Bihar Rajya Sabha Election 2026: बिहार में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) ने बड़ा दांव चल दिया है। पार्टी के इस फैसले ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। संख्या बल के हिसाब से एनडीए की स्थिति मजबूत है, लेकिन पांचवीं सीट के लिए ओवैसी की एंट्री ने मुकाबले को बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय बना दिया है।
ओवैसी की पार्टी का बड़ा ऐलान
बिहार एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया कि उनकी पार्टी राज्यसभा चुनाव 2026 में अपना उम्मीदवार मैदान में उतारेगी। ईमान ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के लिए लड़ती रही है, इसलिए अन्य 'सेकुलर' दलों को उनके प्रत्याशी का समर्थन करना चाहिए।
ओवैसी की पार्टी के इस ऐलान से महागठबंधन के खेमे में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है, क्योंकि तेजस्वी यादव उम्मीद कर रहे थे कि पांचवीं सीट पर भाजपा को रोकने के लिए ओवैसी उनका साथ देंगे।
बिहार विधानसभा का गणित और एनडीए का दबदबा
बिहार विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखें तो 243 सदस्यीय सदन में एनडीए के पास 202 विधायकों का विशाल बहुमत है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। इस लिहाज से 5 में से 4 सीटों पर एनडीए की जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है।
पांचवीं सीट को जीतने के लिए एनडीए को मात्र 3 और विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। एनडीए की ओर से जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर और आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा जैसे दिग्गजों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
महाबंधन के लिए पहाड़ जैसी चुनौती
विपक्षी महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट) के पास फिलहाल केवल 35 विधायक ही बचे हैं। एक सीट जीतने के लिए उन्हें न केवल अपने सभी विधायकों को एकजुट रखना होगा, बल्कि एआईएमआईएम के 5 विधायकों और बसपा के एक विधायक का समर्थन भी जुटाना होगा।
लेकिन अब एआईएमआईएम द्वारा खुद का प्रत्याशी उतारने के फैसले के बाद महागठबंधन के लिए एक सीट जीतना भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। अगर तेजस्वी यादव ओवैसी के उम्मीदवार को समर्थन नहीं देते हैं, तो पांचवीं सीट आसानी से एनडीए की झोली में जा सकती है।
वोटिंग और क्रॉस वोटिंग की संभावना
बिहार से इस साल राज्यसभा के 5 सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, जिनमें आरजेडी के प्रेमचंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह भी शामिल हैं। ओवैसी की पार्टी ने दांव खेलकर आरजेडी को बैकफुट पर धकेल दिया है। अगर एनडीए पांचवीं सीट के लिए अतिरिक्त उम्मीदवार उतारता है और मुकाबला त्रिकोणीय होता है, तो मतदान (वोटिंग) की नौबत आएगी।
ऐसी स्थिति में छोटे दलों की भूमिका अहम हो जाएगी और क्रॉस वोटिंग की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। अब देखना होगा कि तेजस्वी यादव इस सियासी चक्रव्यूह से कैसे बाहर निकलते हैं।