Biodiesel Retail Outlet Bihar: बिहार के गांवों में अब पारंपरिक पेट्रोल पंपों की तरह ही बायोफ्यूल पंप (बायोडीजल रिटेल आउटलेट) की चेन दिखाई देगी। ग्रामीण कार्य विभाग ने इन पंपों तक पहुंच पथ (Access Road) बनाने और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए इंजीनियरों की एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है।
यह कमेटी पथ निर्माण विभाग की तर्ज पर नियम तय करेगी, ताकि ग्रामीण सड़कों के किनारे इन आउटलेट्स को खोलने में आ रही तकनीकी अड़चनों को दूर किया जा सके।
पहुंच पथ के नियमों में होगा बदलाव
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, ग्रामीण सड़कों के किनारे पेट्रोलियम रिटेल आउटलेट या किसान सेवा केंद्र स्थापित करने के लिए सरकारी भूमि का उपयोग पहुंच पथ के रूप में किया जाता है। इसके लिए 2018 में नियम बनाए गए थे, लेकिन बायोफ्यूल पंपों के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस की कमी थी।
अब नवगठित कमेटी यह तय करेगी कि गैर-पारंपरिक पेट्रोल पंपों के लिए एनओसी जारी करने की प्रक्रिया क्या हो। इस कमेटी में अभियंता प्रमुख, मुख्य अभियंता और पीएमजीएसवाई के नोडल पदाधिकारियों को शामिल किया गया है।
क्या होता है बायोफ्यूल पंप?
बायोफ्यूल पंप पारंपरिक पेट्रोल पंपों से अलग होते हैं, हालांकि वाहन में ईंधन भरने का तरीका बिल्कुल एक जैसा ही होता है। इन पंपों पर मिलने वाला डीजल वनस्पति तेल, पशु वसा या अन्य जैविक कचरे से तैयार किया जाता है। इसे 'बायोडीजल' कहा जाता है, जो शुद्ध रूप में या सामान्य डीजल के साथ मिश्रित करके बेचा जाता है। यह पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल है और सामान्य ईंधन के मुकाबले काफी किफायती भी होता है।
पर्यावरण को होगा बड़ा फायदा
बायोफ्यूल का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे कार्बन उत्सर्जन बहुत कम होता है, जिससे प्रदूषण पर लगाम लगती है। हरित ऊर्जा का यह विकल्प न केवल गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि किसानों को भी जैविक कचरे के प्रबंधन में मदद करेगा।
कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग इन पंपों को खोलने की मंजूरी देना शुरू कर देगा। इससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले वाहन चालकों को अपने घर के पास ही सस्ता और पर्यावरण अनुकूल ईंधन मिल सकेगा।











