Bihar Congress: बिहार में अपनी खोई हुई जमीन तलाश रही कांग्रेस ने बड़े संगठनात्मक बदलाव करते हुए 53 जिलाध्यक्षों की नई सूची जारी कर दी है। इस नई लिस्ट में पार्टी ने 'सोशल इंजीनियरिंग' को साधने की कोशिश की है, जिसमें ब्राह्मण और यादव समुदाय का दबदबा साफ दिखाई दे रहा है।
कुल 53 जिलाध्यक्षों में से सर्वाधिक 10-10 पद ब्राह्मण और यादव जातियों के खाते में गए हैं। कांग्रेस ने राज्य में संगठनात्मक जिलों की संख्या 40 से बढ़ाकर 53 कर दी है, जिसमें 43 नए चेहरों को मौका मिला है, जबकि 10 पुराने नेताओं पर भरोसा बरकरार रखा गया है।
सवर्णों में भूमिहार पड़े राजपूतों पर भारी
कांग्रेस की इस सूची में सवर्णों का वर्चस्व देखने को मिला है। कुल 53 में से 24 जिलाध्यक्ष सवर्ण जातियों से आते हैं। दिलचस्प बात यह है कि सवर्णों के भीतर भूमिहार (7 पद), राजपूतों (5 पद) पर भारी पड़े हैं। इसके अलावा 2 पदों पर कायस्थों की नियुक्ति की गई है। पार्टी ने अल्पसंख्यक समुदाय के साथ अपने पुराने रिश्ते को मजबूत करने के लिए 7 मुस्लिम और 1 सिख को जिलाध्यक्ष की कमान सौंपी है।
दलित और पिछड़ा वर्ग को मिली कितनी जगह?
आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस ने पिछड़े और दलित वोट बैंक को भी साधने का प्रयास किया है। अनुसूचित जाति (दलित) वर्ग से 7 जिलाध्यक्ष बनाए गए हैं। पिछड़ा वर्ग (OBC) में यादवों को सबसे अधिक 10 सीटें मिली हैं, जिसे राजद के वोट बैंक में सेंधमारी और अपने पुराने आधार को वापस पाने की रणनीति माना जा रहा है।
वहीं, 'लव-कुश' समीकरण को ध्यान में रखते हुए 3 कुशवाहा जिलाध्यक्ष भी बनाए गए हैं। हालांकि, राज्य की 36 फीसदी आबादी वाले अति पिछड़ा वर्ग (EBC) को इस सूची में वैसी तवज्जो नहीं मिल पाई, जैसी उम्मीद की जा रही थी।
बिहार कांग्रेस जिलाध्यक्षों की जातिवार हिस्सेदारी
- ब्राह्मण- 10
- यादव- 10
- मुस्लिम- 07
- दलित- 07
- भूमिहार- 07
- राजपूत- 05
- कुशवाहा- 03
- कायस्थ- 02
- सिख- 01
- अन्य- 01
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संगठन विस्तार और नए चेहरों को मौका
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर यह सर्जरी की गई है। पटना ग्रामीण को दो हिस्सों में बांटा गया है, वहीं कई अन्य बड़े जिलों को भी संगठनात्मक सुविधा के लिए विभाजित किया गया है। पटना शहरी की जिम्मेदारी कुमार आशीष को मिली है, जबकि ग्रामीण इलाकों के लिए चंदन कुमार और गुरजीत सिंह को कमान सौंपी गई है। दरभंगा, मुजफ्फरपुर और पूर्णिया जैसे जिलों में भी शहरी और ग्रामीण के आधार पर अलग-अलग अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं।