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व्यंग्य : काले धन की व्यथा

मै कितना भी अपने आप को धौला दिखाने की कोशिश करूं, लेकिन यह निगोड़ा काला पीछा ही नहीं छोड़ता।

व्यंग्य : काले धन की व्यथा
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लोकेंद्र नामजोशी
कल जब क्लब की मीटिंग में मैंने, सफेद झक कुर्ता-पायजामें पर सफेद शॉल ओढ़े र्शीमान कालेधन जी को इस नए शुभ-धवल अवतार में देखा तो पूछा की भाई, यह सफेदी की झंकार आज कहां गजब ढाने वाली है? तो वे बड़े ही कातर स्वर में बोले, अरे, कैसी सफेदी और काहे की झंकार! मै कितना भी अपने आप को धौला दिखाने की कोशिश करूं, लेकिन यह निगोड़ा काला पीछा ही नहीं छोड़ता।

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काल का इतना जुलम मुझ पर आज तक कभी नहीं हुआ। सब जानते हैं कि दिखने में काला नहीं, पर कालाधन नाम है मेरा। अब मेरे नाम की साथ ही काला लगा है इसका मतलब यह कतई नहीं की हर वक्त मुझे ही निशाना बनाया जाए। इतना कहकर उन्होंने अपनी व्यथा का काला नहीं धौला किस्सा कुछ इस प्रकार साझा किया मेरे साथ। आपको तो शुरू से ही पता है कि काले कपड़े पहनने का तो बिल्कुल भी शौक नहीं है मुझे। काले रंगों से भी कोई विशेष लगाव नहीं है मेरा।
आज तक कोई काले काम भी नहीं किए हैं मैंने। कोयले की दलाली में हाथ काले करने का थट्टी इयर्स तो क्या थट्टी डेज का भी कोई एक्सपीरियंस नहीं है मेरे पास। विदेशों में काला धन रखने वाले 628 लोगों की सरकारी काली सूची में भी नाम नहीं है मेरा। सरकारी मुलाजिमों की तरह टेबल के निचे से काला धन लेते हुए भी कभी रंगे हाथों पकड़ा नहीं गया हूं मैं। काली सुनसान रातों में काले चोर की तरह किसी की काली काली आंखों का काला काजल तक नहीं चुराया है मैंने।
लिहाजा, इतना उज्वल और चमकदार ट्रैक-रिकॉर्ड होने के बावजूद भी जब सड़क से लेकर संसद तक एक ही शोर उठता है काला, काला, काला, काला तो ऐसा लगता है की सचमुच में स्विट्जरलैंड की बर्फ की वादियों में जाकर धौला बन जाऊं। अब आप ही बताएं की कालाधन नाम है मेरा तो इसमें भला मेरा क्या कसूर। सड़क तो सड़क संसद में भी मेरा ही नाम उछाला जा रहा है। जब-जब भी नई सरकार कोई नया कानून या नया अध्यादेश संसद के पटल पर रखना चाहती है तो हर तरफ मेरे नाम की ही आवाज उठने लगती है काला, काला, काला उसी शोर-शराबे में पुरे संसद सत्र का असामयिक अवसान हो जाता है।
कई बार तो ऐसा लगता है की यह पूरा का पूरा खेल मेरे खिलाफ किसी आईपीएल यानी (इशारा प्रीमियर लीग) क्रिकेट मैच की तरह फिक्सिंग का शिकार है। कल तक जब वे विपक्ष में थे तो वे तारसप्तक सुर में काला-काला का शोर मचाकर संसद का पूरा सत्र बर्बाद कर देते थे, अब यह विपक्ष मै है तो ये भी उसी सुर में वही राग काला दोहरा रहे हैं।
सरकारें बदल गईं, लेकिन सुर नहीं बदले। पिछली सरकार को भी मुझ काला से घातक एलर्जी थी। मेरा काला नाम सुनते ही सांप सूंघ जाता था पूरी की पूरी सरकार को। कई बार तो खुजली सी चलने लगती थी सरकार के पुरे बदन पर। अलबत्ता, मुझ निगोड़े कालाधन के चक्कर में पूरी की पूरी सरकार असमय ही काल-कवलित हो गई। अब तो मुझे यह डर सताने लगा है की पिछली, वर्तमान और अगली सरकार के साथ भी मेरा नाम काला इसी प्रकार चलता रहा तो कहीं दबंग1, दबंग2 और दबंग3 की तरह काला1, काला2 और काला3 का सीक्वल न बनाना पड़ जाए सरकार को।
उसके बाद वे बोले की भाई जब स्विस बैंक वाले भी आज तक इस बात का पता नहीं लगा पाए कि उसकी बैंको की तिजोरी में किस-किसका और कितना काला धन जमा है तो यह मुई सरकार किस खेत की मूली है। इतना कहकर उन्होंने अपना काला पुराण समाप्त किया।
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