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दंतेवाड़ा के पूर्व नक्सल प्रभावित लावा-पुरेंगल गांव में 30 साल बाद विधायक चैतराम अटामी 10 किमी पैदल पहुंचें। विकास कार्यों का भूमिपूजन, ग्रामीणों से सीधा संवाद।

पंकज भदौरिया- दंतेवाड़ा। कभी घोर नक्सल प्रभावित और प्रशासनिक पहुंच से पूरी तरह दूर रहा बैलाडीला पहाड़ियों के पीछे बसा लावा-पुरेंगल इलाका अब बदलती तस्वीर के साथ विकास की मुख्यधारा से जुड़ता नजर आ रहा है। वर्षों तक माओवादी प्रभाव के कारण जहां अधिकारी और जनप्रतिनिधि जाने से कतराते थे।

वहीं अब हालात ऐसे बने कि दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी और जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल सहित जनप्रतिनिधियों की टीम करीब 10 किलोमीटर पहाड़ी रास्ता पैदल तय कर गांव पहुँची और ग्रामीणों के बीच समय बिताया। बैलाडीला की दुर्गम पहाड़ियों से उतरकर जनप्रतिनिधियों का गांव पहुंचना अपने आप में ऐतिहासिक माना जा रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार बीते तीन दशकों में पहली बार कोई विधायक और प्रशासनिक अमला गांव तक पहुंचा। पहले यह इलाका पूरी तरह नक्सलियों के प्रभाव में था, जहां शासन-प्रशासन की गतिविधियां लगभग शून्य थीं। गांव पहुंचने पर विधायक चैतराम अटामी पारंपरिक अंदाज में लुंगी पहनकर ग्रामीणों से मिले, जिससे स्थानीय लोगों में अपनापन और विश्वास का माहौल बना।

जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों से बैठकर चर्चा की, उनकी समस्याएं सुनीं और तत्काल समाधान के निर्देश अधिकारियों को दिए। इस दौरान जरूरतमंद परिवारों को कपड़े, बर्तन और दैनिक उपयोग की सामग्री वितरित की गई, वहीं बच्चों को किताबें और शैक्षणिक सामग्री भी दी गई। 

गांव में विकासकार्यों का किया गया भूमिपूजन 
कार्यक्रम के दौरान गांव में पेयजल समस्या के समाधान के लिए हैंडपंप स्थापना, सड़क निर्माण और आंगनबाड़ी भवन निर्माण जैसे विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया। जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी भी टीम के साथ मौजूद रहे और ग्रामीणों की मांगों का मौके पर ही सर्वे कर योजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया शुरू की गई।

समस्याओं का समाधान करना ही जनप्रतिनिधियों की प्राथमिक जिम्मेदारी- नंदलाल 
जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल ने कहा कि ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझना और समाधान करना ही जनप्रतिनिधियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि पहले नक्सल प्रभाव और सुरक्षा परिस्थितियों के कारण लावा-पुरेंगल जैसे अंदरूनी क्षेत्रों का दौरा संभव नहीं था, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं और विकास की पहुंच अंतिम गांव तक सुनिश्चित की जा रही है। 

बड़ी संख्या में माओवादी मुख्यधारा से जुड़े 
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में पिछले एक वर्ष के दौरान सुरक्षाबलों द्वारा नक्सल विरोधी अभियानों को व्यापक स्तर पर चलाया गया है। लगातार अभियानों के चलते बड़ी संख्या में माओवादी हथियारों सहित आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे हैं, वहीं कई मुठभेड़ों में नक्सलियों को मार गिराया गया।

इसके परिणामस्वरूप दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षा स्थिति मजबूत हुई है और दूरस्थ गांवों तक शासन की पहुंच आसान बनी है। लावा-पुरेंगल में जनप्रतिनिधियों की यह पैदल यात्रा न केवल बदले हालात का संकेत है, बल्कि उस भरोसे की वापसी भी है, जो वर्षों तक भय और बंदूक की छाया में दबा रहा। अब ग्रामीण विकास, संवाद और विश्वास की नई शुरुआत देख रहे हैं।

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