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डाॅ. एलएस यादव का लेख : भारत के रक्षा कवच में एस-400 अहम

भारत ने वर्ष 2018 में एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की पांच इकाइयों को खरीदने के लिए रूस से पांच अरब डाॅलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसी समझौते के तहत मौजूदा साल के अंत तक इस सिस्टम की पहली खेप भारत को मिलनी है। इसी समझौते के तहत एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को आॅपरेट करने का प्रशिक्षण भी भारतीय सशस़़़़्त्र सेनाओं के दल को रूस द्वारा दिया जा रहा है। अमेरिका द्वारा दी जा रही पाबंदियों की धमकियों के बावजूद रूस ने भारत को आश्वस्त कर दिया है कि उसे एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति तय समय पर कर दी जाएगी। मिसाइल सिस्टम से भारत की सुरक्षा पुख्ता होगी।

डाॅ. एलएस यादव का लेख : भारत के रक्षा कवच में एस-400 अहम
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डाॅ. एलएस यादव 

डाॅ. एलएस यादव

अमेरिका द्वारा दी जा रही पाबंदियों की धमकियों के बावजूद रूस ने भारत को आश्वस्त कर दिया है कि उसे एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति तय समय पर कर दी जाएगी। 14 अप्रैल को पत्रकारों से बातचीत करते हुए रूस के राजदूत निकोले कुदाशेव ने कहा कि एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को लेकर रूस की तरफ से किसी भी तरह की कोई देरी नहीं की जाएगी। इस सिस्टम को लेकर रूस और भारत के बीच जो समझौता हुआ है उसे लेकर दोनों पक्ष अपने पुराने रुख पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि इस सौदे को निश्चित समय सीमा के अंदर पूरा करने के लिए रूस प्रतिबद्ध है। विदित हो कि भारत ने वर्ष 2018 में एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की पांच इकाइयों को खरीदने के लिए रूस से पांच अरब डाॅलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसी समझौते के तहत मौजूदा साल के अंत तक इस सिस्टम की पहली खेप भारत को मिलनी है। इसी समझौते के तहत एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को आॅपरेट करने का प्रशिक्षण भी भारतीय सशस़़़़्त्र सेनाओं के दल को रूस द्वारा दिया जा रहा है।

रूस के राजदूत निकोले कुदाशेव का यह बयान ऐसे समय आया है जब तुर्की द्वारा की गई एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीद को लेकर अमेरिका उससे काफी नाराज है। तुर्की द्वारा रूस से एस-400 मिसाइल प्रणाली खरीदने पर अमेरिका ने अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी विशेष प्रतिबंध अधिनियम (सीएएटीएसए) के तहत उस पर प्रतिबंध लगा दिया था। अमेरिका के रुख में बनी हुई यह तल्खी भारत द्वारा रूस से की जा रही एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीद को लेकर बनी हुई है। अमेरिका के रक्षा मंत्री लाॅयड आस्टिन ने दो टूक लहजे में कहा था कि अमेरिका नहीं चाहता है कि कोई भी देश रूस से इस तरह की सौदेबाजी करे, इसीलिए रूसी राजदूत ने कहा कि भारत सहित हम द्विपक्षीय प्रतिबंधों को मान्यता नहीं देते हैं, क्योंकि ये गैर कानूनी और अनुचित प्रतिस्पर्धा का अवैध माध्यम है या यह कहें कि यह दबाव और यहां तक कि ब्लैकमेलिंग का माध्यम है और हमारा यह अनुबंध सफलतापूर्वक पूरा किया जा रहा है।

उपर्युक्त बातों से स्पष्ट अनुमान लग जाता है कि भारत अपनी हवाई सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने की तैयारी में लग गया है और इसके लिए रूस से अति आधुनिक एयर डिफेन्स सिस्टम एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदेगा। हवाई सुरक्षा के लिए एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की पांच यूनिट की खरीदारी का फैसला सबसे अहम माना जा रहा है। लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस इस सिस्टम प्रणाली के जरिए 400 किलोमीटर की दूरी तक उड़ते हुए विमान, मिसाइल, छुपे हुए विमानों व डोन आदि तक किसी भी लक्ष्य को निशाना बनाया जा सकता है। इस एयर डिफेन्स सिस्टम की मदद से बैलिस्टिक मिसाइलों और हाइपरसोनिक लक्ष्यों को भी भेदा जा सकता है। इसकी मिसाइल सिस्टम मदद से आसानी से राडार की पकड़ में न आने वाले लड़ाकू विमान भी मार गिराए जा सकते हैं।

