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भारत को उकसाने की हरकत न करे पाक

पाकिस्तान ने हाल में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान एक बार फिर से कश्मीर मुद्दे को उठाया था। जबकि भारत हमेशा से कहता रहा है कश्मीर उसका अभिन्न अंग है।

भारत को उकसाने की हरकत न करे पाक
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एशिया-यूरोप के विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए भारत आए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश नीति सलाहकार सरताज अजीज ने मेहमान की र्मयादा को ताख पर रख रविवार को पाकिस्तान उच्चायोग में जिस तरह कश्मीर के अलगाववादी समूहों के विभिन्न नेताओं से मुलाकात की वह एक उकसाने वाला कदम है। मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाले हुर्रियत कांफ्रेंस के उदारवादी धड़े के साथ वार्ता करने के अलावा जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के अध्यक्ष यासीन मलिक, कट्टरपंथी हुर्रियत अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी व दुख्तरान ए मिल्लत की संस्थापक आसिया अंद्राबी से मुलाकात कर सरताज अजीज ने कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने का एक तरह से दुस्साहस भी किया है। पाकिस्तान ने हाल में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान एक बार फिर से कश्मीर मुद्दे को उठाया था। जबकि भारत हमेशा से कहता रहा है कश्मीर उसका अभिन्न अंग है। कश्मीर मुद्दा भारत का आंतरिक मामला है। उस पर कोई समझौता नहीं हो सकता ऐसे में पाकिस्तान को भारत के अंदर इस तरह की नापाक हरकत दोनों देशों के बीच कटुता बढ़ाने का ही काम करेगा। एक तरफ वे इस यात्रा के जरिए भारत से संबंध सुधारने की बात कर रहे हैं पर काम उकसाने वाला कर रहे हैं।

पाक की इन्हीं हरकतों के कारण ही दोनों पड़ोसी देशों के बीच शांति वार्तापटरी पर नहीं आ रही है। पाकिस्तान भारत से रिश्ते सुधारने का दिखावा करता है, परंतुउसकी कोशिश कुछ और ही कह रही है। अमेरिका और ब्रिटेन के दबावों के बावजूद वह 26/11 के मुंबई हमलों के दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। भारत द्वारा सभी सबूत सौंपने के बाद भी इस मामले की सुनवाई कछुआ चाल से चल रही है। जिससे उसकी मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। भारत ने स्पष्ट कर दिया हैकि जब तक मुंबई हमलों के दोषियों को सजा नहीं मिल जाती बातचीत संभव नहीं है। परंतु पाकिस्तान इन बातों पर अमल करने की बजाय भारत को उकसा रहा है। पाकिस्तान की धरती से चलाए जा रहे आतंकी प्रशिक्षण कैंपों से भारत बुरी तरह प्रभावित है। जनवरी 2004 में जनरल परवेज मुशर्रफ ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ किए अहम समझौते में कहा था कि पाकिस्तान की जमीन का भारत के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। इस बात के नौ साल बीत गए पर सीमा पार से आतंक में कमी नहीं आ रही है। पाक आतंकियों के कैंपों को ध्वस्त करने की कोशिश भी नहीं कर रहा है। साक्ष्य तो यहां तक मिले हैं कि वह भारत विरोधी तत्वों को आतंकी प्रशिक्षण दे कर उन्हें बढ़ावा दे रहा है। पाकिस्तान को यह तय करना होगा कि वह अंतत: चाहता क्या है? उसकी नीयत भारत से संबंध बनाए रखने की है तो उकसावे की ये हरकतें बंद करनी होंगी। नवाज शरीफ के दूत की हैसियत से अजीज भारत के नामित प्रतिनिधियों से वार्ता करने आए हैं पर उनसे बातचीत करने से पहले कश्मीर के अलगाववादियों से वार्ता करने से उनकीनीयत व दुस्साहस का पता चलता है। भारत को उनकी हरकत पर खामोश नहीं रहना चाहिए। सीधे-सीधे इस्लामाबाद को कूटनीतिक भाषा में इसका जवाब दिया जाना चाहिए।

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