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संतोष झांझी की कहानी : पराए घर का दरवाजा

रोदना को उसकी सास सीतो, राय साहब की कोठी में नन्हे राजा बाबा की धाय मां बनाकर ले आई।

संतोष झांझी की कहानी : पराए घर का दरवाजा
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रोदना को उसकी सास सीतो, राय साहब की कोठी में नन्हे राजा बाबा की धाय मां बनाकर ले आई। इसके एवज में उसे अच्छा पैसा, स्वादिष्ट-पौष्टिक खाना और शानदार रहन-सहन तो मिला लेकिन उसे अपनी नवजात बच्ची को दूध न पिलाने और अपने पति से भी दूर रहने की शर्त माननी पड़ी। लेकिन करीब डेढ़ साल बिताने के बाद अपने घर पहुंचकर उसने जो देखा, उसे यकीन ही नहीं हुआ।
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मैडम, सीतो किसी लड़की को साथ लेकर आई है।’
भोला आकर बता गया। जया ड्रॉइंग रूम में पहुंची। सीतो और उसके साथ आई उस लड़की ने भी हाथ जोड़े। पिंडलियों तक ऊंची मैली जर्जर साड़ी में सत्रह-अठारह साल की दुबली, सांवली लड़की एक मैली सी गुदड़ी में बच्चा सीने से लगाए खड़ी थी।
‘बड़ी मैडम को बुला लाओ।’ ऑर्डर सुनते ही भोला लगभग दौड़ते हुए चला गया।
‘क्या नाम है तुम्हारा?’
‘जी... रोदना...रोदना...’ रोदना की फंसी-फंसी आवाज।
‘रोदना है मैडम।’ सीतो बोली।
‘बच्चा कितने महीने का है?’ मैडम का प्रश्न था।
‘जी पच्चीस रोज की है मैडम।’ सीतो बोली।
‘यह ऊपर का दूध पी लेगी?’
‘जी पी लेगी... पी लेगी।’ वह हड़बड़ाई। तभी मैडम आ गर्इं, दोनों ने फिर हाथ जोड़े।
‘तुम्हें एक साल तक यहीं रहना होगा।’ बड़ी मैडम बोलीं।
‘जी।’ सीतो ही हर बात का जवाब दे रही थी।

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‘हमारी पसंद का खाना होगा। रोज दो वक्त नहाना, दो वक्त कपड़े बदलने होंगे। साबुन, कपड़ा, खाना, रहने के लिए कमरा, साफ बिस्तर हम देंगे, और...’ मैडम थोड़ा ठहरीं, ‘तुम्हारा घरवाला? एक साल तक उससे दूरी रखनी होगी।’‘आप चिंता मती करो मैडम, ये हमारी बहू है। मेरा लड़का तो ठेकेदार के साथ कमाने दिल्ली गवा है। छोटी बच्ची लेकर ये दिल्ली में कैसे कमाती? इसी वास्ते हम एको आपका पास लई आए। आपका राज बाबा एक साल का होने तक इधरेच रहेगी रोदना। कहीं नहीं जाएगी। मेरे लड़के का साया मैं एक साल इस पर नहीं पड़ने देगी।’‘ठीक है... हम इसे महीने का दो हजार रुपया देंगे। इसकी बच्ची के लिए गाय के दूध का भी इंतजाम हो जाएगा।’ बड़ी मैडम ने अपनी बात खत्म की।‘गाय के दूध की क्या जरूरत है मैडम। इसकी छाती में बहुत दूध उतरता है।’ सीतो खुशी से बोली।
‘नहीं... हमारा राजाबाबा जूठा दूध नहीं पिएगा। इंफेक्शन हो सकता है। बच्ची को ऊपर का दूध देना होगा।’ मैडम सख्ती से बोलीं।
‘जी...जी...’ सीतो और रोदना घबराकर एक सुर में बोलीं।‘और सीतो, तुम आज तक जो काम करती थी, अपना वह काम करती रहना।’‘जी मैडम...’
