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संपादकीय लेख .. देश में सोशल मीडिया का नियमन तत्काल जरूरी

सोशल मीडिया दूषित राजनीति, इमेज बिल्डिंग, छवि भंजन, मैनिपुलेटेड ट्रूथ, भ्रामक जानकारी, झूठ, दुष्प्रचार आदि के हथियार बन गए हैं। फेक न्यूज की बाढ़ से सोशल मीडिया की साख भी मिट्टी पलीद हुई है। कोरोना के दौर में सोशल मीडिया पर मोदी सरकार के प्रति जनाक्रोश में तेजी आई है। यही सरकार की बड़ी चिंता है।भाजपा की बेचैनी के भी यही कारण हैं।

संपादकीय लेख .. देश में सोशल मीडिया का नियमन तत्काल जरूरी
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : ताजा टूलकिट विवाद राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है, जबकि सोशल मीडिया के नियमन को लेकर गंभीर नीति की जरूरत है। दरअसल, कोविड टूलकिट मामले की शुरूआत ही राजनीतिक प्रहार के लिए हुई थी। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने 18 मई को अपने एक ट्वीट में टूलकिट का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार व पीएम नरेंद्र मोदी को बदनाम करने के लिए कांग्रेस टूलकिट का इस्तेमाल कर रही है। टि्वटर ने पात्रा के इसी ट्वीट को मैनिपुलेटेड मीडिया बताया और कहा कि यह तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। मामले की जांच के लिए दिल्ली पुलिस की दो विशेष टीमें टि्वटर के दफ्तर पहुंचीं। पात्रा के ट्वीट व दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद से कांग्रेस केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर है।

टूलकिट मामले में दिल्ली पुलिस ने अब कांग्रेस के दो नेताओं को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेजा है, इस पर कांग्रेस ने टि्वटर को पत्र लिखकर 11 भाजपा नेताओं के पोस्ट पर मैनिपुलेटेड मीडिया की टैगिंग करने व एक्शन लेने की मांग की, इसलिए इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार जरूरी है। सोशल मीडिया जितना सुलभ है, उसकी पहुंच जितना आसान है, उसका प्रभाव जितना व्यापक है, ऐसे में उसमें कंटेट की शुचिता बहुत जरूरी है। गलत, भ्रामक सूचनाओं के प्रसार से किसी का भी नुकसान हो सकता है, जैसा कि अभी कोविड काल में सरकार के साथ हो रहा है। सोशल मीडिया दूषित राजनीति, इमेज बिल्डिंग, छवि भंजन, मैनिपुलेटेड ट्रूथ, भ्रामक जानकारी, झूठ, दुष्प्रचार आदि के हथियार बन गए हैं। फेक न्यूज की बाढ़ से सोशल मीडिया की साख भी मिट्टी पलीद हुई है। कोरोना के दौर में सोशल मीडिया पर मोदी सरकार के प्रति जनाक्रोश में तेजी आई है। यही सरकार की बड़ी चिंता है।भाजपा की बेचैनी के भी यही कारण हैं।

भाजपा सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ चल रहे अभियान के पीछे कांग्रेस का हाथ मान रही है, भाजपा का यह आरोप कांग्रेस को मंजूर नहीं है। ऐसे में प्रामाणिकता के साथ जहां जांच जरूरी है, वहीं टि्वटर प्रबंधन की भी जिम्मेदारी है कि वह दूध का दूध व पानी का पानी करे। जब टि्वटर ने मैनिपुलेटेड मीडिया कहा तो उसे इसका तथ्यात्मक प्रमाण भी देना चाहिए। टि्वटर प्रबंधन के अमेरिकी हेडक्वार्टर में हलचल का संकेत है कि वह दिल्ली पुलिस के नोटिस के बाद सशंकित है। इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म्स के नियमन के लिए कानून बनाने के निर्देश देने और नफरत फैलाने वाले फेक व भ्रामक न्यूज को रोकने के लिए सोशल साइट्स फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और ट्विटर को जिम्मेदार ठहराने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फरवरी में ही नोटिस जारी किया था और जवाब मांगा था। याचिका में शीर्ष कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि वह केंद्र सरकार को ऐसी व्यवस्था बनाने का निर्देश दे, जिसमें नफरत फैलाने वाले भाषण और फेक न्यूज सोशल मीडिया साइट से हट जाएं, ताकि नफरत फैलाने वाले भाषणों या फेक न्यूज के प्रतिकूल प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके।

केंद्र सरकार सोशल मीडिया पर नियमन के लिए अलग से कानून लाने पर विचार भी कर रही है। पहले भी हमने देखा है कि भारत में सोशल मीडिया का सांप्रदायिक हिंसा भड़काने, मादक पदार्थों की तस्करी, मनी लॉड्रिंग, मैच फिक्सिंग, आतंकवाद, नफरत फैलाने, अफवाह फैलाने व फेक न्यूज के लिए उपकरण के रूप में दुरुपयोग किया गया है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। अभी प्राइवेसी नीति पर जिस तरह व्हाट्सएप ने सरकार के दबाव के बावजूद उसे वापस लेने से इनकार किया है और कोविड टूलकिट विवाद गहराया है, उसमें सोशल मीडिया के नियमन पर नीतिगत फैसले की तत्काल दरकार महसूस की जा रही है। सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का रेगुलेटेड और अनुशासित होना जरूरी है। बेलगाम होना राष्ट्र व समाज के हित में नहीं है।

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