पंकज गुप्ते- बिलासपुर। जग्गी हत्याकांड को लेकर गुरुवार 2 अप्रैल को हाईकोर्ट अमित जोगी सरेंडर करने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिविजन बेंच ने यह फैसला दिया है। अब हाईकोर्ट के आदेश पर JCCJ अध्यक्ष अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाला है। अमित ने सरेंडर करने के आदेश को अपने साथ गंभीर अन्याय बताया है।
सोशल मीडिया साइट X पर अमित जोगी ने लिखा-
प्रिय मित्रों और शुभचिंतकों,
आज माननीय उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया- बिना सुनवाई का अवसर दिए। मुझे खेद है कि, जिस व्यक्ति को अदालत ने दोषमुक्त किया था, उसे बिना सुनवाई का एक भी अवसर दिए दोषी करार दिया गया। यह अप्रत्याशित है।
अदालत ने मुझे 3 सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का समय दिया है। मुझे लगता है कि मेरे साथ गंभीर अन्याय हुआ है। मुझे पूरा विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय से मुझे न्याय अवश्य मिलेगा।
मैं न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास रखता हूँ। मैं पूर्ण शांति, आस्था और धैर्य के साथ आगे बढ़ रहा हूँ। सत्य की जीत अवश्य होगी। आप सभी से आग्रह है कि मेरे लिए प्रार्थना करें और अपना आशीर्वाद बनाए रखें।
जय छत्तीसगढ़
प्रिय मित्रों और शुभचिंतकों 🙏
— 𝐀𝐦𝐢𝐭 𝐀𝐣𝐢𝐭 𝐉𝐨𝐠𝐢 (@AmitJogi) April 2, 2026
आज माननीय उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया- बिना सुनवाई का अवसर दिए।
मुझे खेद है कि जिस व्यक्ति को अदालत ने दोषमुक्त किया था, उसे बिना सुनवाई का एक भी अवसर दिए दोषी करार दिया गया। यह अप्रत्याशित है।… pic.twitter.com/t70pLdLTJ7
मेरे परिवार की 20 साल की तपस्या पूरी हुई
वहीं हाईकोर्ट के आदेश पर स्व. रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने कहा है कि, आज हनुमान जयंती के दिन मुझपर उनकी विशेष कृपा हुई। मेरा और मेरे परिवार की 20 साल की तपस्या पूरी हुई है। आखिरकार मेरे पाप को न्याय मिला है। इसके लिए मैं उन खलाखों लोगों का आभार व्यक्त करता हूं, जिनका न्याय की इस यात्रा में मुझे सहयोग मिला। आखिरकार मुख्य आरोपी अमित जोगी को जेल जाना पड़ेगा, हालांकि मैं खुश तो नहीं हो सकता, क्योंकि मैंने अपने पिता को खोया है। मैं न्यायालय और सीबीई के प्रति भी आभार व्यक्त करता हूं।
सीबीआई ने पेश की थी 11,000 पन्नों की जांच रिपोर्ट
उल्लेखनीय है कि, इस मामले में सीबीआई ने 11,000 पन्नों की जांच रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें अमित जोगी के खिलाफ भी चार्ज लगा है। कोर्ट ने पहले अमित जोगी को इस केस में बरी कर दिया था, लेकिन अब दोबारा ओपन किया गया।
सरेंडर करने के लिए तीन सप्ताह का दिया समय
सुनवाई शुरू होने के कुछ देर में ही कोर्ट ने तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दे दिया। इसके बाद माना जा रहा है कि, अब अमित जोगी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उल्लेखनीय है कि, साल 2003 में राकांपा नेता राम अवतार जग्गी की राजधानी रायपुर में सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
हत्याकांड में 2007 में 28 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इस मामले में आरोपी पूर्व सीएम अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले को रिओपन कर फिर से सुनावाई हो रही है। बुधवार को HC में चीफ जस्टिस की डिविजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुआ रिओपन
उल्लेखनीय है कि, 2 साल पहले रामावतार जग्गी हत्याकांड के दोषियों की अपील डिवीजन बेंच ने खारिज कर दी थी। कोर्ट ने उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में CBI की अपील को स्वीकार करते हुए मामले को फिर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में भेजने का निर्देश दिया था।









