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हालात : संकट में दूरसंचार क्षेत्र

दूरसंचार क्षेत्र की स्थिति को देखने से लगता है कि आगामी वर्षों में देश में तीन दूरसंचार कंपनियां रह जाएंगी। प्रतिस्पर्धा के नहीं रहने से कंपनियों की मनमानियां बढ़ जाएंगी, जिससे सस्ती सेवाओं का दौर खत्म होने के आसार हैं। इससे आम लोगों की खरीद क्षमता में भी कमी आएगी, जिससे मांग और खपत कमजोर होगी। अर्थव्यवस्था की वृद्धि धीमी होगी। वोडाफोन-आइडिया के दिवालिया होने की स्थिति में बड़ी संख्या में लोगों के बेरोजगार होने की संभावना है।

हालात : संकट में दूरसंचार क्षेत्रसंकट में टेलीकॉम सेक्टर

समायोजित सकल आय, जो 1.47 लाख करोड़ रुपये है का समय-सीमा के अंदर भुगतान नहीं करने की वजह से दूरसंचार महकमा और दूरसंचार कंपनियों को सर्वोच्च न्यायालय ने कड़ी फटकार लगाई। भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया की बकाया राशि लगभग 89,000 करोड़ रुपये है। सर्वोच्च न्यायालय ने दूरसंचार कंपनियों से कहा था कि वे सरकार को मूल राशि, दंड शुल्क और ब्याज मिलाकर कुल 1.47 लाख करोड़ रुपये की राशि का भुगतान करें।

सर्वोच्च न्यायालय की फटकार के बाद भारती एयरटेल ने भारती हेक्साकॉम और टेलीनॉर की तरफ से कुल 10,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया और बची राशि का भुगतान 17 मार्च तक करने की बात कही है। भारती एयरटेल पर लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क समेत कुल 35,586 करोड़ रुपये का बकाया है। सबसे बड़े बकायेदार वोडाफोन-आइडिया ने भी 2500 करोड़ रुपये का भुगतान किया है और कानूनी कार्रवाई नहीं करने की गुहार लगाई है। टाटा समूह ने भी 2190 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। अन्य प्रमुख बकायेदारों में बीएसएनएल, एमटीएनएल आदि हैं, जिनकी वित्तीय स्थिति बहुत ज्यादा खराब है।

वोडाफोन आइडिया लिमिटेड पर 53,038 करोड़ बकाया हैं, जिसमें 24,729 करोड़ रुपये का स्पेक्ट्रम बकाया और 28,309 करोड़ रुपये का लाइसेंस शुल्क शामिल है, जिसका भुगतान करने में कंपनी असमर्थ है। वीआईएल में वोडाफोन की 45.39 प्रतिशत हिस्सेदारी है। दुनिया भर में वोडाफोन समूह का ग्राहक आधार 30 सितंबर 2019 तक 62.5 करोड़ था, जिसमें उसके संयुक्त उद्यम एवं सहायक इकाइयां भी शामिल थीं। यह ग्राहकों की संख्या के हिसाब से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी है। वोडाफोन लंदन की कंपनी है, जिसका नेटवर्क विश्व के 24 देशों में है। वोडाफोन का लगभग 50 प्रतिशत ग्राहक आधार भारत में है, जहां इसका गठबंधन आदित्य बिड़ला समूह के साथ है और यह वोडाफोन-आइडिया के नाम से जाना जाता है। भारत में इसका ग्राहक आधार लगभग 33.6 करोड़ है।

इस प्रकार दिवालिया होने की स्थिति में वोडाफोन समूह का आकार भारती एयरटेल, जिसका ग्राहक आधार 41 करोड़ है और रिलायंस जियो, जिसका ग्राहक आधार 36.9 करोड़ है से कम हो जाएगा। समस्या वोडोफोन-आइडिया के ग्राहकों का समायोजन भारती एयरटेल, रिलायंस जियो, बीएसएनएल और एमटीएनएल के द्वारा किए जाने में भी है, क्योंकि इसके लिए इन कंपनियों को अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ानी होगी और भारी-भरकम पूंजी की जरूरत होगी, लेकिन मौजूदा समय में वे गंभीर वित्तीय संकट के दौर से गुजर रहे हैं। वोडाफोन आइडिया के वित्त वर्ष 2018-19 की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय संकट के कारण कंपनी के लिए परिचालन एक बड़ी चुनौती बन गई है। आज भारत में दूरसंचार सेवा दुनिया में सबसे सस्ती है। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मुताबिक जून 2016 से दिसंबर, 2017 के बीच देश में मोबाइल डाटा की दरों में 95 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई। अब मोबाइल डाटा 11.78 रुपये प्रति गीगाबाइट के औसत कीमत में उपलब्ध है। मोबाइल कॉल की दरें भी 60 प्रतिशत गिरकर करीब 19 पैसे प्रति मिनट हो गई हैं।

