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भोलाराम लाइव! मरने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ता

करना क्या यार! बस अपनी पेंशन के कागजों के बनने का इंतजार कर रहा हूं।

भोलाराम लाइव! मरने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ता

सच पूछो तो मैं इतना परेशान अपनी बीवी से नहीं हूं जितना अपने मरे दोस्त भोलाराम से हूं। सोचा था, मरने के बाद मेरी पीछा छोड़ देगा पर एक यह कमबख्त भोलाराम है कि मरने के बाद तो पहले से भी अधिक चिपक गया है। अब तो जैसे उसको कोई ऊपर काम है ही नहीं। दिन में दस दस बार फोन! मैं तो थक गया उसका फोन रिचार्ज करवा-करवा के! कल यों ही बैठा अपने आप से बतिया रहा था कि स्वर्ग से फिर भोलाराम का फोन आ गया। यार! भोलारम! अब तेरा क्या करूं? मरने के बाद भी मुए से अपनी माटी नहीं छूट रही। अपने दोस्त नहीं छूट रहे। मैंने अनमने से फोन उठाया तो वह चहकता बोला, ‘और दोस्त! क्या हो रहा है? अबके किसकी सरकार बना रहे हो दिल्ली में? कोई माल- ठाल दे गया क्या?

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अब तो दिल्ली के दर्द पर रोते-रोते उनकी आंखों के आसुंओं से यमुना में भी बाढ़ आ गई होगी। कोई डूबा तो नहीं?’ ‘कुछ नहीं, अपने आपसे बतिया रहा हूं। रही बात सरकार की। मेरी बला से किसकी बने, मुझे क्या! हम जनता को तो रामदास भी वैसा ही श्यामदास भी वैसा ही, सो इनकी लड़ाई में अपनी टांग क्यों तुड़वाएं। रही बात डूबने की तो तेरे जाने के बाद कोई डूबा है तो बस भाभी,’ मैंने कहा। तो वह पहले से भी अधिक जोर से हंसा तो मुझे खुशी मिली कि चलो, भोलाराम मरने के बाद ही सही, हंस तो रहा है, ‘और तू क्या कर रहा है वहां?’‘करना क्या यार! बस अपनी पेंशन के कागजों के बनने का इंतजार कर रहा हूं। अपने दफ्तर में बायोमेट्रिक लगने पर सोचा था कि बाबू टाइम पर आ मेरे पेंशन के कागज बना ही देगा पर उस मुए ने तो बायोमेट्रिक ही तोड़ डाली। पेंशन के कागजों के बारे में पूछते पूछते अब तो यहां का पोस्टमैन मुझे देख ऐसे गायब हो जाता है जैसे अपने यहां गधे के सिर से सींग। पेंशन के कागज बन आ जाएं तो अगले जन्म में दाने-पानी का कुछ इंतजाम हो।

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अच्छा चल बता, वो जो नई सरकार बनने के बाद देश के कालेधन को अपने देश में लाने की बात चल रही थी, उसका कुछ हुआ कि नहीं..,कहां तक पहुंच गई बात? यार! पंद्रह लाख बहुत होते हैं। यहां तो जब तक जिंदा रहा बैंक पासबुक में मुए पंद्रह सौ भी न हुए। सच कहूं, हर खाते में जब पंद्रह लाख होंगे तो..। कई दिनों से अपने हिंदी के अखबार यहां नहीं आ पाएं हैं इसलिए परेशान था कि कालाधन जनता के खातों में जमा तो नहीं हो गया!’

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‘होगा तो तुझे तेरे मोबाइल पर मैसेज आ जाएगा,’ मुझे उस वक्त उस पर बहुत गुस्सा आया। यार भोलाराम तू भी न, मरने के बाद भी भोले का भोला ही रह गया। असल में जो उल्लू होते हैं, वे मरने के बाद भी उल्लू ही रह जाते हैं। ‘पर मेरा मैसेज अलर्ट तो बंद हो गया है। ऐसा करना, बैंक में मेरी ओर से अर्जी दे देना मेरे नंबर पर मैसेज अलर्ट फिर शुरू करने की। और हां, मेरी बीवी मतलब, अपनी भाभी से कहना कि मेरा बैंक अकाउंट मेरी तरह डेड मत होने देना।
जैसे कैसे तब तक उसे जिंदा रखना जब तक कि कालेधन वाले पैसे उसमें जमा न हो जाएं। और सुना, उस पीके के क्या हाल हैं।’ ‘उसको हफ्ता पहले हार्ट अटैक हो गया था,’ मैंने अपने हार्ट पर हाथ रखते कहा। ‘तो अब कैसा है?’ भोलाराम इतना चिंतित जो अपने बारे में होता तो आज यहीं होता। ‘अब ठीक है!’ ‘पर यार आजकल ऐसा क्यों हो रहा है कि जिन बंदों के पास हार्ट है मुआ हार्ट अटैक उन्हीं को पड़ रहा है?’ ‘तो क्या उनको पड़ेगा जिनके पास हार्ट ही नहीं।’ मैंने कहा तो वह ऐसा हंसा कि उसकी हंसी की गूंज पूरे मुहल्ले में सबने सुनी।
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