Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

व्यंग्य : केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान नाराज हैं, मतलब उतने नाराज नहीं हैं कि मंत्रिमंडल छोड़ दें

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान नाराज हैं, मतलब उतने नाराज नहीं हैं कि मंत्रिमंडल छोड़ दें। पर इतने नाराज हैं कि अगले लोकसभा चुनावों में अगर भाजपा ने उन्हे मनमाफिक सीटें नहीं दीं, तो वह सेकुलर हो जाएंगे।

व्यंग्य : केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान नाराज हैं, मतलब उतने नाराज नहीं हैं कि मंत्रिमंडल छोड़ दें

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान नाराज हैं, मतलब उतने नाराज नहीं हैं कि मंत्रिमंडल छोड़ दें। पर इतने नाराज हैं कि अगले लोकसभा चुनावों में अगर भाजपा ने उन्हे मनमाफिक सीटें नहीं दीं, तो वह सेकुलर हो जाएंगे। राष्ट्रसेवा के तीन रास्ते हैं-एक राष्ट्रवादी होकर, दूसरा सेकुलर होकर, तीसरा कभी राष्ट्रवादियों के साथ तो कभी सेकुलर होकर।

रामविलास पासवान तीसरे रास्ते के मुसाफिर हैं। रामविलास जो कई दशकों से केंद्र सरकार में मंत्री रहे, सरकार चाहे सेकुलरवालों की हो या राष्ट्रवादियों की। जो बंदा एडजस्ट करके चलता है, वह हर जगह मंत्री हो जाता है। पासवान की कामयाबी एक सबक है सबके लिए कि कुछ हो या ना हो, बंदा एडजस्टवादी होना चाहिए, नाराज भी होना चाहिए, पर नाराजगी फ्लेक्सिबल होनी चाहिए।

नाराज हैं इस बात से सरकार से कि नोटबंदी कर दी, ओके। पर खलीफाओं से मनमाफिक सीटें मिल जाएं तो नोटबंदी को क्रांतिकारी कदम भी बता सकते हैं। सेकुलर होना भी मजे का काम है। राष्ट्रवादी होना भी मजे का काम है। परम मजे का काम है रामविलास पासवान होना। जिन्हे देखकर किसी भी पार्टी को उम्मीद बंध सकती है कि अबकी बार इस घाट लग सकते हैं रामविलास पासवान।

पासवान फिनोमिना भारतीय राजनीति में शोध का विषय है। पासवान कभी संतुष्ट रहे, नहीं। तो क्या पासवान ने सरकार छोड़कर कोई आंदोलन खड़ा किया, नहीं। अब पासवानजी सेकुलर हो जाएंगे, ऐसी उम्मीदें सेकुलर खेमे को हैं। पासवान राष्ट्रवादी ताकतों के साथ रहेंगे, ऐसी उम्मीद राष्ट्रवादी खेमे को है। जो पासवानजी को जानते हैं, वो जानते हैं कि जहां से सीटें ज्यादा आ जाएंगी, पासवानजी वहीं हो जाएंगे।

पासवानजी ठोस राजनेता हैं। ठोस राजनेता उद्धव ठाकरे भी हैं। रोज भाजपा से झगड़ा और रोज भाजपा का संग। क्या उद्धव ठाकरे ने राम जन्म भूमि के लिए कोई वजन आंदोलन खड़ा किया, नहीं। क्या भाजपा से अलग कोई संघर्षयात्रा शुरु की, नहीं। नाराज हैं पर इतने नहीं, खुश हैं पर उतने भी नहीं। मुल्क की पालिटिक्स आधी अधूरी इसलिए है कि कुर्सी के लोभी नेता ना तो इधर हैं या ना उधर।

बस वो कुर्सी में हैं। अरविंद केजरीवाल ने राजनीतिक यात्रा भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरु की थी। हाल में 2जी घोटाले के आरोपी नेताओं की पार्टी वाले केजरीवालजी को सम्मान से शाल उढ़ा गए। अब खबरें हैं कि कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। कुर्सी के जितना नजदीक बंदा होता है, उतना ही उसे यह सत्य समझ में आने लगता है कि सब कुछ कुर्सी ही है।

सेकुलरिज्म, राष्ट्रवाद, भ्रष्टाचार कुर्सी तक पहुंचने के रास्ते हैं। इस रास्ते के कामयाब मुसाफिर हैं रामविलास पासवान। जैसे भी हैं रामविलास पासवान हैं। इसलिए मंत्री थे, हैं और रहेंगे।

Next Story
Top