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रायपुर के क्षेत्र में आज न्याय की उम्मीद खो चुके एक किसान के आत्मघाती कदम ने पूरे प्रशासनिक अमले के हाथ-पांव फुला दिए। 

धरसींवा। रायपुर के क्षेत्र में आज न्याय की उम्मीद खो चुके एक किसान के आत्मघाती कदम ने पूरे प्रशासनिक अमले के हाथ-पांव फुला दिए। ग्राम पंचायत सोडरा निवासी 54 वर्षीय किसान किसन लाल निषाद पिता स्व. लखन निषाद अपनी सुध-बुध भूलकर हाई-टेंशन टावर पर जा चढ़ा। किसान को अपनी ही 48 डिसमिल जमीन के लिए 12 वर्षों तक दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया। एक उद्योग पर पीड़ति किसान सुबह सात बजे ही रस्सी और पेट्रोल की बोतल लेकर टावर पर जा बैठा, जिसे देख इलाके में सनसनी फैल गई। 

किसन लाल निषाद का यह आक्रोश उस व्यवस्था के खिलाफ था जिसने कोर्ट का फैसला पक्ष में होने के बावजूद उन्हें हक नहीं दिलाया। पिछले एक दशक से अधिक समय से वे सरकारी दफ्तरों की जमीन कब्जाने का आरोप लगाते हए अलग चौखट घिस रहे थे, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही थी। मौके पर पहुंचे धरसींवा तहसीलदार ने भी इस बात की तस्दीक की कि भूमि विवाद में न्यायालय पहले ही किसान के पक्ष में फैसला सुना चुका है।

7 घंटे तक चलता रहा मनाने का खेल
लगभग 7 घंटों तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के दौरान पुलिस और प्रशासन के अधिकारी नीचे से मिन्नतें करते रहे, लेकिन किसन लाल निषाद अपनी जमीन की वास्तविक वापसी और ठोस कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। अंततः, जब मामला हाथ से निकलता दिखा और जनभावनाएं उग्र होने लगीं, तब उद्योग प्रबंधन को झुकना पड़ा। प्रशासनिक मध्यस्थता के बीच यह तय हुआ कि उद्योग प्रबंधन उक्त 48 डिसमिल जमीन के बदले किसान किसन लाल निषाद को 50 लाख रुपये का भुगतान करेगा। इस लिखित आश्वासन और समझौते के बाद ही दोपहर बाद किसान सुरक्षित नीचे उतरा।

इटा रहा भारी अमला
जैसे ही किसान के टावर पर चढ़ने की खबर फैली, पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। स्थिति को संभालने के लिए एसडीएम नंद कुमार चौबे, सिलतरा चौकी प्रभारी राजेन्द्र कवर और तहसीलदार बाबूलाल कुरें दलबल के साथ मौके पर डटे रहे।

मुआवजे पर समझौता कराया गया
धरसींवा तहसीलदार बाबूलाल  कुर्रे ने बताया कि, यह भूमि विवाद काफी पुराना है और न्यायालय का फैसला पहले ही किसान के पक्ष में आ चुका है। प्रशासन अदालती आदेश को लागू कराने की प्रक्रिया में था। आज की स्थिति को देखते हुए, उद्योग प्रबंधन और पीड़ित किसान के बीच आपसी सहमति से 50 लाख रुपये के मुआवजे पर समझौता कराया गया है। हमारा मुख्य उद्देश्य किसान की जान बचाना और उन्हें उनका जायज हक दिलाना था।


 

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