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जिले के जल संसाधन संभाग छुईखदान में कथित तौर पर 500 करोड़ रुपयों के निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है।

खैरागढ़। जिले के जल संसाधन संभाग छुईखदान में कथित तौर पर 500 करोड़ रुपयों के निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। सेवानिवृत्त सहायक वर्ग-3 एसके उपाध्याय ने मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाया जिसके बाद मुख्यमंत्री सचिवालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग रायपुर को नियमानुसार जांच और कारवाई का निर्देश दिया हैं।

शिकायतकर्ता एसके उपाध्याय ने कि वर्ष 23-24 से 25-26 तक जल संसाधन संभाग छुईखदान को विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए लगभग 500 करोड़ रुपयों का आबंटन मिला, लेकिन इस राशि का उपयोग सही तरीके से नहीं किया गया और अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से भारी अनियमितताएं की गईं। पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग करते हुए श्री उपाध्याय ने कार्यपालन अभियंता बीके मरकाम, सहायक अभियंता केतन किशोर साहू व अविनाश नायक, सहायक वर्ग-3 करूणेश मेश्राम, सहायक मानचित्रकार कमल नारायण ठाकुर और स्थल सहायक लोकेश शर्मा के अलावा अजय चन्द्राकर सहायक वर्ग-2 के नाम का शिकायत में उल्लेख करते हुए इन सभी पर संयुक्त रूप से भ्रष्टाचार करने और नियमविरुद्ध कार्य करने का आरोप लगाया है।  

सरकारी वाहन के दुरूपयोग का आरोप
कार्यपालन अभियंता बीके मरकाम पर पर आरोप है कि वे दुर्ग-मिलाई से रोज छुईखदान सरकारी वाहन से आना जातना करते है और वाहन लॉगबुक में फर्जी एंट्री कर डीजल-पेट्रोल और मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये का खर्च दिखाया जा रहा है, यहां तक कि निजी वाहनों में भी सरकारी खर्च से ईंधन डलवाया जा रहा है। यह भी कहा कि जब जिम्मेदार अधिकारी मुख्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते. तो करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य गुणवता और निर्धारित मानकों के अनुसार होना संभव नहीं है। आरोप है कि कार्यों में लीपापोती कर गुणवत्ताविहीन निर्माण कराया गया।

संपत्ति जांच और एफआईआर की मांग
शिकायतकर्ता एसके उपाध्याय ने सीएम से कार्यपालन अभियंता बीके मरकाम के पूरे कार्यकाल की जांच कराने, सभी संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की चल-अचल संपत्ति, आयकर रिटर्न और वेतन के आधार पर तुलनात्मक विश्लेषण कर स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की जिसके बाद मुख्यमंत्री सचिवालय ने प्रमुख अभियंता को निर्देशित किया है कि शिकायत पर नियमानुसार कारवाई कर आवेदक को अवगत कराने के साथ साथ कार्रवाई की पूरी जानकारी जनदर्शन पोर्टल पर दर्ज की जाए।  

ग्रेच्युटी भुगतान के लिए रिश्वत मांगने का आरोप
एसके उपाध्याय ने आरोप लगाया कि सहायक मानचित्रकार कमल नारायण ठाकुर ने उनके लंबित तोच्युटी भुगतान के लिए 55 हजार की रिश्वत मांगी। रकम नहीं देने पर कोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक भुगतान नहीं होने दिया। वार्षिक मरम्मत और संधारण के लिए मिले लगभग 4 करोड़ रुपयो का जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ। पूरी राशि आपस में बांट ली गई और कागजों में काम दिखाकर भुगतान कर लिया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्यों की निविदा प्रक्रिया में ठेकेदारों के साथ मिलीभगत कर करोड़ों रुपये का गड़बड़झाला किया गया। विशेष रूप से सहायक अभियंता अविनाश नायक पर फर्जी बिल, ड्राइंग और डिजाइन के नाम पर मुगतान कराने का आरोप लगाया है।

कमीशन और प्रबंधन का अलग तंत्र होने का आरोप
सहायक अभियंता केतन किशोर साहू पर श्री उपाध्याय ने आरोप लगाया कि वो संभाग में कमीशन के लेन-देन का काम संभालते हैं और कार्यपालन अभियंता के साथ समन्वय करते हैं। उन्होंने पूरे सिस्टम पर संगठित नेटवर्क की तरह काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि करूणेश मेश्राम को प्रमुख अभियंता कार्यालय से नियम विरुद्ध छुईखदान में संलग्न कर तीन सबडिविजन का ऑडिट कार्य सौंपा गया है। कमल नारायण ठाकुर को उनके पद के विपरीत ऑडिटर, स्थापना, आरटीआई और कोर्ट केस का काम दिया गया। स्थल सहायक लोकेश शर्मा को भी फील्ड के बजाय कार्यालय में संलग्न कर नियमों का उल्लंघन किया गया है। स्थापना शाखा का कार्य नाममात्र के लिए अजय चन्द्राकर के नाम पर है, जबकि वास्तविक काम तकनीकी कर्मचारियों से लिया जा रहा है, जो पूरी तरह नियमों के विपरीत है।
 

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