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देश को महिला रक्षा मंत्री देने के पीछे ये थी असली वजह

निर्मला सीतारमण देश की पहली महिला रक्षा मंत्री हैं।

देश को महिला रक्षा मंत्री देने के पीछे ये थी असली वजह
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तरकश में कौन-कौन से तीर हैं और वह उनका कब इस्तेमाल करेंगे, किसी को पता नहीं होता, परंतु अपने फैसलों से वह सबको चौंकाते रहे हैं। न केवल विपक्षी दलों और आलोचकों को बल्कि मीडिया के उन कयासबाजों को भी, जो बरसों से लुटियन जोन की पत्रकारिता करते आए हैं और विशेषज्ञ के तौर पर राजनीतिक अंदाजे लगाते रहे हैं।

2019 के आम चुनाव और इस साल व अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अगर इस फेरबदल और विस्तार को देखें तो पाएंगे कि बहुत सोच-विचारकर प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने नए नौ राज्य मंत्रियों का चयन किया है।

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काबिलियत और प्रदर्शन को देखकर बेहतर काम करने वाले मंत्रियों को पदोन्नत करते हुए इनाम दिया है और जो मंत्री बेहतर नतीजे नहीं दे पाए, उन्हें या तो नमस्कार कर लिया गया है या उनके विभागों में तर्क संगत परिवर्तन कर दिए गए हैं।

सबकी निगाहें इस पर लगी थी कि देश का अगला रक्षा मंत्री और रेल मंत्री कौन होगा। लगातार हो रही रेल दुर्घटनाओं को रोक पाने में नाकाम सुरेश प्रभु ने खतौली दुर्घटना के बाद इस्तीफे की पेशकश की थी। उनके स्थान पर पीयूष वेद प्रकाश गोयल को नया रेल मंत्री बनाया गया है, जिन्होंने तीन साल में ऊर्जा विभाग की सूरत और सीरत बदलकर रख दी है।

वाणिज्य राज्य मंत्री निर्मला सीतारमण को पदोन्नति देते हुए प्रधानमंत्री ने न केवल उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया बल्कि रक्षा जैसा बेहद अहम मंत्रालय भी उन्हें सौंप दिया है। मनोहर पर्रिकर जब रक्षा मंत्रालय छोड़कर गोवा के मुख्यमंत्री बने, तब मोदी ने व्यवस्था होने तक वित्त मंत्री अरुण जेटली को रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त दायित्व सौंप दिया था। विस्तार से पहले कई नामों की अटकलें लगाई जा रही थीं, परंतु किसी को इसका आभास नहीं था कि खुद प्रधानमंत्री के मन में क्या चल रहा है।

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निर्मला सीतारमण देश की पहली महिला रक्षा मंत्री उस रूप में होंगी, क्योंकि प्रधानमंत्री रहते हुए ही इंदिरा गांधी ने यह विभाग देखा था। यह निश्चित ही सुखद संकेत हैं कि प्रधानमंत्री महिला सशक्तिकरण की बात केवल जुबानी जमा खर्च के लिए नहीं करते हैं, वस्तुत: उसे मूर्त रूप भी देते हैं। अब शीर्ष चार अहम मंत्रालयों गृह, वित्त, विदेश और रक्षा में से दो विदेश और रक्षा विभाग महिला नेत्रियों के पास हैं।

सुषमा स्वराज और निर्मला सीतारमण के अलावा मोदी ने उमा भारती को भी कैबिनेट मंत्री बनाए रखा है। हालांकि उनसे गंगा सफाई का काम-काज ले लिया गया है क्योंकि वह अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाई हैं। अब इसकी अतिरिक्त जिम्मेदारी नितिन गडकरी को सौंप दी गई है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक जैसे उन राज्यों को इस विस्तार में प्रतिनिधित्व दिया गया है, जहां इस साल और अगले साल चुनाव होने हैं।

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केवल हिमाचल प्रदेश अपवाद कह सकते हैं, जहां से कयास लग रहे थे कि प्रेम कुमार धूमल अथवा उनके सुपुत्र अनुराग ठाकुर में से किसी को शपथ दिलाई जा सकती है। बहरहाल, विस्तार और फेरबदल हो गया है और जैसा हमेशा होता है, प्रधानमंत्री ने अपने फैसलों से सबको चौंकाया है। संदेश भी दिया है कि नतीजे देने वालों को पदोन्नति, शाबाशी और इनाम देने में वो कोताही नहीं बरतेंगे, परंतु यदि किसी का काम-काज जन अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं होगा तो वह बहुत लंबे समय तक किसी को ढोएंगे भी नहीं।

सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने छह मंत्रियों कलराज मिश्रा, बंडारु दत्तात्रेय, फगन सिंह कुलस्ते, राजीव प्रताप रूडी, संजीव बलियान और महेंद्र नाथ पांडेय को विदा कर ही दिया। अब भी कई ऐसे मंत्री उनकी सरकार का हिस्सा हैं, जिनका प्रदर्शन प्रधानमंत्री की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है, परंतु कई बार राजनीतिक विवशताएं और राज्यों में कई तरह के संतुलन साधने की बाध्यता सख्त फैसलों को रोक देती है। ऐसे मंत्रियों को मोदी का संदेश तो साफ है कि नतीजे दें, क्योंकि 2019 का आम चुनाव अब बहुत दूर नहीं रह गया है।

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