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प्रदेश में पेट्रोल पंपों पर ड्रम, डिब्बा और जैरी कैन में पेट्रोल-डीजल देने पर सख्ती बढ़ा दी गई है। 

रायपुर। प्रदेश में पेट्रोल पंपों पर ड्रम, डिब्बा और जैरी कैन में पेट्रोल-डीजल देने पर सख्ती बढ़ा दी गई है। तेल कंपनियों और जिला प्रशासन की ओर से पंप संचालकों को मौखिक निर्देश गए हैं कि किसी भी स्थिति में कंटेनरों में ईंधन की बिक्री न करें। नियम उल्लंघन की स्थिति में पंप को बंद करने तक की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। पेट्रोल-डीजल की किल्लत न हो, इसके लिए राज्य शासन ने अभियान शुरू कर दिए हैं। 

राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम बनाया गया है। जिलों में खाद्य विभाग सभी जिलों को लगातार निर्देश जारी कर रहा है। पंप संचालकों को भेजे गए संदेश में कहा गया है कि यदि किसी भी प्रकार की फोटो या वीडियो के माध्यम से उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित पंप के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें तेल कंपनी और कलेक्टोरेट, दोनों स्तर पर लाइसेंस निलंबन या पंप बंद करने की कार्रवाई शामिल हो सकती है।

पड़ोसी राज्यों से सप्लाई बंद
उत्तर प्रदेश के मुगलसराय डिपो से छत्तीसगढ़ आने वाली डीजल सप्लाई भी प्रभावित हो गई है। अब तक राज्य में प्रतिदिन करीब 400 टैंकर डीजल पहुंच रहा था, लेकिन कंज्यूमर पंप के डीजल रेट में हाल ही में करीब 22 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद यह व्यवस्था लगभग ठप हो गई है। कीमत बढ़ने के कारण उत्तर प्रदेश से आने वाला डीजल, छत्तीसगढ़ के रिटेल पेट्रोल पंपों की तुलना में 10 से 12 रुपए प्रति लीटर महंगा पड़ने लगा है। इससे कंज्यूमर पंप संचालकों ने बाहर से डीजल मंगाना बंद कर दिया है।

छोटे किसान और कारोबारी हो रहे प्रभावित
ऐसे में एक ओर जहां रिटेल पंपों पर कंटेनरों में डीजल देने पर रोक है, वहीं दूसरी ओर कंज्यूमर पंप महंगे हो गए हैं। इस दोहरी स्थिति का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। छोटे किसान, ठेकेदार और कारोबारी सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। ट्रैक्टर, जेसीबी, जनरेटर और अन्य मशीनों के लिए डीजल लाना मुश्किल हो गया है। खासकर दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में उपकरणों को बार-वार पेट्रोल पंप तक ले जाना व्यावहारिक नहीं होने से परेशानी और बढ़ गई है। स्थिति को देखते हुए आने वाले दिनों में प्रशासन पर नियमों में आंशिक राहत देने का दबाव बढ़ सकता है।

प्रदेश में पेट्रोल-डीजल और गैस आपूर्ति सामान्य
पेट्रोलियम कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, साथ ही किसी भी पेट्रोल पंप पर कमी नहीं है। पेट्रोलियम टर्मिनलों में भी पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। वहीं, एलपीजी की बात करें तो कमर्शियल एलपीजी की मात्रा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी है। राज्यों से ढाबों, होटलों, औद्योगिक कैंटीनों और प्रवासी मजदूरों को प्राथमिकता देने को कहा गया। अब तक राज्यों को लगभग 22 हजार टन कॉमर्शियल एलपीजी आवंटित की जा चुकी है। इसके अलावा करीब 30 हजार 5 किलो के सिलिंडर जारी किए गए हैं। घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है।
 

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