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मनोज लिमये का व्यंग्य : सफाई करते रहो

स्वयं झाड़ू को भी यह अंदाजा नहीं रहा होगा कि उसे उम्मीद से चार गुना मिलने वाला है।

मनोज लिमये का व्यंग्य  : सफाई करते रहो
हिंदुस्तान ऐसा कमाल का देश है कि यहां कौन सी वस्तु कब महत्वपूर्ण हो जाएगी इस बारे में अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। जब एक राजनीतिक पार्टी ने अपना चुनाव चिह्न् झाड़ू रखा था तब स्वयं झाड़ू को भी यह अंदाजा नहीं रहा होगा कि उसे उम्मीद से चार गुना मिलने वाला है।
आजकल यदि किसी बात के चर्चे हैं तो वो सिर्फ और सिर्फ अपनी चित-परिचित झाड़ू है। इस 15 अगस्त से पहले अपने और झाड़ू के बीच संबंध बेहद औपचारिक टाइप के थे। झाड़ू के विषय में अपनी अल्प जानकारी मात्र इतनी सी थी कि यदि इसे पैर लग जाए तो तुरंत भारतीय संस्कृति का प्रदर्शन करते हुए इसे नमस्कार करो और माफी मांग लो। ऐसा करने का प्रबल कारण यह कि झाड़ू में लक्ष्मी का वास होता है ऐसा बाल्यकाल से सिखाया गया था।
अब जब कि देश में साफ-सफाई के महत्व की पुनस्र्थापना की जा रही है तो ऐसी स्थिति में झाड़ू पुन: सर्वोपरि हो चली है। शासकीय विभागों में काज समय पर हो न हो, किंतु फाइलों पर पड़ी धूल साफ होने के प्रारंभिक रुझान मिलने लगे हैं। अधिकारियों की निरीक्षण पंजी में एक नया कॉलम चस्पा हो गया है और वो है साफ-सफाई के बारे में अपनी टीप देने का।
मास्साब अपने विद्यार्थियों को सफाई का महत्व समझाने लगे हैं। कॉरपोरेट घरानों की हस्तियां हाथों में झाड़ू ले कर अपने फोटु खिंचवा रही हैं। आम जन की अपेक्षाओं तथा उम्मीदों पर हमेशा से झाड़ू फेरते आ रहे नेता गण झाड़ू हाथों में लिए सफाई कार्य के प्रति कृत संकल्प नजर आ रहे हैं।
रात के समय पान की गुमटी पर शासकीय शाला के मास्साब से मुलाकात हो गई। मास्साब पान की गुमटी के समीप की दूकान पर झाड़ू के भाव पर हीला- हुज्जत कर रहे थे। मोल-भाव तय कर वे झाड़ू हाथ में लेकर मेरी और मुखातिब हो कर बोले-और साहब आपके विभाग में नहीं चल रही है ये सफाई वाली मुहिम। मैंने आगामी खतरों को भांपते हुए कहा-वो तो सभी विभागों को आदेश हैं र्शीमान हम कौन से अछूते हैं।
वे बोले-जब लाल किले वाले उद्बोधन में प्रधानमंत्री ने स्वयं को देश का प्रधान सेवक कहा था उसी समय मैंने आपकी भाभीजी से कह दिया था कि कुछ नया होने वाला है। मैंने कहा-जी ये तो आपकी दूरदर्शिता है आखिर शिक्षक हैं आप। वे बोले-हमें दिक्कत साफ-सफाई से नहीं होनी चाहिए। जीवन में स्वच्छता का काफी महत्व है। विपक्ष को इसका विरोध नहीं करना चहिए।
मैंने कहा-देखिए विपक्ष को सुधरने में थोड़ा समय तो लगेगा ही सब एकदम थोड़ी ठीक हो जाएगा। वे बोले-हमारे क्षेत्र में कभी आ कर शाला की हालत तो देखिए, किन परिस्थितियों में शिक्षक काम कर रहा है यहां भी सफाई जरूरी है। वे तल्खी वाले सुर का आलाप लेते हुए बोले-बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन, गणवेश वितरण, मध्याह्न् भोजन व्यवस्थापन, छात्रवृत्ति वितरण, समय- बेसमय पर आने वाले चुनाव, मतदाता परिचय पत्र और ये प्रत्येक माह में आने वाले विशेष दिवसों का आयोजन सब का सब हमारे जिम्मे होता है जनाब।
पूर्व की सरकारों द्वारा अपनाई गई गलत नीतियों को भी सुधारने का अब समय आ गया है। मैंने कहा-आप सही कह रहे हैं। शुरुआत हो गई है। शिक्षण संस्थाएं भी चमकने लगेंगी। देश को साफ सुथरा करना है तो सभी लोगों को स्वच्छता मिशन में शामिल होना चाहिए। मैंने उनके द्वारा खरीदी झाड़ू पर स्नेह भरी नजर डाली और विचारों की झाड़ू घुमाता हुआ घर की और प्रस्थान कर गया।
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