‘भोला, इसको नर्स के बाजू वाला कमरा बता दो। नर्स को मेरे पास भेजो।’
लड़की सिर झुकाकर बच्चे सहित भोला के पीछे चल दी। कुछ ही क्षण बात झक्क सफेद कपड़े पहने नर्स हाजिर थी।
‘वह लड़की, क्या नाम है उसका... हां रोदना तुम्हारे साथ वाले कमरे में रहेगी। उसकी चौबीस घंटे की ड्यूटी रहेगी एकदम तुम्हारी तरह। उसके साफ-सफाई से नहाने के बाद ही राजा बाबा को उसकी गोद में देना। नजर रखना वह दोनों समय नहा के कपड़े बदल ले। हर बार फीडिंग के समय उसके स्तन स्पंज करना मत भूलना। वह केवल फीडिंग करवाएगी। बाकी समय बाबा को पहले की तरह तुम ही संभालोगी। और हां, एक बात का ध्यान रखना, वह अपनी बच्ची को दूध न पिलाए।’‘जी मैम, समझ गई, आप निश्चिंत रहें।’ नर्स चली गई।
बड़ी मैडम ने नंबर डायल किया।
‘हैलो, डॉक्टर चौहान! हम राय साहब हाउस से राजरानी बोल रहे हैं। एक यंग लड़की धाय के लिए लाई गई है। आप आकर तुरंत मेडिकल चेकअप करके मुझे रिपोर्ट करें। चेकअप करके बताएं उसका दूध हमारे राजा बाबा के लिए सही होगा या नहीं।’
थोड़ी ही देर में डॉक्टर चौहान दल-बल के साथ कई तरह के उपकरण लेकर रोदना का चेकअप करने राय साहब हाउस पहुंच गए। डेढ़ घंटे में सारी रिपोर्ट तैयार थी। ब्लड, हार्ट, गला, स्किन और दूध सब ओके था। हाथ बांधे डॉक्टर ने रिपोर्ट दी।‘कोई भी स्किन डिजीज नहीं है मैम, कोई इंफेक्शन नहीं है। दूध बच्चे के स्वास्थ्य के लिए सही है। ब्लड भी ठीक है। हमने उसे कुछ टॉनिक दे दिए हैं। दो इंजेक्शन भी लगा दिए हैं।’
‘बाल देखे? उसमें गंदगी... मतलब जुएं वगैरह...’ बड़ी मैडम ने थोड़ा नाक चढ़ाकर पूछा।‘नहीं मैम, फिर भी हमने बालों की दवा भी दे दी है।’‘ठीक... जाइए।’
रायसाहब हाउस में आठ वर्ष बाद पोता हुआ, पर बेहद कमजोर। पैदा होते ही एक हफ्ते तक पीलिया से जूझता रहा। कुंवर और कुंवरानी बेहद व्यस्त, रोज देर रात तक बिजनेस पार्टियां, वैसा ही खाना। फिगर कॉन्शस कुंवरानी बच्चे को दूध पिलाना और दूध उतारने के लिए फैट बढ़ाने वाले घी-मेवे से बने फूड खाने को एकदम तैयार नहीं थीं। रोदना एक स्वस्थ बच्ची की मां, चढ़ती उम्र की जवान लड़की राजा बाबा को दूध पिलाने के लिए लाई गई थी। डॉक्टर ने साफ-साफ कह दिया था बच्चे को ऊपर का दूध डायजेस्ट नहीं होगा। बहुत कमजोर बच्चा है। इसे सिर्फ मदर फीड ही देना होगा। दिन-दिन भर और रात-रात भर जाग-जागकर बच्चे को दूध पिलाना कुंवरानी के बस का भी नहीं था। वैसे तो नर्स और आया ही बच्चे की देख-रेख करतीं, पर दूध तो कुंवरानी को ही पिलाना होता। इसी कारण इतने वर्ष तक उन्होंने बच्चे के बारे में सोचा ही नहीं था।
