Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

Supreme Court Decision : सेना में भी बराबर की भागीदार होंगी महिलायें

Supreme Court Decision : एयर स्ट्राइक के बाद जब पाक लड़ाकू विमान भारतीय सीमा में घुसे तो इंडियन एयरफोर्स में फायटर कंट्रोलर मिंटी अग्रवाल ही वो अफसर थीं। जिनकी बदौलत दुश्मन को बैरंग लौटना पड़ा। कंट्रोल रूम में बैठीं मिंटी ही इस डॉग फाइट में वायुसेना के पायलट अभिनंदन वर्धमान को गाइड कर रही थीं।

सेना में महिलाओं को भी मिलेगा स्थाई कमीशन का लाभ, जानें आखिर क्यों पहुंचा था ये मामसा सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने सेना में महिलाओं को बराबर अधिकार का दिया आदेश

याद कीजिए भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट स्थित आतंकी शिविर पर 26 फरवरी को की गई एयर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अगले दिन पाकिस्तानी वायुसेना के विमानों ने सीमा को पार करके भारत पर हमला करने का प्रयास किया था, हमारी वायुसेना ने कुशलतापूर्वक न केवल उन्हें खदेड़ा बल्कि पाकिस्तान को अमेरिका से मिले फाइटर एफ-16 को मार गिराया।

एयर स्ट्राइक के बाद जब पाक लड़ाकू विमान भारतीय सीमा में घुसे तो इंडियन एयरफोर्स में फायटर कंट्रोलर मिंटी अग्रवाल ही वो अफसर थीं, जिनकी बदौलत दुश्मन को बैरंग लौटना पड़ा। कंट्रोल रूम में बैठीं मिंटी ही इस डॉग फाइट में वायुसेना के पायलट अभिनंदन वर्धमान को गाइड कर रही थीं। मिंटी का काम पायलट को दुश्मन विमानों की सटीक लोकेशन मुहैया करवाना था ताकि पायलट खुद को दुश्मन लड़ाकू विमानों से बचाते हुए उसे निशाना बना सके। विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान अपने मिग-21 बायसन लड़ाकू विमान से दुश्मन के दो एफ-16 विमानों का पीछा कर रहे थे और मिंटी उन्हें दुश्मन विमानों की सटीक लोकेशन दे रही थीं।

इस दौरान एक मौके पर मिंटी ने अभिनंदन से कहा, टारगेट लॉक, हिट और अभिनंदन ने मिसाइल दाग दी और पल भर में एफ-16 जमीन पर गिर पड़ा। मिंटी को इस उपलब्धि के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अगस्त 2019 में युद्ध सेवा मेडल से नवाजा था। एक महिला अधिकारी द्वारा इतने बड़े कारनामे को अंजाम देने के बावजूद महिलाओं को देश की सेना में अब तक स्थायी कमीशन का अधिकार नहीं था। इस बारे में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 2010 में महिला अधिकारियों के पक्ष में फैसला सुनाए जाने के बाद वायुसेना और नौसेना में महिला अफसरों को स्थाई कमीशन मिल गया, लेकिन सरकार ने यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगा दी कि पुरुष सैनिक महिला अफसरों से आदेश लेने को तैयार नहीं हैं। यह अपने आप न केवल दुर्भाग्यपूर्ण बल्कि सेना में उपलब्धियों और भूमिकाओं के बावजूद महिलाओं की क्षमताओं पर संदेह और उनका अपमान करने का मामला था।

थलसेना में महिलाएं शॉर्ट सर्विस कमीशन के दौरान आर्मी सर्विस कोर, ऑर्डनेंस, एजुकेशन कोर, जज, एडवोकेट जनरल, इंजीनियर, सिग्नल, इंटेलिजेंस और इलेक्िट्रक-मैकेनिकल इंजीनियरिंग ब्रांच में ही एंट्री पा सकती थीं। उन्हें कॉम्बैट सर्विसेस जैसे इन्फैंट्री, आर्म्ड, तोपखाने और मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री में काम करने का मौका नहीं दिया जाता था। हालांकि मेडिकल कोर और नर्सिंग सर्विसेस में ये नियम लागू नहीं होते। इनमें महिलाओं को परमानेंट कमीशन मिलता है। वे लेफ्टिनेंट जनरल पद तक भी पहुंची हैं, लेकिन सेना में वे स्थायी कमीशन से वंचित थी। सोमवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की महिलाओं को कमांड पोस्ट न देने के पीछे शारीरिक क्षमताओं और सामाजिक मानदंडों का हवाला देने वाली दलील को खारिज करते हुए कहा कि उन सभी महिला अफसरों को तीन महीने के अंदर आर्मी में स्थायी कमीशन दिया जाए, जो इस विकल्प को चुनना चाहती हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब आर्मी में महिलाओं को पुरुष अफसरों से बराबरी का अधिकार मिल गया है। अभी तक आर्मी में 14 साल तक शॉर्ट सर्विस कमीशन में सेवा दे चुके पुरुष सैनिकों को ही स्थायी कमीशन का विकल्प मिल रहा था, लेकिन महिलाओं को यह हक नहीं था। सुप्रीम कोर्ट का यह अपने आप में प्रगतिशील और ऐतिहासिक फैसला है। इससे महिलाओं को बराबरी का मौका मिलेगा। यह फैसला बहुत पहले हो जाना चाहिए था। देश के विकास में महिलाओं का अहम योगदान रहा है। वे हर उन्नति में बराबर की भागीदार हैं। हर क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों के कंधे से कंधा मिलकर आगे बढ़ रही हैं तो फिर उन्हें सेना में बराबरी का दर्जा क्यों नहीं। देर आए, दुरुस्त आए। अब इस फैसले के बाद महिलाएं देश की रक्षा में भी बराबर की भागीदार होंगी।

Next Story
Top