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अवधेश कुमार के लेख: साद का गुनाह अक्षम्य

मौलाना साद पुलिस के चार नोटिस की अवमानना कर छिपे हुए हैं। जिस तरह जमात ने दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर कोरोना संक्रमण को कथित रूप से जान-बूझकर फैलाया। फिर जमातियों ने स्वास्थ्यकर्मियों पर जानलेवा हमले किए, इससे पता चलता है कि साद ने उनके भीतर इतना जहर भर दिया है कि वे समझने के लिए तैयार ही नहीं कि स्वास्थ्यकर्मी उनकी रक्षा के लिए हैं। एेसे में मौलाना साद अपना, अपने संगठन, मुस्लिम समुदाय और कहा जाय तो पूरे देश का गुनहगार हैं।

अवधेश कुमार के लेख: साद का गुनाह अक्षम्य

तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना मोहम्मद साद कांधलवी पुलिस के चार नोटिस की अवमानना कर छिपे हुए हैं। हालांकि साद का इन दिनों जो भी बयान आ रहा है उससे ऐसा लगता ही नहीं कि यह वही व्यक्ति है जो अपने जमातियों को कोरोना संक्रमण रोकने के लिए सरकार द्वारा पहले सोशल डिस्टेंसिंग का आग्रह और बाद में लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाने के लिए उकसा रहा था। उनका सबसे अंतिम ऑडियो संदेश यह है कि सभी लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, सरकार का जो निर्देश है उसके साथ चलें और नमाज के लिए इकट्ठा न हों, अपने-अपने घरों में ही अदा कर लें। इसके पहले भी उनका संदेश सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने तथा क्वारंटीन आदि के आदेश को मानने की अपील थी। इसे क्या कहेंगे? भारतीय कहावतों में से एक ही यहां उपयुक्त है-अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे, लेकिन पुलिस को उनको तलाशना पड़ रहा है। कोरोना टेस्ट करवाने का दावा करने के बावजूद वो सामने नहीं आ रहे। राजधानी दिल्ली में पुलिस के बीच सबसे ज्यादा संक्रमण जमातियों के कारण ही आया। चांदनी महल थाने के ही आठ पुलिसकर्मी कोरोना संक्रमित पाए गए। क्योंकि उन्होंने सूचना के आधार पर चांदनी महल क्षेत्र की मस्जिदों से जमातियों को तलाशना शुरू किया और 100 जमाती निकले जिसमें से 52 संक्रमित आए।

जमाती देश के लिए कोरोना के सबसे बड़े प्रसारक बन चुके हैं। भले मुस्लिम समाज के लोग इसकी चर्चा पर बिफर जाते हैं। मौलाना साद निजामुद्दीन मरकज ऑपरेशन के बाद से ही भूमिगत हो गए थे। उसके बाद से उनके सारे बयान वकीलों के माध्यम से आने लगे। वे जो कुछ करते हैं वकीलों के सुझाव के अनुसार। वकीलों ने ही बताया कि वह अभी क्वारंटीन में हैं तो 14 दिन इसमें निकल गए। इसके बाद सामने न आने का क्या कारण है? शेर की तरह दहाड़कर तकरीरें करने वाला इस तरह क्यों छिप रहा है? उनकी तकरीरें थीं कि हम आइसोलेशन नहीं मानेंगे, कोरोना मुसलमानों के खिलाफ साजिश है, मस्जिदें बंद कराने के लिए है, मुसलमानों को एक दूसरे से अलग करने के लिए है, हमारा भाईचारा खत्म करने के लिए है, इसे मत मानो। अल्लाह ने मौत नसीब की होगी तो तुम्हें बचाएगा कौन? मस्जिद में मरना तो सबसे अच्छी मौत है। यानी मर जाओ, लेकिन कोरोना का टेस्ट मत कराओ, सामाजिक दूरी का पालन मत करो, साथ रहो, साथ खाओ, साथ नमाज पढ़ो भले मर जाओ।

जो संगठन अपने को धर्म प्रचार का संगठन कहता है उस संगठन का मुखिया कानून के सामने हाजिर होने की जगह लुका-छिपी का खेल खेले तो उसे आप क्या कहंेगे। उन पर धीरे-धीरे कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्िड्रंग एक्ट यानी हवाला निषेघ कानून के तहत मामला दर्ज कर जांच आरंभ कर दी है। आयकर विभाग भी उनकी घोषित संपत्तियों का आकलन कर रहा है। दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के बाद जांच के दौरान यह पता चला है कि 13-15 मार्च तक हुए विशेष आयोजन से पहले जमात के बैंक खातों में विदेश से बहुत बड़ी रकम आई थी। किसी संस्था या व्यक्ति के खातों में अचानक विदेशों से ज्यादा धन आने के बाद बैंकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। निजामुद्दीन स्थित बैंक के अधिकारी ने जमात के खातों में नकदी का प्रवाह अचानक बढ़ने पर साद के चार्टर्ड अकाउंटेंट को बुलाकर औपचारिक कार्रवाई के तहत जानकारियां मांगी थी तथा उन्हें मोहम्मद साद के साथ दोबारा आने को कहा था। जाहिर है, साद तब तक ऊंची हैसियत वाले व्यक्ति थे। उनके लिए बैंक के निर्देश के कोई मायने नहीं थे। बैंक अधिकारियों ने मिलने का समय मांगा पर व्यस्तता का हवाला देकर साद ने समय नहीं दिया। बार-बार उनके लोग कहते रहे कि वे व्यस्त हैं। पुलिस ने भी बैंक से जानकारी लेकर जमात के सीए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

