धमतरी जिले के सिवनी खुर्द गांव में एक बरगद पेड़ काटने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। पेड़ काटने वाले परिवार पर गांव वालों ने 3 हज़ार रुपये जुर्माना लगा दिया है।

सौम्या यादव- धमतरी। धमतरी जिले के सिवनी खुर्द गांव में एक बरगद पेड़ काटने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। पेड़ काटने वाले परिवार पर गांव वालों ने 3 हज़ार रुपये जुर्माना लगा दिया है। जुर्माना नही देने पर पूरे गांव में उस परिवार का बायकॉट कर दिया है। अब पीड़ित परिवार जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहा है। 

दरअसल, सिवनी खुर्द गांव में रहने वाले ईश्वर पटेल के घर में एक पुराना बरगद का पेड़ था। ईश्वर ने उसे कटवा दिया। गांव वालों ने ईश्वर पर आरोप लगाया है, बिना किसी अनुमति के पेड़ को काट दिया, जिसकी सभी पूजा करते है।

पुलिस कर रही मामले की जांच 
ईश्वर पटेल ने कहा कि, पेड़ की डाल हाईटेंशन तार तक पहुँच गया था जिससे हादसे का डर था।  फिलहाल जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए एसडीएम को निर्देश दिए है।

बरगद के पेड़ का महत्त्व 
भारतीय संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो पर्यावरण, औषधीय और धार्मिक दृष्टिकोण से अमूल्य है। इसे दीर्घायु, अमरता और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। यह न केवल छाया और ऑक्सीजन प्रदान करता है, बल्कि जैव विविधता (पक्षी, कीड़े) का भी आधार है, और आयुर्वेद में कई बीमारियों का अचूक इलाज है। हिंदू धर्म में इसे त्रिमूर्ति (जड़ में ब्रह्मा, छाल में विष्णु, शाखाओं में शिव) का वास माना जाता है, इसलिए इसे वट वृक्ष या अक्षयवट भी कहते हैं। वट सावित्री व्रत में महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए इसकी पूजा करती हैं।