यशवंत गंजीर- कुरुद। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के चिंवरी-सांकरा के पास तेज रफ्तार इको कार सड़क किनारे खड़ी मेटाडोर से जा टकराई। टक्कर इतनी भयावह थी कि पालगांव निवासी फ़लेंद्र मण्डावी (25 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पालगांव (थाना दुगली) के ग्रामीण इको कार (CG04 QC 1236) से सेमलगांव से लौट रहे थे। रात करीब 1 बजे चिंवरी-सांकरा के पास सड़क किनारे बिना किसी पर्याप्त संकेत या सुरक्षा के खड़ी मेटाडोर अचानक सामने आ गई। तेज रफ्तार कार सीधे उसमें जा घुसी। सवाल यह उठता है कि आखिर इतनी व्यस्त सड़क पर रात के समय भारी वाहन यूं ही क्यों खड़े रहते हैं? क्या जिम्मेदार विभाग की निगरानी नहीं थी?
घंटों तड़पते रहे घायल, 108 सेवा रही नदारद
हादसे के बाद सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई- ‘गोल्डन ऑवर’ में जीवन बचाने वाली 108 एंबुलेंस सेवा पूरी तरह नाकाम नजर आई। पूर्व जिला पंचायत सदस्य मनोज साक्षी के मुताबिक हादसे के तुरंत बाद सूचना दी गई, लेकिन रात 2 बजे तक भी एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। घायल सड़क पर तड़पते रहे और मदद के लिए इंतजार करते रहे। सवाल यह है कि आखिर आपातकालीन सेवा किसके लिए है?
समाजसेवियों ने निभाई जिम्मेदारी, सिस्टम रहा नदारद
जब सरकारी तंत्र विफल रहा, तब समाजसेवी सन्नी छाजेड़ और ओमी जैन आगे आए। उन्होंने निजी वाहनों से घटनास्थल पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया और मृतक को पोस्टमार्टम के लिए नगरी भिजवाया। यह पहल सराहनीय जरूर है, लेकिन यह भी दिखाता है कि संकट की घड़ी में आम नागरिकों को ही जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उन्होंने मांग की है कि, 108 एंबुलेंस सेवा की जवाबदेही तय की जाए। सड़क किनारे अवैध रूप से खड़े वाहनों पर कड़ी कार्रवाई हो। भारतमाला मार्ग पर रात्रि गश्त और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जाए।
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