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बलौदा बाजार के संडी गांव में शासकीय शराब दुकान के उद्घाटन पर भाजपा-कांग्रेस नेताओं का एक मंच पर आना चर्चा का विषय बना, गांव में खुशी नजर आई।

कुश अग्रवाल - बलौदा बाजार। 'मंदिर मस्जिद बैर कराती, मेल कराती मधुशाला' महान कवि हरिवंश राय बच्चन की ये पंक्तियां आमतौर पर साहित्य में सुनने को मिलती हैं, लेकिन बलौदा बाजार जिले में यह पंक्तियां हकीकत बनती नजर आईं। पलारी तहसील अंतर्गत ग्राम संडी (मुड़पार) में नए शासकीय कंपोजिट शराब दुकान के शुभारंभ पर एक-दूसरे के कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंदी माने जाने वाले भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय नेता एकत्र होकर उद्घाटन में शामिल हुए।

गांव में शराब दुकान खुलने पर खुशी क्यों?
ग्राम संडी में लगभग 10-12 वर्ष पहले भी शासकीय शराब दुकान संचालित थी, जिसे आबादी संबंधी नियमों के चलते बंद कर दिया गया था। दुकान बंद होने के बाद क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री लगातार बढ़ती गई, जिससे ग्रामीणों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। अब दुकान के पुन: खुलने से ग्रामीणों ने इसे राहत के रूप में देखा और स्थानीय जनप्रतिनिधियों सरपंच, जनपद सदस्यों और दोनों प्रमुख दलों के नेताओं ने खुशी जाहिर की।

सियासी प्रतिद्वंदियों का एक मंच पर आना बना चर्चा का विषय
शराब दुकान के उद्घाटन में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के नेता एक साथ उपस्थित हुए। आम तौर पर ये दोनों दल अवैध शराब बिक्री को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाते दिखाई देते हैं, लेकिन इस मौके पर दोनों का मंच साझा करना बेहद दुर्लभ था। फीता काटने से लेकर पूजा-अर्चना तक पूरा कार्यक्रम सौहार्द्रपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ, जिसने पूरे गांव का ध्यान खींचा।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष की प्रतिक्रिया और कार्रवाई का संकेत
जब इस विरोधाभासी घटना पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुमित्रा ध्रुतलहरे से सवाल किया गया, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उद्घाटन में शामिल होने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पार्टी अनुशासन का उल्लंघन किया है। उन्होंने ऐसे कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई किए जाने की बात भी कही। इस बयान ने मामले को और राजनीतिक रूप से दिलचस्प बना दिया।

राजनीतिक, सामाजिक दोनों स्तरों पर विशेष मामला
अक्सर शराब दुकानों के उद्घाटन का विरोध होता है, आंदोलन होते हैं और राजनीतिक बयानबाज़ी देखने मिलती है, लेकिन संडी गांव का यह उदाहरण बिल्कुल अलग रहा। यहां शराब दुकान वह काम कर गई जो सियासत कई बार नहीं कर पाती कट्टर विरोधियों को एक मंच पर खड़ा कर दिया। हरिवंश राय बच्चन की प्रसिद्ध पंक्तियां “मंदिर मस्जिद बैर कराती, मेल कराती मधुशाला” इस मौके पर पूरी तरह सार्थक प्रतीत हुईं।

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