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फुटबॉल की दुनिया में भारत कहां खड़ा है

इस बार इसका मेजबान ब्राजील ही है, माना जाता हैकि हर ब्राजीलियन के खून में फुटबॉल रचा बसा है।

फुटबॉल की दुनिया में भारत कहां खड़ा है

नई दिल्‍ली. फुटबॉल एक खेल न होकर जुनून है। यही वजह हैकि जो लोग फुटबॉल प्रशंसकों की दुनिया में शामिल होते हैं वे दीवानगी की हद तक पहुंच जाते हैं। इसी दीवानगी में इसका आकर्षण भी छिपा है। दरअसल, यह सभी खेलों का राज भी है। क्योंकि यह हर तरह के बंधनों को तोड़ देता है। क्या अमीर-गरीब, गोरे-काले, यहूदी-ईसाई, हिंदू-मुसलमान का भेद यहां मिट जाता है। इसके दीवानों के लिए फुटबॉल की परिभाषा भी यही है। अगले एक महीने तक पूरी दुनिया को अपने आगोश में लेने वाली विश्व कप फुटबॉल की खुमारी का आगाज बृहस्पतिवार को मेजबान ब्राजील और क्रोएशिया के बीच मुकाबले के साथ हो गया है। पहली बार 1930 में उरुग्वे में इसकी शुरुआत हुई थी।

तब से लेकर प्रत्येक चार वर्ष बाद आयोजित होने वाले इस खेल उत्साव का यह 20वां संस्करण है। 1930 में 4.46 लाख लोगों ने इसे तीन स्टेडियम में देखा और 13 टीमों ने इसमें भाग लिया था। हालांकि उस दौरान टेलीविजन का विस्तार नहीं हुआथा। तब से अब तक 84 वर्ष बीत चुके हैं। इस बीच दुनिया सामाजिक और तकनीक के स्तर पर ढेरों बदलाव का गवाह बनी है। फीफा विश्व कप का एक खास आकर्षण इसमें इस्तेमाल होने वाली गेंद होती है। इस बार इस गेंद को ब्राजुका नाम दिया गया है। जिसका स्थानीय भाषा में अर्थ है ब्राजीलियाईजीवन। इस बार इसमें 32 टीमें हैं, 12 स्थानों पर मैच खेले जाएंगे और स्टेडियम सहित टेलीविजन पर विश्व भर के कईअरब लोग इसका आनंद उठाएंगे। और सबके मन में यही सवाल होगा कि कौन जीतेगा?

हालांकि ब्राजील को इस बार भी प्रबल दावेदार माना जा रहा है। वहीं पुर्तगाल, स्पेन, र्जमनी की टीमें भी मजबूती के साथ खड़ी हैं। कुल मिलाकर महीने भर चलने वाली इस महाप्रतियोगिता में वही टीम मंजिल तक पहुंचेगी जिसमें दृड़ संकल्प, धैर्य व सही समय पर सही फैसला लेने का माद्दा होगा। अब तक सात देश ही फाइनल में जीत का स्वाद चख पाए हैं जिसमें पांच बार ब्राजील ने जीता है। इस बार इसका मेजबान ब्राजील ही है। माना जाता हैकि हर ब्राजीलियन के खून में फुटबॉल रचा बसा है। हम सब जानते हैं कि फुटबॉल का जन्मदाता इंग्लैंड है परंतु इसे ऊंचाइयों तक पहुंचाने और इसमें कला भरने का काम दक्षिण अमेरिकी देशों ने किया जिसमें ब्राजील सबसे ऊपर आता है।

ब्राजील के खिलाड़ियों के खेल के तरीके और गोल दागने की अचूक कला रोमांच पैदा करती है। इस विश्व कप में पहली बार गोल लाइन तकनीक का प्रयोग हुआ है जिससे यह आसानी से पता लग जाएगा कि गोल हुआ है या नहीं। वहीं इस बार भी सबकी निगाहें लियोनल मेसी, क्रिस्टियानो रोनाल्डो, वायने रूनी और नेमार पर होगी। हालांकि हर बार की तरह इस बार भी भारत दर्शक की ही भूमिका में रहेगा। यह दुर्भाग्य है कि एक अरब आबादी वाला देश विश्व कप में नहीं है।

क्रिकेट के आगे फुटबॉल को हमने उपेक्षित कर दिया है। फुटबॉल के लिए इंडियन सुपर लीग के रूप में एक किरण दिखाई दी है, परंतु सरकारी स्तर पर भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले दिनों में भारत में भी फुटबॉल उस स्तर तक उठ सकेगा। और विश्व कप में हमारे भी खिलाड़ी खेल सकेंगे।

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