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  हाईकोर्ट ने सफाई कर्मियों के नाम पर फर्जी वेतन आहरण करने के मामले में जगदलपुर के सीएमएचओ, लेखापाल सहित 10 आरोपियों की सजा को रद्द करते हुए दोषमुक्त किया है।

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने सफाई कर्मियों के नाम पर फर्जी वेतन आहरण करने के मामले में जगदलपुर के सीएमएचओ, लेखापाल सहित 10 आरोपियों की सजा को रद्द करते हुए दोषमुक्त किया है। इसमें पांच अधिकारियों की मौत होने पर उनकी पत्नी व बच्चों ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील पेश की थी। हाईकोर्ट ने पाया कि जिन अपराधों का आरोप लगाया गया है, उनके जरूरी तत्व साबित नहीं हुए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोप साबित करने के लिए, यह सिद्ध करना होता है कि अवैध कार्य को करना होता है कि अवैध कार्य को करने के लिए, या किसी वैध कार्य को अवैध साधनों से करने के लिए, कोई समझौता या आपसी सहमति मौजूद थी या नहीं।

प्रकरण के मुताबिक डॉ. आर. के. सेन, तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जगदलपुर के पद में 1979 में कार्यरत थे। आरोप यह था कि तीन स्वीपर जयसिह, लालमणि और मायाराम को अलग-अलग प्राइमरी हेल्थ सेंटर पर अस्थायी तौर पर नियुक्त किया गया था। इन कर्मचारियों से लेकिन तय काम की जगहों पर जुलाई 1979 से लगभग एक साल तक सीएमएचओ ने अपने घर पर घरेलू नौकर के तौर पर रखा। इसके बाद, तीनों स्वीपर ने नौकरी छोड़ दी। उनके जाने के बावजूद, सीएमएचओ डॉ. सेन ने जुलाई 1979 से मई 1985 तक इन कर्मचारियों के नाम पर फर्जी बिल तैयार किए और वेतन निकाल लिया। आरोप यह भी था कि सैलरी बिल पर इन स्वीपर के नकली अंगूठे के निशान लगाए गए थे, जबकि वे पढ़े-लिखे थे और साइन कर सकते थे।

सबूतों से शक जरूर लेकिन पुष्टि नहीं 
मामले के चार कथित आरोपी पीएल बिल्लरे, सी बनर्जी, एम पी पांडेय एवं एसआर देवांगन जीवित है। कोर्ट ने इन्हें भी दोषमुक्त किया है। तर्क यह दिया गया कथित बेनिफिशियरी ने नौकरी के समय या सैलरी मिलने के बारे में कोई खास या भरोसेमंद सबूत नहीं दिया है। जिन जरूरी डॉक्यूमेंट्स पर भरोसा किया गया है, वे सिर्फ़ कार्बन कॉपी हैं जबकि ओरिजिनल दिखाए बिना, जिससे वे कानूनी तौर पर नामंजूर हो जाते हैं।

42 लाख रुपए से अधिक निकालने का था आरोप
इस तरह कुल 42 लाख से अधिक की राशि निकाली गई। शिकायत पर लोकायुक्त भोपाल ने इनके खिलाफ जुर्म दर्ज किया। इसमें एम. आर. मलिक, बी.एस. मोर्या, टी.के.सी. बोस, के. आर.सी. पिल्ले, जी.आर. संभलकर, पीएल बिल्लरे, सी बनर्जी, एम पी पांडेय एवं एसआर देवांगन को आरोपी बनाया गया। मामले में सीएमएचओ डॉ. सेन ने सजा के खिलाफ कोई अपील पेश नहीं की और उनकी वर्ष 2003 में मौत हो गई। इसी प्रकार अपील लंबित रहने के दौरान एम.आर. मलिक, बी.एस. मोर्या, टी. के. सी. बोस, के.आर.सी. पिल्ले, जी.आर. संभलकर की भी मौत हो गई। इनकी मौत के बाद विधिक वारिसों ने मुकदमा लड़ा एवं उन्हें दोषमुक्त कराया है।
 

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