Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

अब तक का सबसे बड़ा रेल बजट, 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये होंगे खर्च

यह बजट आज तक का सबसे बड़ा यानी एक लाख ग्यारह हजार करोड़ रुपये का है, वह भी बिना यात्री भाड़ा बढ़ाए।

अब तक का सबसे बड़ा रेल बजट, 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये होंगे खर्च
X

रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने वर्ष 2015-16 के रेल बजट में भारतीय रेल का कायाकल्प करने का स्पष्ट विजन प्रस्तुत किया है। यह बजट आज तक का सबसे बड़ा यानी एक लाख ग्यारह हजार करोड़ रुपये का है, वह भी बिना यात्री भाड़ा बढ़ाए। इस बार के रेल बजट में लोकप्रिय घोषणाओं को परे रखकर जर्जर और बदहाल हो गए रेलवे को कैसे पटरी पर लाया जाएगा इसका जिक्र किया गया है।

'UNSC' में मजबूत हुई भारत की दावेदारी, ओबामा ने किया समर्थन

रेलमंत्री ने नई योजनाओं और ट्रेनों की घोषणा करने की बजाय रेलवे को जनसुलभ और सुरक्षित बनाने, माली व ढांचागत हालत सुधारने के लिए व्यावहारिक और तर्कसंगत प्रावधान किए हैं। वहीं यह पहली बार हुआ है कि रेल बजट में नई ट्रेनों का ऐलान नहीं किया गया है। दरअसल, नई ट्रेन और योजना का ऐलान करने की बजाय रेलमंत्री का सारा जोर इस बात पर दिखता है कि मौजूदा जो ट्रेनें हैं, उनमें सुविधाओं का विस्तार किया जाए और उन्हें पहले सुरक्षित किया जाए।

देश की सबसे पुरानी पार्टी पर संकट, सबसे बुरे वक्त का सामना कर रही है पार्टी

यात्रियों को जिन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है उन्हें पहले दूर किया जाए। लिहाजा इस बार के बजट में सबसे ज्यादा जोर सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता पर दिया गया है। अभी यात्रियों की सबसे ज्यादा शिकायत इन्हीं मुद्दों पर रहती है। वैसे भी आज भारतीय रेलवे की न तो माली हालत ऐसी है कि नई योजनाओं को शुरू किया जाए और न ही उस तरह का ढांचा है जिस पर आगे रेलवे का विस्तार किया जाए। अभी रेलवे घाटा की भरपाई के लिए वित्तमंत्री पर निर्भर है।

पूर्व में की गई 357 परियोजनाएं लंबित हैं, पैसे के अभाव में वे जमीन पर नहीं उतर रही हैं। इसीलिए रेलमंत्री ने पूरे रेल के सिस्टम को अपग्रेड करने पर जोर दिया है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने चार लक्ष्य रखे हैं-यात्री सुविधा, सुरक्षा, बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण और वित्तीय आत्मनिर्भरता। रेलवे देश की जीवन रेखा है। यह देश में हर वर्ग की यात्रा के लिए सबसे सस्ता, सुलभ माध्यम है। प्रतिदिन करीब ढाई करोड़ लोग यात्रा करते हैं। इसे तीन करोड़ करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं बजट में कहा गया है कि रेल यात्रा समय में 20 प्रतिशत कमी की जाएगी।

सुरक्षा और शिकायत के लिए चौबीस घंटे का हेल्पलाइन जारी किया गया है। मानवरहित फाटक पर अलार्म लगाया जाएगा। आग से बचाने के लिए बर्निंग सिस्टम लगेगा। वहीं रेलवे में ढांचागत विकास के लिए अगले पांच साल में 8.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पटरियों की लंबाई को मौजूदा 65 हजार किलोमीटर से बढ़ाकर 1.38 लाख किलोमीटर किया जाएगा। साथ ही रेलवे के परिचालन लागत को 91.1 प्रतिशत से कमकर 88.5 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।

अभी रेलवे को एक रुपये कमाने के लिए 91.1 पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। यह बताता है कि रेलवे की माली हालत कितनी खराब है। पूर्व में रेलवे को विभिन्न सरकारों ने अपने फायदे के लिए प्रयोग किया। इसके विस्तार पर ध्यान नहीं दिया गया, इसी वजह से इसकी यह हाल है। हालांकि रेलवे का एक दो माह में सुधार नहीं हो सकता इसके लिए रेलमंत्री ने पांच साल का लक्ष्य रखा है। उन्होंने ठीक कहा है कि पूर्व में रेलवे में निवेश पर ध्यान नहीं दिया गया। जिससे ट्रेन में भीड़ बढ़ती गई, उस अनुपात में क्षमता का विस्तार नहीं हुआ। रेलवे की कार्यकुशलता घटी और गति कम हुई। आज रेलवे इस दुश्चक्र में फंस गया है। जिसे तोड़ना काफी जरूरी है।

अब रेलमंत्री की सबसे बड़ी चुनौती इस चक्र को तोड़ने की होगी। ऐसा होगा तभी रेलवे देश के विकास का वाहक बन पाएगा। रेलवे में पूंजी निवेश को बढ़ाकर इसे तोड़ा जा सकता है। अब रेलमंत्री इसे कैसे करेंगे यह देखना दिलचस्प होगा।

खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top