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कवर्धा में चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर माँ सिंहवाहिनी मंदिर में विशेष श्रृंगार, पूजा-अर्चना और नगर भ्रमण जैसी परंपराओं के साथ भक्तिमय माहौल छाया रहा।

कवर्धा। छत्तीसगढ़ की धर्मनगरी कवर्धा में चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। शहर के शक्तिपीठों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ रही है और माँ के दरबार में पूजा-अर्चना, ज्योति प्रज्ज्वलन और विशेष अनुष्ठान हो रहे हैं।

माँ सिंहवाहिनी मंदिर में विशेष श्रृंगार
कवर्धा स्थित प्रसिद्ध माँ सिंहवाहिनी मंदिर में अष्टमी पर माँ का दिव्य श्रृंगार किया गया। माँ को नीले वस्त्र धारण कराए गए तथा शस्त्रों से अलंकृत किया गया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत भव्य और आकर्षक दिखा। सुबह से ही हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुँचकर मनोकामना ज्योति प्रज्वलित कर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

प्राचीन सिद्ध शक्तिपीठ और आस्था का केंद्र
माँ सिंहवाहिनी मंदिर, जो खेड़ापति हनुमान चौक देवांगन पारा में स्थित है, कवर्धा की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहाँ विराजमान दक्षिणमुखी प्रतिमा को स्वयंभू और प्राचीन सिद्ध शक्तिपीठ माना जाता है। जनश्रुतियों के अनुसार, माता नीम के वृक्ष के नीचे प्रकट हुई थीं, जिसके बाद यह स्थल एक विशाल मंदिर के रूप में विकसित हुआ।

अष्टमी पर नगर भ्रमण की अनूठी परंपरा
अष्टमी के दिन कवर्धा में एक अनोखी धार्मिक परंपरा देखने को मिलती है। माँ चंडी मंदिर और परमेश्वरी मंदिर से खप्पर लेकर माँ का विकराल रूप नगर भ्रमण पर निकलता है। इस दौरान भक्त बड़ी संख्या में शामिल होकर माँ के इस अद्भुत और श्रद्धामय स्वरूप के दर्शन करते हैं।

कवर्धा में नवरात्र का सांस्कृतिक उत्सव
कवर्धा में नवरात्र केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं, बल्कि यहाँ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव भी है। विभिन्न शक्तिपीठों में हो रही विशेष पूजा-अर्चना और भक्तों के श्रद्धाभाव से पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है।

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