Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

आतंकवाद पर पाक की घेरेबंदी में ब्रिक्स सफल

विश्व समुदाय से भारत को तगड़ा सर्मथन मिला।

आतंकवाद पर पाक की घेरेबंदी में ब्रिक्स सफल
आठवें ब्रिक्स सम्मेलन के 'गोवा घोषणापत्र' से लगता है कि भारत का मकसद पूरा हुआ है। उरी आतंकी अटैक के बाद भारत ने आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की जो ग्लोबल मुहिम छेड़ी है, उसमें भारत ब्रिक्स सम्मेलन में भी सफल रहा। ब्रिक्स ने अपने 'गोवा घोषणा पत्र' में आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक लड़ाई को प्रमुख एजेंडे में शामिल किया। इसे आर्थिक विकास व शांति के लिए बाधा बताया। ब्रिक्स मंच से भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि दुनिया में एक देश आतंकवाद की जन्मस्थली (मदरशिप) है, जिसके निर्यातित आतंकवाद से मध्य पूर्व, पश्चिम एशिया, यूरोप और दक्षिण एशिया को बड़ा खतरा है। पीएम नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को पूरी दुनिया के लिए खतरनाक बताते हुए इसके खिलाफ कठोरता से निपटने का आह्वान किया।
भारत के अलावा ब्रिक्स के अन्य सभी सदस्य देशों- ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने भी एक स्वर में आतंकवाद को साझा खतरा बताया और इसके खात्मे की वकालत की। इससे आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक जंग की भारतीय मुहिम को मजबूती मिली। ब्रिक्स सम्मेलन की समाप्ति के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया से बातचीत में एक अहम बात कही कि 'आतंक का सर्मथन करने वाले भी आतंकवाद की तरह खतरनाक है।' यह बिना नाम लिए पाक पर सीधा हमला है और चीन को आईना दिखाना है। हालांकि इस सम्मेलन में चीन ने यह तो माना कि आतंकवाद खतरा है, लेकिन पाक प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ खुलकर कुछ भी नहीं कहा। फिर भी चीन पर भारतीय दबाव साफ दिखा। आतंकवाद पर बाकी सभी देश भारत के साथ खड़े दिखे। ब्रिक्स सम्मेलन के लिए आमंत्रित बिम्सटेक देशों व अफगानिस्तान व मालदीव ने भी आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई की जरूरत पर बल दिया।
बिम्सटेक में भारत के साथ-साथ बांग्लादेश, म्यांमार, भूटान, नेपाल, र्शीलंका और थाईलैंड शामिल है। इस तरह ब्रिक्स, बिम्सटेक जैसे दो अहम ग्लोबल मंचों से भारत ने आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ वैश्विक सहमति बनाने की कोशिश की। निश्चित ही ब्रिक्स और बिम्सटेक के लिए गरीबी उन्मूलन, विकास और शांति बड़े लक्ष्य हैं, लेकिन आतंकवाद इन लक्ष्यों की राह का बड़ा रोड़ा है। आतंक के साये में कोई भी देश तेजी से विकास नहीं कर सकता है। भारत यही बार-बार दोहरा रहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद को पाल भी रहा है और उसका निर्यात भी कर रहा है, जिसका भारत समेत कई देश शिकार हो रहे हैं। इसलिए पाकिस्तान को अलग-थलग करना जरूरी है। चीन को यह बात जितनी जल्दी समझ में आ जाए, एशिया के लिए भी और खुद उसके लिए उतना ही अच्छा है। चीन के शिनझियांग प्रांत में और उइगर समुदाय में चीनी सरकार के खिलाफ आक्रोश सुलग रहा है, जिसे पाक निर्यातित आतंकवाद कभी भी हवा दे सकता है। खैर यह तो चीन को देखना है, लेकिन भारत ने पठानकोट व उरी आतंकी हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र में सबूतों के साथ पाक को अलग-थलग करने का विश्व समुदाय से आह्वान किया। उसके बाद जब पीओके में भारतीय सेना ने सजिर्कल स्ट्राइक को अंजाम दिया, तो विश्व समुदाय से भारत को तगड़ा सर्मथन मिला।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-
Next Story
Top