माना जा रहा है कि एजीआर पर सर्वोच्च न्यायालय के ताजा फैसले के बाद दूरसंचार कंपनियां विविध सेवाओं की टैरिफ में आने वाले दिनों में और भी ज्यादा बढ़ोतरी करेंगी। टैरिफ में वृद्धि का सिलसिला शुरू भी हो गया है। वोडाफोन-आइडिया,एयरटेल और रिलायंस जियो ने हाल ही में अपने टैरिफ में बढ़ोतरी की है। माना जा रहा है कि दूरसंचार कंपनियां आने वाले दिनों में 15 से 20 प्रतिशत टैरिफ में बढ़ोतरी कर सकती हैं ताकि वे अपने घाटे को कम कर सकें। दूरसंचार नियामक ट्राई ने भी दूरसंचार कंपनियों द्वारा की जाने वाली टैरिफ बढ़ोतरी में किसी भी तरह के हस्तक्षेप से मना कर दिया है। ऐसे में दूरसंचार सेवाओं का महंगा होना तय माना जा रहा है। दिलचस्प है कि एक तरफ दूरसंचार कंपनियां दूरसंचार सेवाओं को महंगा करने की बात कह रही हैं तो दूसरी तरफ सरकार 2020 तक भारत में 5जी सेवा लाना चाहती है। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारत 5जी स्पेक्ट्रम के जरिये वैश्विक बाजार में अपनी धाक जमा सकता है। 5जी का फायदा चिकित्सा, शिक्षा, मनोरंजन आदि क्षेत्रों में भी देखने को मिलेगा की बात भी आर्थिक समीक्षा में कही गई है।

मौजूदा परिवेश में सबसे ज्यादा फायदा रिलायंस जियो को मिलने की संभावना है, क्योंकि यह वित्तीय रूप से बेहद ही मजबूत कंपनी है। आज न तो भारती एयरटेल और न ही एमटीएनएल व बीएसएनएल इसका मुकाबला कर सकती हैं, क्योंकि इनकी वित्तीय स्थिति बहुत ही ज्यादा खराब है। दूरसंचार कंपनियों पर भारतीय स्टेट बैंक का सबसे ज्यादा कर्ज है। बैंक ने कंपनियों को 29000 करोड़ रुपये का फंड बेज्ड और 14000 करोड़ रुपये का नन-फंड बेज्ड कर्ज दिया है। अगर कंपनियां अपने बकाया का भुगतान नहीं कर पाती हैं तो 14000 करोड़ रुपये की गारंटी भी फंड बेज्ड कर्ज में तब्दील हो जाएगी, जिससे दूरसंचार क्षेत्र को स्टेट बैंक द्वारा दिया गया कुल कर्ज 43000 करोड़ रुपये का हो जाएगा। साफ है दूरसंचार क्षेत्र का मौजूदा संकट बैंकों के लिए भी बड़ा संकट साबित हो सकता है।

यह भी कहा जा रहा है कि अगर एजीआर का भुगतान दूरसंचार कंपनियां कर देती हैं तो वित्त वर्ष 2019-20 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.5 प्रतिशत रह सकता है। गौरतलब है कि संशोधित अनुमान में इसके जीडीपी के 3.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। हालांकि,यह संभव प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि वोडाफोन-आइडिया के दिवालिया के होने के बाद बैंकों का यह खाता एनसीएलटी में चला जाएगा।

दूरसंचार क्षेत्र की मौजूदा स्थिति को देखने से लगता है कि आगामी वर्षों में देश में तीन दूरसंचार कंपनियां रह जाएंगी। निजी कंपनियों में रिलायंस जियो एवं भारती एयरटेल और सरकारी कंपनियों में बीएसएनएल। बहरहाल, प्रतिस्पर्धा के नहीं रहने से दूरसंचार कंपनियों की मनमानियां बढ़ जाएंगी, जिससे सस्ती सेवाओं के दौर के खत्म होने के आसार बढ़ गए हैं। इससे आम लोगों की खरीद क्षमता में भी कमी आएगी, जिससे मांग और खपत में कमी आएगी और अर्थव्यवस्था की वृद्धि धीमी होगी। वोडाफोन-आइडिया के दिवालिया होने की स्थिति में बड़ी संख्या में लोगों के बेरोजगार होने की संभावना है। बैंकों के एनपीए में बढ़ोतरी होना भी तय है। साथ ही, भारत को डिजिटल बनाने की संकल्पना को साकार करने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

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