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अनिल सामंत- जगदलपुर। बस्तर में आयोजित भूमकाल स्मृति दिवस की रैली उस समय विवादों में आ गई, जब शहर के अग्रसेन चौक के पास रैली के दौरान हिड़मा के नाम से जुड़ा एक गीत तेज ध्वनि में बजाया गया। गीत के बोल- हमारे हक की जंग है हिड़मा, दिल की बस्ती में हिड़मा हमारा झंडा तू ही हिड़मा- पर रैली में शामिल कई लोग झूमते और तालियां बजाते नजर आए। यह सब उस समय हुआ जब मौके पर पुलिस बल भी तैनात था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गीत में जन्म से लेकर मृत्यु तक की कथा को भी हिडमा के नाम से जोड़ा गया था। सार्वजनिक कार्यक्रम में इस प्रकार के गीत के प्रसारण ने कानून-व्यवस्था और सामाजिक संतुलन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।
कांग्रेस ने बताया चिंताजनक
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशिल आनंद शुक्ला ने इसे चिंताजनक बताते हुए सरकार की विफलता करार दिया। उन्होंने कहा कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने के दावे किए गए हैं,जबकि जमीनी स्तर पर ऐसी घटनाएं उन दावों के विपरीत नजर आती हैं। उनके अनुसार, केवल बयानबाजी से समस्या का समाधान संभव नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम पर बस्तर रेंज आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। गीत किसने चलाया और मौके पर कौन-कौन मौजूद था,इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जांच और संभावित कार्रवाई
वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस ने घटनाक्रम की प्रारंभिक पड़ताल शुरू कर दी है। आयोजकों, साउंड सिस्टम संचालकों और मौके पर मौजूद लोगों की पहचान की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि, गीत पूर्व नियोजित रूप से बजाया गया या अचानक चलाया गया। प्रशासनिक स्तर पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसके आधार पर विधि अनुसार कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। इस बीच, सार्वजनिक आयोजनों में संवेदनशील विषयों को लेकर सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर भी चर्चा तेज हो गई है।
