राजेश दास- जगदलपुर। देश के नक्सलमुक्त होते ही अब नक्सलियों के सबसे घातक हथियार आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) की युद्ध स्तर पर खोज शुरू कर दी गई है। बस्तर प्रवास पर आए प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस बात का ऐलान किया था कि जिस तरह गावों को ओडीएफ बनाया गया उसी तरह बस्तर को आईईडी मुक्त बनाने अभियान चलेगा क्योंकि असली जीत माओवाद खत्म करना नहीं बल्कि बस्तर की धरती को पूरी तरह सुरक्षित बनाना है।
31 मार्च को नक्सलमुक्त होने के बाद से नक्सलियों द्वारा प्लांट किए गए आईईडी की तलाश तेज कर दी गई है। साहस सतर्कता और तकनीक के साथ आईईडी के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रहे डॉग स्कवॉड, बम निरोधक दस्ता व प्रशिक्षित जवान लगातार आईईडी की तलाश कर रहे हैं। यही वजह है कि प्रतिदिन गांव की गलियों से लेकर पगडंडी, मुख्य मार्ग व बीहड़ जगंल लगातार बम उगलने लगे हैं। माओवादी संगठन की सबसे घातक हथियार का खामियाजा वर्षों से सुरक्षाबलों के साथ ही निर्दोष आम नागरिक व पशुओं को उठाना पड़ चुका है जिसमें सैकड़ों सुरक्षाकर्मी व आम नागरिकों की मौत हो चुकी है। बस्तर रेंज में माओवादी संगठन द्वारा लगाए गए आईईडी वर्तमान में भी सुरक्षा बलों, आम नागरिकों तथा क्षेत्र के पशुओं के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं।
माओवादी हिंसा का गंभीर दुष्प्रभाव
35 वर्षों में 1289 विस्फोट, 527 शहीद, 161 नागरिकों की मौतः 1991 से 31 मार्च 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में कुल 1289 आईईडी विस्फोट की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन विस्फोटों का उद्देश्य सुरक्षा बलों की गतिविधियों को बाधित करना, आम जनता में भय का वातावरण बनाना तथा क्षेत्र के विकास कार्यों को रोकना रहा है। इन आईईडी विस्फोटों के कारण सुरक्षा बलों को भारी क्षति उठानी पड़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में 527 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए तथा 930 सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। इसके अलावा आईईडी विस्फोट की चपेट में आने से 161 नागरिकों की मृत्यु हुई और 254 नागरिक घायल हुए हैं। यह आंकड़े दशार्ते हैं कि माओवादी हिंसा का गंभीर दुष्प्रभाव आम नागरिकों और सुरक्षा बलों दोनों पर पड़ा है। आईईडी का प्रयोग अक्सर सड़कों, पगडंडियों, खेतों और जंगलों में किया जाता है, जिससे न केवल सुरक्षाबलों बल्कि ग्रामीणों की दैनिक गतिविधियां भी गंभीर रूप से प्रभावित होती हैं।
प्रतिदिन मिल रहे बम जागरूकता अभियान भी जारी
इन चुनौतियों के बावजूद पुलिस एवं सुरक्षा बलों द्वारा आईईडी की पहचान, निष्क्रयकरण तथा सुरक्षित निस्तारण के लिए निरंतर और प्रभावी प्रयास प्रतिदिन किए जा रहे हैं। बम निरोधक दस्ते (बीडीडीएस) विशेष प्रशिक्षण प्राप्त जवानों तथा आधुनिक उपकरणों की सहायता से नियमित रूप से सर्च ऑपरेशन और रोड ओपनिंग पार्टियों (आरओपी) के माध्यम से बड़ी संख्या में आईईडी का समय रहते पता लगाकर उन्हें निर्षक्रय किया जा रहा है। सुरक्षाबलों के प्रयासों के कारण कई दुर्घटनाएं टाली गई हैं।
आईईडी मुक्त गांव बनाना हमारा लक्ष्य
बस्तर आईजी सुंदरराज पट्टलिंगम ने कहा, बस्तर क्षेत्र में माओवादियों द्वारा लगाए जाने वाले आईईडी केवल सुरक्षा बलों को निशाना बनाने का माध्यम नहीं हैं वरन यह आम नागरिकों, ग्रामीण जीवन, पशुधन और पूरे सामाजिक ताने-बाने के लिए एक गंभीर तथा अमानवीय खतरा है। निर्दोष लोगों तथा जंगलों में विचरण करने वाले पशुओं के जीवन को जोखिम में डालने वाली ऐसी हिंसक गतिविधियां क्षेत्र में शांति,विकास और सामान्य जीवन को बाधित करती हैं। बस्तर पुलिस और सुरक्षा बल पूरी सतर्कता, साहस और तकनीकी दक्षता के साथ आईईडी की पहचान, निष्क्रयकरण और सुरक्षित निस्तारण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं ताकि आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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