बिलासपुर। राज्य शासन ने फार्मेसी कौंसिल एक्ट व प्रावधान का उल्लंघन करते हुए सीनियर एमबीबीएस डॉक्टर के बजाय अस्पताल के एक स्टोरकीपर व तृतीय वर्ग कर्मचारी को फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रार के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त कर दिया है। इस नियुक्ति को डॉ. राकेश गुप्ता ने रिट आफ क्वारंटो याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने अश्वनी गुरदेकर की नियम विरुद्ध फार्मेसी काउंसल की नियुक्ति को निरस्त कर दिया है।
याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट संदीप दुबे ने पैरवी की। इसमें कहा गया कि फार्मेसी कौंसिल नियमों के तहत रजिस्ट्रार के पद पर एमबीबीएस डाक्टर को नियमित नियुक्ति देने का प्रावधान है। याचिका में बताया गया कि फार्मेसी कौंसिल एक्ट मेडिकल साइंस का महत्वपूर्ण अंग है। राज्यों में इसका संचालन व क्रियान्वयन की जिम्मेदारी स्टेट फार्मेसी कौंसिल को है।
नियमों के विपरीत की गई नियुक्ति
राज्य शासन ने फार्मेसी कौंसिल के रजिस्ट्रार के पद पर जिस व्यक्ति की नियुक्ति की है वह योग्य ही नहीं है और ना ही उसके पास रजिस्ट्रार के पद पर कार्य करने की योग्यता है। अस्पताल के एक स्टोर कीपर को रजिस्ट्रार जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त कौंसिल एक्ट व तय प्रावधान का सीधेतौर पर उल्लंघन किया गया है। याचिका में कहा गया कि फार्मेसी कौंसिल एक्ट व प्रावधान के अनुसार कौंसिल के रजिस्ट्रार के पद पर सीनियर रिटायर्ड चिकित्सा अधिकारी को बैठाया जाता है।










