यशवंत गंजीर- कुरुद। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के मगरलोड ब्लॉक अंतर्गत मोहेरा पंचायत की दुर्गम पहाड़ियों पर स्थित माँ निरई माता का दरबार एक बार फिर श्रद्धालुओं के लिए खुलने जा रहा है। चैत्र नवरात्रि के प्रथम रविवार को वर्ष में केवल एक बार, भोर के 5 घंटों (प्रातः 4 बजे से 9 बजे तक) के लिए कपाट खोले जाएंगे। इस अल्प समय में हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन कर अपने जीवन के सबसे अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव का साक्षात्कार करते हैं।
भोर में जागती है आस्था, प्रकट होता है चमत्कार
जैसे ही भोर की पहली किरण निरई की पहाड़ियों को छूती है, पूरा वातावरण 'जय माता दी' के जयघोष से गूंज उठता है। इस सिद्ध पीठ की सबसे बड़ी विशेषता यहां प्रज्वलित होने वाली दिव्य ज्योति है, जो मान्यता अनुसार बिना किसी तेल या घी के स्वतः प्रज्वलित होती है और पूरे नौ दिनों तक जलती रहती है। श्रद्धालुओं के लिए यह दृश्य किसी चमत्कार से कम नहीं, बल्कि माता की प्रत्यक्ष कृपा का प्रमाण माना जाता है।
अनूठी परंपराएं और अटूट विश्वास
माँ निरई माता का यह दरबार अपनी विशिष्ट परंपराओं के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां श्रृंगार सामग्री जैसे सिंदूर और कुमकुम अर्पित नहीं किए जाते। लोक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल की एक घटना के बाद माता ने कुछ नियम निर्धारित किए, जिनका पालन आज भी श्रद्धापूर्वक किया जाता है। इन्हीं मान्यताओं के तहत गर्भगृह में केवल पुरुषों को ही प्रवेश की अनुमति है, जिसे भक्त माता की आज्ञा मानकर स्वीकार करते हैं।
मन्नत और बलि की परंपरा
माता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए यहां मन्नत पूरी होने पर बकरों की बलि देने की प्राचीन परंपरा भी निभाई जाती है। इस अवसर पर दूर-दराज के ग्रामीण बड़ी संख्या में अपनी भेंट लेकर पहुंचते हैं। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद यहां अवश्य पूरी होती है।
व्यवस्थाएं दुरुस्त, प्रशासन सतर्क
भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। दुर्गम मार्गों का सुधार, पेयजल, पार्किंग और प्रकाश व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम सुनिश्चित किए गए हैं ताकि श्रद्धालु निर्बाध रूप से दर्शन कर सकें। भोर के इन 5 घंटों में आस्था, परंपरा और चमत्कार का ऐसा संगम देखने को मिलता है, जो हर श्रद्धालु के मन में जीवनभर के लिए अमिट छाप छोड़ जाता है।