रोदना सहमी सी आंखें फाड़े खड़ी-खड़ी कमरे को देख रही थी। नर्स के निर्देशानुसार वह बच्चे सहित नहाकर साफ कपड़े पहन चुकी थी। कमरे के एक कोने में पलंग पर साफ बिस्तर बिछा था। उसी पलंग पर लिटाकर डॉक्टर ने उसका परीक्षण किया था। मोटी-मोटी दो सुई भी लगा गया। नर्स दो-तीन गोली और मीठी कसैली सी दवा पिला गई। रोदना को समझ नहीं आया कि उसे बीमारी क्या है? साफ चादर में लिपटे बच्चे को उसने नीचे एक कोने में सुला दिया और वहीं उकड़ूं बैठ गई। उसे भूख लग रही थी।
कुछ देर बाद ही दनदनाते हुए नर्स अंदर आई, उसके पीछे ट्रे थामे एक बैरा आया। उसे नीचे बैठे देख हड़बड़ाकर बोली, ‘नीचे नहीं ऊपर पलंग पर बैठो, सर्दी लग गई तो राजा बाबा पर भी असर होगा। बच्ची को भी ऊपर ही सुलाओ।’ट्रे में विविध व्यंजन थे। दो बड़े-बड़े सेव, घी तैरती दाल, घी से तर सब्जी, मक्खन लगी रोटियां, मेवे, गोंद, सोंठ, अजवाइन वाले शुद्ध घी में पगे चार लड्डू। उसकी नजरें ट्रे में भात तलाश रही थीं। बच्ची के लिए दूध से भरी बोतल थी।‘यह बच्ची को पिला देना। खाना खा लो, कुछ और चाहिए तो बता देना।’ नर्स ने आदेश दिया।
रोदना ने ट्रे की तरफ देख धीरे से सिर हिलाया। एक पल को सोचा, क्या वह भात मांग ले? पर वह चुप रही। कुनमुनाती बच्ची को उसने दूध पिलाने का प्रयास किया, पर बच्ची ने बुरा सा मुंह बनाकर होंठ सख्ती से बंद कर लिए। कहां मां का कोमल स्पर्श, कहां यह सख्त अजीब से महक वाली रबर... रोदना ने नर्स की तरफ देखा।‘धीरे-धीरे आदत हो जाएगी। जब खूब भूख से बिलबिलाए तब देना फटाफट पी जाएगी। तुम खाना खाओ, बाबा को बीस मिनट बाद दूध पिलाना है।’ नर्स चली गई। शुद्ध घी की महक से नर्स की ललचाती नजर बार-बार ट्रे की ओर उठ जाती थी और उसी महक से रोदना की जैसे भूख ही मर गई। उसने बेमन से खाना शुरू किया। भूख भी न लगी थी।
उसके जेहन में थाली भर का गीला-गीला भात, नमक और लहसुन- लाल मिर्च की चटनी घूम रहे थे। जैसे-तैसे उसने खाना खत्म किया। उसे लग रहा था जैसे उल्टी हो जाएगी। नर्स चिलमिची में कुनकुना पानी और स्पंज लेकर आ गई।
‘ब्लाउज हटा।’ब्लाउज हटाते ही नर्स ने स्पंज पानी में डुबाकर उसकी छातियां साफ कीं फिर उसे सफेद टॉवेल पकड़ाकर बोली, ‘पोंछो, मैं बाबा को लाती हूं।’कुछ ही देर बाद बाबा हुमक-हुमक कर रोदना का दूध पी रहा था। नर्स पास खड़ी रही। थककर तृप्त होकर राजा बाबा सो गया। रोदना की बच्ची रोकर बेहाल हो रही थी, पर बोतल की निप्पल को उसने मुंह नहीं लगाया। बच्ची को भूख से तड़पता देख रोदना की आंखें छलछला गर्इं। रोदना का मन उस भारी- भरकम खाने से नहीं भरा, पर छाती में भारीपन लग रहा था।
सादा भात खाने के लिए मन तरस रहा था। थोड़ी देर बाद बैरा मलाईयुक्त दूध का बड़ा गिलास दे गया। उसे बिना भूख के भी खाना पड़ रहा था और उसकी बच्ची भूख से बेहाल थी। वह सब की आंख बचाकर उसे चुपचाप दूध पिला देना चाहती थी।
