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कोरिया महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या में पंथी, शैला, कथक और ओड़िसी की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, पूरा माहौल लोक-सुगंध से सराबोर रहा।

कमालुद्दीन अंसारी - कोरिया। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में चल रहे तीन दिवसीय कोरिया महोत्सव का शुभारंभ विष्णुदेव साय ने शासकीय रामानुज आदर्श हायर सेकेंडरी स्कूल के मिनी स्टेडियम में किया। महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या लोक परंपराओं और शास्त्रीय नृत्यों से सजी रही, जहां हजारों की संख्या में पहुंचे दर्शक कलाकारों की प्रस्तुति पर झूम उठे।

पंथी नृत्य से गूंजी सांस्कृतिक संध्या
कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ की धरोहर पंथी नृत्य से हुई। सतनाम की घोष के साथ कलाकारों ने मंच पर ऐसी ऊर्जा भरी कि वातावरण आध्यात्मिकता और उत्साह से भर उठा। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।

स्थानीय कलाकारों ने शैला नृत्य से बांधा समा
इसके बाद स्थानीय सांस्कृतिक दलों ने शैला नृत्य प्रस्तुत किया, जिसने पूरे सभागार को लोकजीवन की सोंधी महक से भर दिया। नर्तकों की ताल, लय और समूह समन्वय ने मंच पर जीवंतता बिखेरी।

शास्त्रीय रंग: कथक और ओड़िसी ने जीता दिल
कथक प्रस्तुति में रायपुर की कथक नृत्यांगना सुश्री आशना दिल्लीवार ने अपनी आकर्षक भाव-भंगिमाओं, पद संचालन और नज़ाकत भरी अदाओं से दर्शकों का दिल जीत लिया। ओड़िसी नृत्य में बिलासपुर की कलाकार सुश्री आंचल पाण्डेय ने लय और ताल के अद्भुत संतुलन से शास्त्रीय सौंदर्य को मंच पर जीवंत किया।

दर्शकों का उत्साह और कलाकारों का मनोबल
पूरे कार्यक्रम के दौरान दर्शकों की भारी उपस्थिति, उत्साह और तालियों ने कलाकारों का मनोबल ऊँचा रखा। बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीय लोग इस सांस्कृतिक संध्या के साक्षी बने। तीन दिनों तक चलने वाला यह कोरिया महोत्सव लोक परंपराओं, कला-संगीत और सामूहिक उत्सव का यादगार संगम बनकर उभरा।

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