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जगदलपुर। जिन गांव वालों को नक्सलियों ने उनके घरों से भगा दिया था, वे दो दशक बाद अपने गांव लौट आए हैं। यहां पहुंचते ही उन्होंने 21 साल से बंद पड़े शिव मंदिर में साफ सफाई और पूजा अर्चना भी की। जिसके बाद सभी ने अपने घरों में प्रवेश किया। नारायणपुर नक्सल प्रभावित गारपा ग्राम के रहने वाले करीब 35-40 आदिवासी परिवार को नक्सलियों ने वर्ष 2003 में उन्हीं के गांव से बेदखल करते हुए भगा दिया था। अब गारपा में सड़क निर्माण व कैम्प खुलने से ग्रामीणों में विश्वास जागा और मंगलवार को बेदखल पूरा परिवार अपने गांव लौट आया।
वर्ष 2003 में नक्सलियों ने गारपा ग्राम में रह रहे 35-40 आदिवासी परिवार को उनके गांव से बेदखल कर दिया था। इसके बाद हाल ही में गारपा में पुलिस प्रशासन द्वारा नया पुलिस कैम्प खोला गया और नक्सलवाद के प्रकोप से 30 साल से बंद पड़ी सड़क का निर्माण कराया गया, जिसमें अब जिला मुख्यालय नारायणपुर से ग्राम गारपा तक प्रतिदिन यात्री बस व निजी गाड़ियां दौड़ने लगी हैं। गांव व आसपास के इलाके में लगातार हो रहे विकास कार्य से ग्रामीणों का विश्वास जागा और उन्होंने अपने गांव लौटने का फैसला लेते हुए 12 नवम्बर को अपने गांव का रूख किया। दो दशक से अधिक समय से अपने घर व खेती बाड़ी छोड़कर रह रहे दर्जनों ग्रामीणों में विकास कार्य से विश्वास जगी और उन्होंने घर वापसी की इस दौरान ग्रामीण अपने परिजनों से मुलाकात की और ग्रामीणों से मुलाकात कर खुशियां मनाई।
ग्रामीणों में जागा विश्वास
बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि ग्राम गारपा में नवीन कैम्प स्थापित होने व शासन की नियद नेल्ला नार योजना के अन्तर्गत सरकार के सभी योजनाओं को गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। माड़ क्षेत्र में सुरक्षा बलों का सघन नक्सल विरोधी अभियान जारी है, जिसके परिणाम स्वरूप क्षेत्र के ग्रामीण अपने घर लौटने लगे है ग्रामीणों में नक्सली भय से आजादी की आस जगी है। - , आईजी, बस्तर
3 दशक से बंद थी सड़क अब शुरू हुई आवाजाही
नक्सलियों के भय से कोण्डागांव-नारायणपुर को सोनपुर होते हुए सितरम तक जोड़ने वाली प्राचीन सड़क 30 साल में बंद पड़ी थी। गारपा में पुलिस जनसुविधा एवं सुरक्षा कैम्प स्थापित होने के बाद से इस सड़क पर बस सुविधाए प्रारंभ हुई है, क्षेत्र के ग्रामीण अब जिला मुख्यालय तक बस सुविधा से निजी एवं अन्य दैनिक काम-काजों से यात्रा कर रहे हैं, इस रोड में यात्री बस एवं निजी गाड़िया भी दौड़ने लगी है।
नक्सलियों के डर से नारायणपुर के गुडरीपारा में रह रहा था 40 परिवार
नक्सलियों द्वारा गांव से भगाए जाने के बाद 40 परिवार 21 सालों से नारायणपुर के गुडरीपारा में निवास कर रहा था। इस दौरान उनका गांव व गांव में रहने वाले परिजनों व ग्रामीणों से रिश्ता लगभग समाप्त हो चुका था। ग्राम गारपा में पुलिस जन सुविधा एवं सुरक्षा कैम्प स्थापित होने एवं क्षेत्र में लगातार नक्सल विरोधी अभियान चलाए जाने से तथा रोड निर्माण कार्य होने से नक्सली इलाके से दूरी बना ली। जिसके परिणामस्वरूप दो दशक पूर्व गांव से भगाये गए आदिवासी ग्रामीण नक्सल भय से मुक्त होकर निर्भीक रूप से अपने गांव गारपा पहुंचें तथा अपने गांव के शिव मंदिर में पूजा अर्चना कर गृहप्रवेश किया।
