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चिंतनः व्यापमं घोटाले का सच सामने आने की उम्मीद

एक साल से विपक्षी दल व्यापमं घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहे थे।

चिंतनः व्यापमं घोटाले का सच सामने आने की उम्मीद
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सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के व्यापमं (व्यावसायिक परीक्षा मंडल) घोटाले से जुड़े सभी मामले बृहस्पतिवार को सीबीआई को सौंप दिए। अर्थात घोटाले के साथ ही इस केस से जुड़े लोगों की संदिग्ध हालात में हुई मौत की जांच करने का जिम्मा भी सीबीआई को सौंपा गया है। अब अगले 24 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में वह अपनी पहली जांच रिपोर्ट पेश करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही सुप्रीम कोर्ट यह फैसला लेगा कि वह इस जांच की निगरानी करे या नहीं।
दूसरी तरफ, गवर्नर राम नरेश यादव को हटाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्यपाल और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है। व्यापमं घोटाले में राम नरेश यादव पर भी आरोप है, लेकिन संवैधानिक पद पर होने की वजह से उनसे अब तक पूछताछ भी नहीं हुई है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में व्यापमं घोटाले और उससे जुड़े लोगों की मौतों की सीबीआई से जांच के लिए कई याचिकाएं दी गई थीं, जिन पर सुनवाई के बाद अदालत ने ये आदेश दिए हैं।
मध्य प्रदेश में विभिन्न इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश सहित कई सरकारी सेवाओं में भर्ती व्यापमं के जरिए होती है। 2013 में पता चला कि इन भर्तियों में लंबे समय से बड़े पैमाने पर धांधली हो रही है। पैसा लेकर अक्षम लोगों को डॉक्टर बनाया जा रहा है। सरकारी नौकरियां दी जा रही हैं। इसकी व्यापकता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि करीब ढाई हजार लोगों को इसमें आरोपी बनाया गया है, जिसमें से करीब दो हजार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार लोगों में छात्र, अभिभावक, विधायक, मंत्री, दलाल, अधिकारी, कारोबारी आदि शामिल हैं। वहीं कहा जा रहा है कि व्यापमं घोटाले में आरोपी या गवाह रहे अब तक करीब चालीस लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है।
यहां गौर करने की बात यह है कि इस मामले को उजागर करने वाले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही हैं। उन्होंने ही सबसे पहले व्यापमं में हो रही खरीद-फरोख्त को पकड़ा था। उन्होंने बिना देरी किए इसकी जांच के लिए एसटीएफ का गठन किया था। बाद में मामला हाईकोर्ट में गया, जिसके बाद उसने एसआईटी का गठन कर अपनी निगरानी में जांच आरंभ कर दी। हालांकि पिछले एक साल से विपक्षी दल व्यापमं घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहे थे।
वे इसके लिए गत वर्ष नवंबर में सुप्रीम कोर्ट में भी गए थे। तब सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने भी माना था कि जांच सही दिशा में है और इसे सीबीआई को सौंपने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन हाल के चार-पांच दिनों में एक पत्रकार और घोटाले की जांच में सहयोग कर रहे जबलपुर मेडिकल कॉलेज के डीन की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु का मामला सामने आने के बाद लगने लगा था कि अब समय आ गया है कि इसे सीबीआई के हाथों में सौंप दिया जाए।
राज्य सरकार ने पहले ही अपनी स्थिति साफ करते हुए कोर्ट से सीबीआई जांच की गुजारिश कर दी थी। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने भी मामले की निष्पक्ष जांच पर जोर दिया था। उम्मीद की जानी चाहिए कि मामला सीबीआई के हाथ में जाने के बाद सारी सच्चाईदेश के सामने आएगी।
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