उनकी कठिनाइयां बढ़ गई हैं इसमें दो राय नहीं हो सकती। पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी, जिसमें अब गैर इरादतन हत्या का मामला भी जुड़ चुका है तथा हवाला मामले को एक साथ देखने की जरूरत है। प्रवर्तन निदेशालय के आ जाने का मतलब है उनकी देश-विदेश की संपत्तियों का स्रोत खंगाला जाएगा और नहीं मिलने पर हवाला कानून के तहत मुकदमा चलेगा। आयकर विभाग भी उन पर मामला चलाएगा। माना जा रहा है कि साद की देश के साथ विदेशों में भी संपत्तियां हैं, इसलिए जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि उसके पास मौजूद रकम और दूसरे मुल्कों में संपत्ति की खरीद का स्रोत क्या है? प्रवर्तन निदेशालय ने क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को ही अपने केस का आधार बनाया है। जिस तरह जमात ने कोरोना संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर देश में इसके संक्रमण को जान बूझकर फैलाया है उसके भी मामले अलग-अलग राज्यों मंें दर्ज हो रहे हैं। काश, ऐसे जहरीले संगठन और उसके मुखिया के खिलाफ यह सब पहले हुआ होता।

सवाल है कि होना क्या चाहिए? कुछ लोगों का मानना है कि उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाया जाना चाहिए। यह छोटी मांग है। इसमें उनको गिरफ्तार कर निश्चित समय तक जेल में रखा जा सकता है। समीक्षा समिति यदि अनुकूल रिपोर्ट न दे तो उन्हें छोड़ा नहीं जा सकता। धर्म प्रचार के नाम पर तबलीगी जमात अन्य तरह के अपराध कर रहा था। उसके तथाकथित धर्म प्रचाक पर्यटन वीजा पर आ रहे थे और बिना रोक-टोक धर्म प्रचार का काम करते थे। धर्म प्रचार के लिए मिशनरी वीजा का प्रावधान है। पर्यटन वीजा पर ऐसा करना अपराध है। इसलिए केन्द्र सरकार ने सभी विदेशी जमातियों का वीजा रद कर दिया है। राज्यों में मामले दर्ज हो रहे हैं और वे गिरफ्तार भी हो रहे हैं। 900 से ज्यादा विदेशियों को काली सूची में डाला जा चुका है। अंततः सारे अपराधों की जिम्मेदारी तो मौलाना साद के सिर ही आएगी। उनके निर्देश या आदेश पर ही तो सब कुछ होता रहा है। फिर जिस तरह जगह-जगह जमाती स्वास्थ्यकर्मियों एवं पुलिस टीमों पर जानलेवा हमले कर रहे हैं वो जघन्य अपराधों की श्रेणी में आता है। इससे पता चलता है कि मौलाना साद एवं उनके साथियों ने इनके अंदर इतना जहर भर दिया है कि ये समझने के लिए तैयार ही नहीं कि स्वास्थ्यकर्मी एवं पुलिस टीम उनकी रक्षा के लिए आ रही है। मजहबी कट्टरता और जाहिलपन का इससे भयानक उदाहरण दूसरा हो नहीं सकता।

जाहिर है, इस तरह साद के खिलाफ इन सारे हमलों का ध्यान रखते हुए संघर्ष के लिए भड़काने के आरोप में भी मुकदमा दर्ज होना चािहए। ये मामले आतंकवाद से कम नहीं है। इसलिए आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मुकदमा दर्ज होना चाहिए। यह तो जांच से ही पता चलेगा कि उनके सदस्यों में ऐसे कितने लोग थे जो हिंसक गतिविधियों से लेकर सांप्रदायिकता भड़काने में शामिल थे? दिल्ली दंगों से लेकर नागरिकता संशोधन कानून विरोधी हिंसा में भी इनकी भूमिका सामने आ रही है। चूंकि यह देश तक सीमित संगठन नहीं है, इसलिए पुलिस की जगह दूसरी केन्द्रीय एजेंसी को जांच सौंपनी चाहिए। सीबीआई भी हो सकती है। एनआईए को भी जांच सौंपने पर विचार किया जाना चाहिए। एनआईए हर पहलू से जांच कर सकती है। जमात और उसका प्रमुख मौलाना साद अपना, अपने संगठन, मुस्लिम समुदाय तथा पूरे देश का गुनहगार है। उनका गुनाह अक्षम्य है। ऐसे गुनहगारों को सबक मिलना जरूरी हो गया है और मिलेगा यह निश्चित है।

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