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सचिन तेंदुलकर और राव को भारत रत्न

क्रिकेट का पर्याय बन चुके सचिन रमेश तेंदुलकर और रसायनशास्त्री प्रोफेसर चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव यानी सीएनआर राव को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया।

सचिन तेंदुलकर और राव को भारत रत्न

क्रिकेट का पर्याय बन चुके सचिन रमेश तेंदुलकर और प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार और विश्व प्रसिद्ध रसायनशास्त्री प्रोफेसर चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव यानी सीएनआर राव को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा जाना देश में एक प्रेरक माहौल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यदि भारत का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल (क्रिकेट को छोड़ दें तो) और वैज्ञानिक शोध कायरें के क्षेत्र में प्रदर्शन को देखें तो निराशा ही मिलती है। वैसी स्थिति में इस वर्ष का भारत रत्न सम्मान खेल और विज्ञान जगत के दो दिग्गजों को मिलना एक संजीवनी से कम साबित नहीं होगा। क्योंकि आजादी के छह दशक के बाद देश में पहली बार किसी खेल हस्ती और सीवी रमन तथा पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के बाद तीसरी बार किसी वैज्ञानिक को इस सम्मान के लिए चुना गया है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि अपनी लगन, मेहनत और त्याग के बल पर सचिन ने क्रिकेट को और प्रो. सीएनआर राव ने विज्ञान को एक नई ऊंचाई दी है। भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। भारत सरकार भारतीय नागरिकों की ओर से ऐसे नागरिक को सम्मानित करती है जो कला, साहित्य, विज्ञान, खेल या सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किए हों। शनिवार को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में सचिन अपना 200वां टेस्ट मैच खेलकर क्रिकेट को अलविदा कह गए। यह सचिन के 24 वर्ष के शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर का जीता जागता प्रमाण हैकि उनके जाने के बाद दुनिया भर में खेल प्रशंसकों में मायूसी छा गई। सचिन के बिना क्रिकेट की कल्पना करने से उनकी आंखें भर आईं। देखा जाए तो इस खिलाड़ी का पूरा जीवन ही प्रेरणा से भरपूर रहा है। सचिन ने दिखाया हैकि र्मयादा, मूल्यों और परंपरा का निर्वाह करते हुए कैसे कीर्तिमान गढ़े जाते हैं। इतना लंबा सफर वह भी बिना किसी विवाद के और रिकॉर्ड के जो पहाड़ खड़े किए हैं, इसीलिए उन्हें क्रिकेट का भगवान कहा जाता है। एक खिलाड़ी से इससे ज्यादा क्या अपेक्षा की जा सकती है। वहीं रसायन विज्ञान के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों के लिए प्रो. राव का नाम दुनिया भर की विज्ञान अकादमियों में सम्मान के साथ लिया जाता है। तेंदुलकर ने एक बल्लेबाज के रूप में सौ अंतरराट्रीय शतक जड़े हैं तो राव भी पहले भारतीय हैं जो शोध कार्य के क्षेत्र में सौ के एच-इंडेक्स में पहुंचे हैं। एच-इंडेक्स किसी वैज्ञानिक के प्रकाशित शोध पत्रों की सर्वाधिक संख्या है जिनमें से कम से कम प्रत्येक का कई बार दूसरे वैज्ञानिकों द्वारा संदर्भ के रूप में उल्लेख किया गया हो। प्रोफेसर राव संयोग से दुनिया के कुछ एक चुनिंदा वैज्ञानिकों में ऐसे एकमात्र भारतीय हैं जिनके शोध पत्र का दृष्टांत के तौर पर वैज्ञानिकों ने लगभग 50 हजार बार के करीब उल्लेख किया है। राव के पांच दशकों के करियर में 1400 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। इस भारतीय वैज्ञानिक ने देश की वैज्ञानिक नीतियों को गढ़ने में अहम भूमिका निभाई है। वहीं पदार्थ के गुणों और उनकी आणविक संरचना के बीच बुनियादी समझ विकसित कर रसायन विज्ञान को एक दिशा भी दी है। इससे जाहिर होता है कि दोनों भारत के रत्न हैं। उम्मीद है युवा दोनों के जीवन से प्रेरणा लेंगे।

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