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आरा सिविल कोर्ट बम ब्लास्ट मामले में पटना हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए लंबू शर्मा की फांसी की सजा रद्द कर दी है। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी दोषियों को बरी करने का आदेश दिया।

Ara Civil Court Bomb Blast Case: बिहार के बहुचर्चित आरा सिविल कोर्ट बम धमाका मामले में पटना हाईकोर्ट ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले के मुख्य आरोपी लंबू शर्मा को सुनाई गई फांसी की सजा को रद्द करते हुए उसे और उसके सहयोगी अखिलेश उपाध्याय समेत सभी दोषियों को बरी कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जेल से भागने के एक अन्य मामले में दोषी होने के कारण इन्हें फिलहाल सलाखों के पीछे ही रहना होगा।

11 साल पहले दहला था आरा कोर्ट परिसर
यह पूरी घटना 23 जनवरी 2015 की है, जब सुबह करीब 11:35 बजे आरा सिविल कोर्ट परिसर एक भीषण बम धमाके से दहल उठा था। इस आत्मघाती हमले जैसी घटना में एक महिला और एक पुलिसकर्मी की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। धमाके के बाद मची अफरा-तफरी का फायदा उठाकर कुख्यात अपराधी लंबू शर्मा और अखिलेश उपाध्याय पुलिस हिरासत से फरार हो गए थे।

निचली अदालत ने सुनाई थी मौत की सजा
अगस्त 2019 में आरा की स्थानीय अदालत ने इस मामले की सुनवाई पूरी करते हुए लंबू शर्मा को मुख्य साजिशकर्ता मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। वहीं, अखिलेश उपाध्याय को उम्रकैद और अन्य 6 आरोपियों को भी आजीवन कारावास की सजा मिली थी। जांच के दौरान यह सामने आया था कि यूपी की रहने वाली नगीना देवी नामक महिला अपने साथ बम लेकर कोर्ट पहुंची थी और धमाके में उसके चिथड़े उड़ गए थे। हमले का उद्देश्य लंबू शर्मा को पुलिस कस्टडी से भगाना था।

बाहुबलियों तक पहुंची थी जांच की आंच
इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के दौरान यूपी के डॉन ब्रजेश सिंह, बाहुबली मुख्तार अंसारी और पीरो के पूर्व विधायक सुनील पांडेय के नाम भी सामने आए थे। सुनील पांडेय को इस मामले में जेल की हवा भी खानी पड़ी थी, हालांकि बाद में उन्हें सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया गया था। अब हाईकोर्ट ने भी लंबू शर्मा और अन्य के खिलाफ ठोस सबूत न होने के आधार पर उन्हें इस ब्लास्ट केस से मुक्त कर दिया है।

जेल में ही रहेंगे लंबू और अखिलेश
भले ही हाईकोर्ट ने बम ब्लास्ट के आरोपों से इन्हें बरी कर दिया है, लेकिन लंबू शर्मा और अखिलेश उपाध्याय की मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। धमाके के बाद कस्टडी से फरार होने के मामले में इन्हें पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, जेल ब्रेक केस की सजा बरकरार रहने के कारण ये दोनों फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे।

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