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सरगुजा जिले के बतौली स्थित पहाड़ी कोरवा आश्रम में अधीक्षक की गैरमौजूदगी में चपरासी छात्रावास चला रहे हैं, जहां बच्चों को सूखा भोजन और जरूरी सुविधाओं का अभाव झेलना पड़ रहा है।

आशीष कुमार- बतौली/सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के बतौली में पहाड़ी कोरवा आश्रम चपरासियों के भरोसे संचालित हो रही है। जहां अधीक्षक पिछले पांच महीने से अपने कार्यभार संभालने के बाद अब तक आश्रम में निवास नहीं किया है। जिसके परिणाम स्वरूप बुधवार को सुबह के खाने में 39 बच्चों को चने की सब्जी से रूखा सुखा भोजन चपरासी द्वारा कराया जा रहा था। अधिकारियों के उदासीन रवैया से शासन की नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए अधीक्षक द्वारा बच्चों के हक पर डाका डाला जा रहा है।

बड़ी अजीब विडंबना की बात है कि, शासन प्रशासन द्वारा शिक्षा को लाख बढ़ावा देने की कोशिश की जाए लेकिन ग्रामीण और दुरस्त क्षेत्रों में संचालित पहाड़ी कोरवा आश्रम बैजनाथपुर की व्यवस्था का बुरा हाल है। यहां पदस्त चपरासियों द्वारा आश्रम का संचालन किया जाता है। अभी वर्तमान में 52 की दर्ज संख्या में संचालित आश्रम में 39 बच्चे ही रहते है। जो कक्षा पहली से पांचवीं तक आश्रम में ही अध्यरत है। 

1बच्चों को सूखा भोजन परोस रहे थे चपरासी
आपको बता दें कि, बच्चों को आज सुबह के खाने में चने की सब्जी के साथ रुखा सूखा भोजन चपरासी सुरेश के द्वारा कराया जा रहा था। जहां खाने की जानकारी लेने पर चपरासी सुरेश द्वारा बताया गया कि, आश्रम में खाद्य सामग्री की कमी पिछले 3 दिनों से है, दाल भी नहीं है। इसलिए आज सब्जी खिलाया जा रहा है। अधीक्षक को समान लाने की जानकारी दी गई है। 

1आश्रम में निवास नहीं करते अधीक्षक
आपको जान कर हैरानी होगी कि, आश्रम छात्रावासों का संचालन भगवान भरोसे चपरासियों द्वारा संचालित किया जा रहा है। जहां नियमित अधीक्षक आशीष कोसले द्वारा शांतिपारा कालोनी में निवास कर आश्रम की देख रेख करते है। जिससे आश्रम बैजनाथपुर की पूरी जिम्मेदारी यहां पदस्त चपरासियों के भरोसे निर्भर है। जहां बच्चों के साथ कोई अनहोनी होने पर कौन जिम्मेदार होगा आम लोगों के लिए बड़ा प्रश्न बना हुआ है।

1आश्रम में नहीं है खाद्य सामग्री की व्यवस्था
आपको बता दें कि, चपरासी के भरोसे संचालित आश्रम में सब्जी में एक लौकी, 2 केजी आलू ही रखा हुआ है। दाल कई दिनों से खत्म है, जिससे बच्चों को रुखा सूखा भोजन से ही संतुष्ट होना पड़ता है। जबकि नाश्ता दिया ही नहीं जाता है। सुबह शाम बच्चों को सिर्फ भोजन कराने का कोरम पूरा किया जाता है। इसके साथ ही आश्रम (छात्रावास) में रह रहे बच्चों की स्थिति भी दयनीय है ,जहां महीने में एक नहाने का साबुन और एक कपड़ा धोने का साबुन दिया जाता है। मुंह धोने का ब्रश और कोलगेट घर से मंगाया जाता है। बच्चों के कपड़े गंदे और फटे हुए है। आश्रम में सतत निगरानी के अभाव में खुलेआम बच्चों का हक छिना जा रहा है, जो चिंता का विषय है। 

क्या लापरवाह अधीक्षक और उदासीन मंडल संयोजक पर होगी करवाई
बतौली के आश्रम छात्रावासों के प्रभारी मंडल अधीक्षक उमेश मिश्रा खुद सीतापुर क्षेत्र में सहायक शिक्षक के पद पर पदस्त रहते हुए बतौली के मंडल संयोजक सहित शांतिपारा के 100 बिस्तरीय छात्रावास को संचालित किया जा रहा है। दो पदों पर आसीन उमेश मिश्रा द्वारा बाकी छात्रावास आश्रम की निरीक्षण शान्तिपारा में बैठकर कागजों के माध्यम से किया जाता है। जहां अधीक्षकों से मिलीभगत कर दुरस्त क्षेत्र में संचालित पहाड़ी कोरवा आश्रम बैजनाथपुर का बुरा हाल बना हुआ है। साथ ही अधीक्षक भी अपने कार्य करने का कोरम शान्तिपारा कालोनी से कर रहे है। क्या जिला कलेक्टर इन लापरवाह अधीक्षक और मंडल संयोजक पर कार्यवाही करते हैं या स्थिति जस की तस बनी रहेगी यह देखने वाली बात होगी।

कठोर करवाई कराई जाएगी- भाजपा महामंत्री
इस संबंध में भाजपा महामंत्री ललिता तिर्की ने कहा कि, कोरवा आश्रम छात्रावासों में जिस प्रकार संबंधितों द्वारा लापरवाही की जा रही उसे बिलकुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इन पर कठोर कार्यवाही कराई जाएगी। 

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