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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस शासन काल के दौरान हुए शराब घाटाले के आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को मिली जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई है। 

रायपुर। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में चैतन्य बघेल की जमानत को चुनौती देने वाली छत्तीसगढ़ सरकारी की याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ मामले में अब एक सप्ताह बाद सुनवाई करने की बात कही है। 

जमानत के खिलाफ दी गई दलील
सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने पैरवी करते हुए कोर्ट को बताया कि, चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद एक अहम गवाह सामने नहीं आ रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी स्थिति में जांच प्रभावित हो सकती है। जेठमालानी ने चैतन्य की जमानत आदेश पर पुनर्विचार करने की बात रखी।

ईडी का दावा-राज्य सरकार को हुआ भारी नुकसान
इधर, ईडी के मुताबिक 2019 से 2022 के बीच हुए कथित शराब घोटाले से राज्य को भारी आर्थिक नुकसान हुआ और एक शराब सिंडिकेट को फायदा पहुंचा। एजेंसी का दावा है कि चैतन्य बघेल इस सिंडिकेट के प्रमुख थे और करीब 1000 करोड़ रुपए की राशि संभाली। वहीं एसीबी और ईओडब्ल्यू का कहना है कि घोटाले की कुल रकम 3500 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है। इसमें कई लोगों ने मिलकर अपराध से कमाई गई राशि का प्रबंधन किया।
 

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