Logo
Sanju Samson comeback: टीम इंडिया को टी20 का विश्व चैंपियन बनाने में संजू सैमसन का बड़ा हाथ है। एक समय वो बेंच पर बैठे थे लेकिन जब वापसी का मौका मिला तो टीम को चैंपियन बनाकर ही लौटे। संजू ने मैच के बाद अपनी कामयाबी का श्रेय सचिन तेंदुलकर को दिया।

Sanju Samson comeback: टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की जीत के कई हीरो रहे, लेकिन अगर किसी एक खिलाड़ी ने पूरे टूर्नामेंट में अपनी अलग पहचान बनाई तो वह थे संजू सैमसन। फाइनल में सैमसन की 46 गेंदों पर खेली गई शानदार 89 रन की पारी ने मैच का रुख बदल दिया और भारत को खिताब की दहलीज तक पहुंचा दिया।

जब संजू 89 रन पर लॉन्ग-ऑन पर कैच आउट हुए तो उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी, लेकिन भीतर थोड़ी कसक भी थी। वह सिर्फ 11 रन दूर थे अपने वर्ल्ड कप शतक से। जिस गेंद पर वह आउट हुए वह लो फुल टॉस थी, जिसे वह सही टाइम नहीं कर पाए। इससे पहले तक वह बेहतरीन लय में थे और मैदान के चारों तरफ शानदार शॉट खेल रहे थे।

सचिन तेंदुलकर से लगातार संपर्क में था: संजू
अहमदाबाद के स्टेडियम में उस वक्त अलग ही माहौल था। दर्शक चेत्ता-चेत्ता (मलयालम में बड़े भाई) चिल्ला रहे थे और डीजे मलयालम गानों से माहौल को और जोशीला बना रहा था। संजू की हर चौके-छक्के पर पूरा स्टेडियम जमकर झूम रहा था। 

रविवार रात जब उन्हें टूर्नामेंट का प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया तो उनके चेहरे पर वही हल्की सी मुस्कान फिर दिखी। इस दौरान उन्होंने एक दिलचस्प खुलासा भी किया। संजू ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से वह लगातार सचिन तेंदुलकर से बात कर रहे थे।

'सचिन सर ने बुरे वक्त से निकलने में मदद की'
संजू ने बताया, 'ऑस्ट्रेलिया में जब मैं टीम के साथ था लेकिन एक भी मैच नहीं खेल रहा था, तब मैं समझना चाहता था कि इस समय मुझे कैसा मानसिकता रखनी चाहिए। इसलिए मैंने सचिन सर से संपर्क किया। हम लोगों की कई लंबी बातचीत हुई। यहां तक कि फाइनल से एक दिन पहले भी उन्होंने फोन करके पूछा कि मैं कैसा महसूस कर रहा हूं।'

संजू ने सेमीफाइनल और फाइनल में दमदार पारी खेली
संजू के लिए यह सफर आसान नहीं रहा। 2024 में जब भारत ने वेस्टइंडीज में टी20 वर्ल्ड कप जीता था, तब वह टीम में जरूर थे लेकिन उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। उस समय उन्होंने सिर्फ एक चीज की वो थी कल्पना। संजू ने कहा, 'मैं लगातार सोचता था कि एक दिन ऐसा मौका आएगा जब मैं टीम के लिए बड़ा काम करूंगा।' 

एक समय संजू ने करियर खत्म मान लिया था
संजू के करियर का सबसे मुश्किल दौर पिछले साल न्यूजीलैंड सीरीज के बाद आया। संजू ने खुद माना कि वह उस समय पूरी तरह टूट चुके थे। उन्हें लगा कि शायद उनका सपना खत्म हो गया है। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। टीम में दाएं हाथ के बल्लेबाजों की कमी और कुछ खिलाड़ियों की कमजोरियों के चलते उन्हें एक आखिरी मौका मिला। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने भी मजाक में कहा था कि अगर संजू को टीम में लेना हो तो किसे बाहर किया जाए- तिलक वर्मा या अभिषेक शर्मा? 

यह मौका संजू के लिए करियर का टर्निंग पॉइंट बन गया। वेस्टइंडीज के खिलाफ करो या मरो वाले मैच में उन्होंने 97 रन की नाबाद पारी खेली। उस समय उनकी आंखों से आंसू निकल आए थे। इसके बाद मुंबई में इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने 89 रन की तेजतर्रार पारी खेली। लेकिन असली कमाल फाइनल में हुआ, जहां उन्होंने फिर 89 रन बनाए, जो टी20 विश्व कप फाइनल में सबसे बड़ा स्कोर है।  इस पारी में उन्होंने 5 चौके और 8 छक्के लगाए। खास तौर पर रचिन रवींद्र की गेंद पर लगातार तीन छक्के दर्शकों को लंबे समय तक याद रहेंगे।

संजू की बल्लेबाजी की खूबसूरती सिर्फ ताकत में नहीं, बल्कि नजाकत में भी दिखी। जिमी नीशम की लगभग परफेक्ट यॉर्कर को उन्होंने सिर्फ बैट का फेस खोलकर थर्ड मैन की तरफ मोड़ दिया। ऐसे लचीले हाथ और कलाई बहुत कम बल्लेबाजों के पास होती है। उनकी बल्लेबाजी की तारीफ दुनिया के दिग्गज भी करते हैं। श्रीलंका के महान बल्लेबाज कुमार संगाकारा ने कहा कि संजू बेहद खास खिलाड़ी हैं। जब वह पूरी तरह फोकस में होते हैं तो उन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है।

केरल के छोटे से मछुआरे शहर विजिंजम से निकलकर संजू ने वर्ल्ड कप की कहानी बदल दी। उन्हें शायद अपने छूटे हुए शतकों का अफसोस नहीं होगा, क्योंकि उनकी पारियां शतक से भी ज्यादा भारी साबित हुईं।

5379487