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अलविदा 2018 : इन दो महिला साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य जगत में रचा इतिहास

चार दिन बाद नया साल 2019 (New Year 2019) आने वाला है। हिंदी साहित्य जगत में 2017 में महिलाओं ने भारत को एक नया मुकाम दिया उसी तरह महिलाओं द्वारा सफलता का परचम लहराने का यह सिलसिला 2018 में भी जारी रहा। इस साल आधी आबादी ने हिंदी साहित्य जगत में जो नया मुकाम हासिल किया उसपर एक नजर।

अलविदा 2018 : इन दो महिला साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य जगत में रचा इतिहास

चार दिन बाद नया साल 2019 (New Year 2019) आने वाला है। हिंदी साहित्य जगत में 2017 में महिलाओं ने भारत को एक नया मुकाम दिया उसी तरह महिलाओं द्वारा सफलता का परचम लहराने का यह सिलसिला 2018 में भी जारी रहा। इस साल आधी आबादी ने हिंदी साहित्य जगत में जो नया मुकाम हासिल किया उसपर एक नजर...

हिंदी साहित्य में महिलाओं की उपस्थिति का ईमानदार विश्लेषण किया जाए तो कई नाम इसमें शामिल होंगे। खासकर उपन्यास विधा में महिला लेखकों ने अपनी सशक्त

पहचान बनाई है। वरिष्ठ साहित्यकार चित्रा मुद्गल को इस साल साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार उनके उपन्यास ‘पोस्ट बॉक्स नं. 203 नाला सोपारा’ के लिए दिया गया। वह कई दशक से लेखन कार्य कर रही हैं और यह उनके लेखकीय प्रतिबद्धता को एक सम्मान मात्र है। वहीं जानी-मानी लेखिका ममता कालिया

को उनके उपन्यास ‘दुक्खम सुक्खम’ के लिए व्यास सम्मान दिया गया। साथ ही कई अन्य महिला साहित्यकारों ने साहित्य की अलग-अलग विधाओं में अपनी पहचान को और पुख्ता किया है। इस साल जिनकी किताबें खासी चर्चा में रहीं, उन लेखिकाओं में अलका सारागवी, मृणाल पांडे, गीतांजलि श्री के नाम शामिल हैं। वहीं साहित्य और शिक्षा वर्ग में पद्मश्री सम्मान मध्य प्रदेश की लेखिका मालती जोशी को दिया गया।

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