Sakat Chauth Today: माघ मास में कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि को सकट चौथ का पर्व मनाया जाता है। यह त्यौहार भगवान श्री गणेश के लिए समर्पित है। इस साल यह पर्व 17 जनवरी दिन शुक्रवार को मनाया जा रहा है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान के लिए व्रत करती हैं और सायं काल में चंद्रमा को देखकर व्रत का समापन करती है।
इस व्रत के दिन चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश को तिल और गुड़ से बने हुए तिलकुट का प्रसाद अर्पित किया जाता है। सकट चतुर्थी को तिलकुट चतुर्थी भी कहते हैं। आइए ज्योतिषाचार्य डॉ. गौरव कुमार दीक्षित के माध्यम से सकट चतुर्थी व्रत की कथा के बारे में जानते हैं।
एक देवरानी जेठानी किसी गांव में रहती थी। देवरानी काफी गरीब थी उसका जीवन बड़ी मुश्किल से पालन हो रहा था। उसकी जेठानी काफी अमीर थी। उस देवरानी का पति एक लकड़हारा था और लकड़ी बेचकर अपने जीवन का गुजारा करता था। वही जेठानी अपने घर देवरानी से कार्य कराती थी और बदले में उसे खाने को दे देती थी। एक बार सकट चतुर्थी पर उस देवरानी ने भगवान श्री गणेश का व्रत किया उसके पास प्रसाद के लिए भी पैसे नहीं थे, तो उसने बाजार से गुड और तिल लाकर तिलकुट बनाया। भोग लगाकर वह जेठानी के घर कार्य के लिए चली गई। जेठानी के यहां व्रत की वजह से भी किसी ने खाना नहीं खाया।
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देवरानी ने अपने खाने के लिए जेठानी से भोजन की मांग की तो जेठानी ने खाना देने से मना कर दिया। भूखी देवरानी दुखी मन से वापस अपने घर आ गई। उसके बच्चे भी भूखे थे, पति भी भोजन की आस में बैठा था। उस स्त्री के हाथ में भोजन न देखकर उसके पति और बच्चों को बहुत दुख हुआ और भूख से बच्चे बिलबिलाने लगे। पति भी परेशान हो गया। वह स्त्री भगवान गणेश को याद करते हुए पानी पीकर सो गई। उस महिला के सपने में सकट माता एक बुढ़िया का रूप धर के आई। उस बुढ़िया ने उसे देवरानी से अपने भूखे होने का हवाला देकर कुछ खाने को मांगा उसे महिला ने कहा मेरे घर में तो उनका एक दाना तक नहीं है मैं क्या दूंगी।
इस दौरान उसे ध्यान आया कि सुबह भोग का तिलकुटा पड़ा है। सकट माता ने बुढ़िया के स्वरूप में वह तिलकुटा खाकर जाने के लिए कहा तो उसे देवरानी ने कहा आप यही इस विश्राम कर लें रात में कहां जाएंगे यह कहकर वह सो गई। सुबह उठी तो उसने देखा कि उसका पूरा घर हीरे- मोतियों से भरा हुआ है। जब यह बात जेठानी को पता लगी तो वह देवरानी से मिलने आई देवरानी ने पूरा किस्सा अपनी जेठानी को बताया फिर जेठानी ने भी कहा कि एक बुढ़िया के स्वरूप में तो मेरे भी सपने में आई थी लेकिन मैंने उन्हें खाने के यह बोल दिया कि जो मिले वह खा लो। उस बुढ़िया ने मुझसे कहा कि मुझे निपटाई लगी है तो मैं कहां जाऊं मैंने कहा पूरे महल में जहां आपका मन हो वहां कर लो और पहुंचने के लिए जो मिले उससे पूछ लो। सुबह उठने पर मेरे घर में गंदगी और बदबू के अलावा कुछ भी नहीं था।
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चन्द्रमा की पूजा का महत्व
सकट चतुर्थी पर चंद्रमा की पूजा करने का महत्व इसलिए होता है कि चंद्रमा मन का कारक है एवं चंद्रमा की पूजा करने से उत्तम संतान की प्राप्ति होती है। जिन महिलाओं की संतान होती है वह अपनी संतान की दीर्घायु और निरोगी होने के लिए व्रत रखती हैं।
चंद्र देव काफी सुंदर होते हैं इसलिए उन्होंने अपनी सुंदरता पर घमंड करते हुए एक बार भगवान श्री गणेश का सूंड का मुंह में देखकर उनकी हंसी बना दी। इस पर नाराज भगवान श्री गणेश ने चंद्र देव को श्राप दे दिया। जो भी विनायक चतुर्थी पर चंद्र देव का दर्शन करेगा उसे भी पाप लगेगा। इस रात के बाद चंद्र देव की चमक किसी की पड़ती गई। कुछ समय बाद चंद्र देव को अपनी गलती के एहसास होने पर उन्होंने एकदंत से क्षमा याचना की। प्रथम पूज्य श्री गणेश ने कहा कि श्राप का असर तो खत्म नहीं होगा लेकिन माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को जो भी चंद्र देव को आगे देकर मेरा व्रत करेगा उसे उत्तम संतान की प्राप्ति होगी। बिना चंद्र देव की पूजा की मेरा व्रत अधूरा माना जाएगा।
इन शहरों पर कब निकलेगा चांद
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 8:55, कानपुर में 8 57, प्रयागराज में 8 52 बजे चंद्र उदय होगा। वहीं दिल्ली में 09 09 बजे, राजस्थान की राजधानी जयपुर में 9 16, उदयपुर में 9 26 और जोधपुर में 9 28 बजे चंद्रोदय का समय है। वहीं बिहार की राजधानी पटना में 8 39 बजे, भागलपुर में 8 31 बजे और पूर्णिया में 8 29 बजे चंद्रोदय का समय है।











