मार्ग (Shipping Lanes) रहा। पीएम मोदी ने इस बात को दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के निर्बाध प्रवाह के लिए नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) सुनिश्चित करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि शिपिंग लेन का खुला और सुरक्षित रहना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, पीएम ने ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए ईरान के निरंतर सहयोग की सराहना भी की।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य और फंसे हुए भारतीय जहाज
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब फारस की खाड़ी में भारत के करीब 20 जहाज फंसे हुए हैं और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में यातायात बुरी तरह प्रभावित है। हालांकि, पिछले हफ्ते भारत को एक कूटनीतिक सफलता मिली थी जब दो भारतीय एलपीजी टैंकर- शिवालिक और नंदा देवी सुरक्षित रूप से इस रास्ते से गुजरने में सफल रहे थे।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ जहाजों की आवाजाही को लेकर कोई 'ब्लैंकेट एग्रीमेंट' नहीं है, बल्कि हर जहाज की सुरक्षित निकासी के लिए अलग से कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं। भारत सरकार लगातार खाड़ी देशों के संपर्क में है ताकि ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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