बस्तर में आत्मसमर्पित नक्सलियों की जिंदगी बदल रही है। कौशल प्रशिक्षण लेकर वे अब रोजगार और परिवार के साथ सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।

महेंद्र विश्वकर्मा- जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों की जिंदगी अब तेजी से बदल रही है। कभी हथियार और रसद पहुंचाने वाले ये लोग अब कौशल विकास कार्यशालाओं में वेल्डिंग, कारपेंट्री और अन्य तकनीकी काम सीखकर अपने परिवार के साथ सामान्य और शांतिपूर्ण जीवन जीने की ओर बढ़ रहे हैं।

नक्सली विचारधारा से जुड़े रहकर रसद (राशन), हथियार और अन्य सामग्री पहुंचाने वाले (लॉजिस्टिक्स सपोर्ट) सरेंडर के बाद अब वेल्डिंग और अन्य तकनीकी कार्य सीखकर नया जीवन शुरू करने का सपना देख रहे हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए शासन-प्रशासन द्वारा पुनर्वास केंद्रों में विशेष कौशल विकास कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। 

इन केंद्रों में वेल्डिंग, कारपेंट्री, बिजली के काम और अन्य तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। बस्तर संभाग में 1607 आत्मसमर्पित नक्सली प्रशिक्षण ले रहे हैं, जिसमें महिला, पुरूष शामिल हैं। इसमें से बीजापुर जिले में 619, सुकमा जिले में 288, दंतेवाड़ा जिले में 257, नारायणपुर जिले में 239, बस्तर जिले में 14, कांकेर जिले में 142 एवं कोंडागांव जिले में 48 आत्मसमर्पित नक्सली रोजगार के लिए कौशल प्रशिक्षण ले रहे हैं।

बस्तर जिला परियोजना लाईवलीहुड कॉलेज में प्रशिक्षण ले रहे आत्मसमर्पित सुदामा, बंडू, सुरेश आदि ने बताया कि बीजापुर जिले के लगभग 12 गांव के 28 नक्सलियों को राशन आदि सामान पहुंचाने का काम कर रहे थे। शासन के प्रशासन वे सभी 28 युवकों जनवरी में बीजापुर में सरेंडर किया, सभी लोग वेल्डर का कार्य सीख रहे हैं। 

सिलाई सीख रही आत्मसमर्पित महिलाएं 

सरकार ने दी एक नई पहचान
सुदामा पंडरा ने बताया कि आत्मसमर्पण के बाद उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है और अब उनके चेहरों पर परिवार और भविष्य के सपने साफ दिखाई दे रहे हैं। माओवादी संगठन का दबाव और निजी जिंदगी पूरी तरह से खत्म थी, न घर का सपना, न परिवार की चाहत, सिर्फ नक्सली विचारधारा को आगे बढ़ाना ही इनका मकसद था। वर्तमान में सरकार की पुनर्वास नीति और समाज की स्वीकार्यता ने नक्सलियों को एक नई पहचान दी है।

आत्मसमर्पित नक्सलियों ने साझा किये अपने अनुभव 
आत्मसमर्पित बंडू गोटा ने बताया कि इस जिंदगी और उस जिंदगी में बहुत फर्क है। अब हम अपने परिवार और रिश्तेदारों से मिल सकते हैं। कहीं आ-जा सकते हैं, लेकिन वहां ऐसा नहीं था, वहां बहुत बंदिशें थीं। अब हम बहुत खुश हैं, हम बहुत खुश है, यह जिंदगी अच्छी है। 

कौशल विकास कार्यशाला में तकनीकी प्रशिक्षण ले रहे आत्मसमर्पित नक्सली 

आत्मसमर्पितों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टलिंगम ने बताया कि रेंज के 1607 आत्मसमर्पितों विभिन्न जिलों में कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे लोग रोजगार कर सकें, अपने परिवार और बच्चों के साथ शांति से रह सकें। इसलिए आत्मसमर्पितों को जेसीबी चलाना, ट्रैक्टर आॅपरेटर कोर्स, इलेक्ट्रीशियन, हॉटल मेनेजमेंट, माली, कारपेंटर आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।