रायपुर/बिलासपुर। कहते हैं पढ़ाई व शिक्षा ग्रहण करने की कोई उम्र नहीं होती है। आप में लगन व जूनून है तो किसी भी उम्र में पढ़ाई कर सकते हैं। ऐसा ही जुनून वृद्ध महिलाओं व पुरुषों में रविवार को देखने को मिला। जिले की हजारों बुजुर्गों ने उम्र के अंतिम पड़ाव में भी परीक्षा दी और साक्षर भी हुए। रविवार को बिलासपुर जिले में राष्ट्रव्यापी महापरीक्षा अभियान (उल्लास कार्यक्रम) का आयोजन किया गया। इसमें स्कूली बच्चों की बजाय घरेलू महिलाएं और 50 से 60 वर्ष के प्रौढ़ और बुजुर्ग परीक्षा देने पहुंचे थे। कई जगहों पर घूंघट की आड़ में महिलाओं ने पेपर लिखा तो, 60 साल के दादा और काका ने ककहरा लिखकर साक्षर होने का परिचय दिया। देवरानी जेठानी सहित ननद और भाभी इस राष्ट्रव्यापी महापरीक्षा अभियान आकलन परीक्षा में शामिल हुए।
भारत सरकार के द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के तहत जिले में इस बार 40 हजार लोगों ने पढ़ लिखकर साक्षर होने का अधिकार प्राप्त कर लिया है। खास बात यह है कि आदिवासी अंचल में भी पढ़ने-लिखने की इच्छा रखने वालों की संख्या बढ़ी है। कार्यक्रम अधिकारी जेके पाटले ने बताया कि रविवार की सुबह 10:00 से शाम 5:00 तक आयोजित हुई। रतनपुर क्षेत्र में माध्यमिक स्कूल में नव साक्षर परीक्षा को लेकर खासा उत्साह देखा गया। यहां परीक्षा देने पहुंचे 60 वर्षीय बुजूर्ग ने बताया कि उन्होंने पूरा प्रश्न पत्र हल कर दिया है। पहले घर के काम और मजदूरी की वजह से पढ़ाई लिखाई नहीं कर सके, लेकिन अब अपने बच्चों और पोते पोतियों को पढ़ते लिखते देख मन में सादार होने की इच्छा जागी।
सेंट्रल जेल में कैदी ने कहा-नई जिंदगी मिली
चारों विकासखंडों सहित बेलतरा रोड, मस्तूरी और कोटा सहित केंद्रीय जेल बिलासपुर में कुल 961 परीक्षा केंद्रों पर 'उल्लास' योजना की साक्षरता आकलन परीक्षा आयोजित हुई। असाक्षरों को साक्षर बनाने के बाद यह आकलन परीक्षा में 40777 से अधिक प्रशिक्षार्थियों ने शत प्रतिशत उत्साह के साथ भाग लिया, जिसमे 10943 पुरुष और 29822 महिला शामिल हैं जो राज्य स्तर पर ऐतिहासिक उपलब्धि है। केंद्रीय जेल बिलासपुर में 100 पुरुष और 33 महिला बंदियों ने उल्लास परीक्षा साक्षरता आकलन परीक्षा दी। केंद्रीय जेल के एक प्रशिक्षार्थी ने कहा कि "साक्षरता ने नई जिंदगी दी।