अच्छे खान-पान, रहन-सहन से रोदना पर दिनों-दिन निखार आता गया। उसकी बच्ची दिनों-दिन कमजोर होती गई। छ: महीने में राजा बाबा खूब स्वस्थ हो गया। मैडम रोदना पर खुश थीं। दिल्ली से बंशी आया तो मां से चोरी बंगले पर रोदना से मिला। वह रोदना से घर चलने की जिद कर रहा था।‘छुट्टी ले के हम केवल तोरे खातिर दौड़े आए हैं। दू-चार रोज हमारे साथ घर चल। नाक की फुल्ली लाए हैं हम तोरे खातिर। छुट्टी ले ले इहां से।’
बंशी मिन्नतें करता रहा। रोदना छटपटाती आंसू बहाती रही। छुट्टी नहीं मिली। सीतो ने बंशी को रोदना के यहां रहने की शर्तों की मजबूरी बताई। बंशी नाराज होकर बिना उससे मिले दिल्ली लौट गया। छ: महीने बाद पति से केवल पांच मिनट बात हो पाई। कई जोड़ी आंखें उन पर पहरा लगाए रहीं।सीतो अब बच्ची को अपने साथ ले गई। बच्ची के लिए दूध, दलिया और फल रायसाहब हाउस से मिलते थे, उसी लालच में। दो हजार रुपए भी वह हर महीने उससे झटककर ले जाती। रोदना अच्छे खाने, साफ कपड़ों में खुद को दबा पाती। उसे लगता उसके हाथों से सब छूटा जा रहा है। उसका पति, उसकी बेटी •ाी। वह अपने घर के रूखे-सूखे खाने और बंशी के संग-साथ को याद कर दिन-रात आंसू बहाती।
अब राजा बाबा कुछ-कुछ अनाज भी खाने लगा था, फिर भी बड़ी मैडम ने उसे और छ: महीने के लिए रख लिया। रोदना बहुत छटपटाई पर सीतो के आगे उसकी एक नहीं चली। बंशी की भी कोई खबर उसे नहीं मिल पा रही थी। सीतो बच्ची को काम पर आते समय साथ ले आती। दो-तीन घंटे अपनी बच्ची से मिलकर उसका मन थोड़ा शांत हो जाता। एक अपराधबोध उसको अंदर ही अंदर कचोटता-अपनी बच्ची के हिस्से का दूध उसने बेच दिया।
आज रोदना बहुत खुश थी। डेढ़ साल बाद वह आज बंधन-मुक्त हो गई थी। दो दिन पहले बंशी के दिल्ली से आने की खबर सुन वह बहुत बेचैन थी। उसे पता है, नाराज है इसीलिए मिलने नहीं आया। घर पर मेरा इंतजार कर रहा होगा। मैडम ने बहुत सारा सामान दिया था। उपहारों से लदी घर पहुंचने की जल्दी में वह उड़ी जा रही थी। उसे पता था, इस समय उसकी सास सीतो काम पर गई होगी। बंशी घर पर होगा।
उसका दिल जोरों से धड़क रहा था। घर पहुंची तो दरवाजा बंद था। उसने दरवाजे को धीरे से धकेला तो वह खुल गया। सामने खाट पर बंशी पीठ करके लेटा था। दरवाजे की आवाज से लाल साड़ी पहने एक लड़की उसकी बगल से उठी। बंशी लापरवाही से सिर के नीचे दोनों हाथ रखे सीधा होकर लेट गया। रोदना की तरफ देखे बिना लड़की से बोला, ‘यह पहले वाली है।’ अब रोदना की तरफ भौहें चढ़ाकर बोला,‘दूसरों के घर का दरवाजा बंद देख बाहर से आवाज लगानी चाहिए। तुम्हें इतनी भी अकल नहीं।’
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