प्रदेशभर में संचालित 6800 निजी स्कूलों ने तय किया है कि वे सभी जिलों और उनके संभागों में शासन के प्रतिनिधियों को गुलाब भेजेंगे और प्रेम-पत्र लिखेंगे।

रायपुर। एक मार्च से असहयोग आंदोलन कर रहे निजी स्कूलों ने अब गांधीगिरी की राह चुन ली है। प्रदेशभर में संचालित 6800 निजी स्कूलों ने तय किया है कि वे सभी जिलों और उनके संभागों में शासन के प्रतिनिधियों को गुलाब भेजेंगे और प्रेम-पत्र लिखेंगे। प्रेमपूर्वक लिखे गए इस पत्र में वे अपनी समस्याएं शासन प्रतिनिधियों को गिनाएंगे। 

गौरतलब है, प्रदेश के निजी स्कूल आरटीई के अंतर्गत अध्ययनरत गरीब छात्रों की फीस में वृद्धि की मांग कर रहे हैं। 2012 में आरटीई अधिनियम लागू होने पश्चात अब तक फीस की राशि में कोई वृद्धि नहीं की गई है। निजी विद्यालय 2016 से इसमें वृद्धि की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा निजी स्कूल संघ ने स्कूल शिक्षा विभाग से शासकीय स्कूलों में प्रति छात्र खर्च होने वाली राशि की जानकारी भी सार्वजनिक करने की मांग की है ताकि इसके आधार पर निजी स्कूलों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि का निर्धारण हो सके।

बंद कर चुके हैं स्कूल
इस कड़ी में प्रदेश के समस्त स्कूल 1 मार्च से असहयोग आंदोलन कर रहें है। 4 अप्रैल को छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने निर्णय लिया था कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा लाटरी के माध्यम से आबंटित वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षक के अधिकार कानून (आरटीई) तहत प्रवेश नहीं दिया जाएगा। 17 अप्रैल को स्कूल संचालकों एवं शिक्षकों ने विरोधस्वरूप काली पट्टी लगाकर कार्य किया था एवं 18 अप्रैल को स्कूलों ने बंद रखा था। असहयोग आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए 21 अप्रैल को प्रदेश कार्यकारणी की बैठक में निर्णय लिया गया है कि 23 अप्रैल को प्रदेश के समस्त स्कूल संचालक अपने स्कूल के लेटर पैड पर स्कूल शिक्षा मंत्री और शासन के प्रतिनिधियों को अपनी मांगों को पूर्ण करने के लिए पत्र लिखेंगे। 24 अप्रैल को विभिन्न जिला संगठन के पदाधिकारी तथा समस्त स्कूल संचालक जनप्रतिनिधियों से मिलकर गुलाब भेंट करेंगे और अपनी मांग से उन्हें अवगत कराएंगे।

अब जोड़ेंगे नई मांग
निजी स्कूल संघ के प्रदेशाध्यक्ष राजीव गुप्ता के अनुसार, अब वे नई मांग भी इसमें जोड़ेंगे। अब तक केवल आरटीई राशि बढ़ाने की ही मांग उनके द्वारा की जा रही थी, लेकिन अब वे पहली के साथ-साथ नर्सरी, पीपी-1 और पीपी-2 में भी बच्चों को प्रवेश देने की मांग करेंगे। शासन द्वारा आरटीई नियमों में वर्तमान सत्र से बदलाव किया गया है। नए नियमों के अनुसार, वर्तमान सत्र से केवल पहली कक्षा में ही निजी स्कूलों में छात्र दाखिला प्राप्त कर सकेंगे। प्री-प्रायमरी कक्षाओं में प्रवेश बंद कर दिया गया है।

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