एस-400 सुपरसोनिक एयर डिफेन्स सिस्टम में सुपरसोनिक एवं हाइपरसोनिक मिसाइलें होती हैं जो लक्ष्य को निशाना बनाने में अचूक होती हैं। इस सिस्टम की गिनती दुनिया के आधुनिकतम एंटी एयरक्राफ्ट हथियारों में होती है। इस प्रणाली के विकास की शुरुआत 1990 के दशक में हो गई थी और सन्ा 1999 में इसे रूस की वायु सेना में शामिल किया गया था। एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम नई पीढ़ी का एंटी मिसाइल और एंटी एयर क्राफ्ट हथियार है जिसे रूस के अलमाज सेन्टल डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। यह एस-300 श्रेणी का नवीनतम तथा अत्याधुनिक संस्करण है और फिलहाल इसका प्रयोग रूस की सेना कर रही है। यह प्रणाली तीन तरह का सुरक्षा घेरा मुहैया कराती है। इसके लिए तीन अलग-अलग तरह की मिसाइलों को प्रयोग में लाया जाता है। इनमें 400 किलोमीटर की अधिकतम दूरी तक मार करने के लिए 40-एम-6, लंबी दूरी तक मार करने के लिए 48-एन-6 और मध्यम दूरी तक मार करने के लिए 9-एम-96 मिसाइलों का इस्तेमाल किया जाता है। अपनी तरफ आने वाली शत्रु की मिसाइल को मार गिराने में सक्षम सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल की गति 4800 मील यानी कि 17000 किलोमीटर है।

एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को देश के परमाणु प्रतिष्ठानों, अधिक आबादी वाले क्षेत्रों, सरकारी इमारतों एवं सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ठिकानों आदि की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। यह सिस्टम दूूर से चलाई गई मिसाइलों को उपग्रहों की मदद से भांप लेता है और खतरा महसूस होते ही उस पर मिसाइलें दाग देता है। यह प्रणाली एक साथ 36 लक्ष्यांे को निशाना बना सकती है। इसकी खास विशेषता यह भी है कि यह पांच मीटर से तीस मीटर की ऊंचाई पर देश की तरफ आने वाली 72 मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है। एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम जमीन से हवा में भी मार कर सकता है। रूस का यह एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम अमेरिका के मिसाइल सिस्टम पैट्रियाट-3 को भी टक्कर देने वाला है। राडार की पकड़ में न आने वाला यह डिफेंस सिस्टम अमेरिका के सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक जेट फाइटर व स्टील्थ फाइटर एफ-35 को भी नष्ट करने में सक्षम है।

उपर्युक्त विशेषताओं के कारण ही पाकिस्तान व चीन जैसे देशों से निपटने के लिए भारत यह प्रणाली अपने सबसे पुराने एवं विश्वसनीय दोस्त रूस से खरीदने जा रहा है। इस सौदे से पुरानी दोस्ती का नवीनीकरण होगा। दरअसल भारत इस तथ्य से भली भांति परिचित है कि आजादी से अब तक कई अवसरों पर रूस ने अपनी सामरिक मैत्री की विश्वसनीयता सिद्ध की है। यह प्रणाली पाकिस्तान व चीन से होने वाले किसी भी हमले की स्थिति में बेहद कारगर सिद्ध होगी। इसके प्राप्त होने के बाद भारत किसी भी हमले की स्थिति में मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम होगा। यह इस समय संसार की सबसे उन्नत किस्म की एंटी बैलिस्टिक मिसाइल सुरक्षा प्रणाली है। यह सिस्टम 600 किलोमीटर दूर स्थित किसी भी तरह की मिसाइल अथवा लड़ाकू विमान का पता लगाने में सक्षम है। एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लांचर से दुश्मन के विमान पर मात्र तीन सेकेन्ड में दो मिसाइलें छोड़ी जा सकती हैं। इससे छोड़़़़ी गई मिसाइलें पांच किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से आक्रमण करती हैं और 35 किलोमीटर की ऊंचाई तक मार करने में सक्षम होती हैं। इसके अलावा भारत इस तरह की 6000 मिसाइलें भी रूस से खरीदेगा।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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