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भारत में आतंकवाद को शह देना बंद करे पाक

आतंकवाद पर एक बार फिर पाकिस्तान का दोहरा रवैया उजागर हुआ है।

भारत में आतंकवाद को शह देना बंद करे पाक

आतंकवाद पर एक बार फिर पाकिस्तान का दोहरा रवैया उजागर हुआ है। आतंकी गुटों को पनाह देने के लिए दुनियाभर में कुख्यात हो चुका पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ भारत के अभियान पर ताजा असंतोष जाहिर कर और भी बेनकाब हो गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर में आतंकवादी हिज़्बुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने को एक्स्ट्रा जूडिशियल किलिंग कह कर साबित कर दिया है कि भारत दोस्ती की कितनी भी कोशिश कर ले, पाक .. पूंछ की तरह कभी सीधा नहीं हो सकता। वह भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देने की नीति पर चलता ही रहेगा।

इसके अलावा पाकिस्तान का हिज़्बुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन को पीओके के मुजफ्फराबाद में हिज़्बुल बेस कैंप में आतंकी बुरहान की शोक सभा आयोजित करने व उसमें मुंबई पर 26/11 हमले का मास्टरमाइंड आतंकी हाफिज सईद को भाग लेने की छूट देना पुष्टि करता है कि नवाज सरकार ने भी भारत के खिलाफ आतंकवाद को प्रोत्साहित करने की अपनी पुरानी नीति में कोई बदलाव नहीं किया है। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने जिस तरह मियां नवाज की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया और नवाज ने भी गर्मजोशी से उसका इस्तकबाल किया, उससे एकबारगी भ्रम जरूर हुआ कि पाकिस्तान भी शांति स्थापित करने की दिशा में भारत के साथ आगे बढ़ना चाहता है।
इधर एक-दो वर्षों में पाकिस्तान पर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर जिस प्रकार से ग्लोबल दबाव बढ़ा है, उसके बाद नवाज शरीफ कई बार खुद बयान दे चुके हैं कि पाक भी आतंकवाद से पीड़ित है, शरीफ सरकार के नुमाइंदे भी बार-बार कह चुके हैं कि पाक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है। अमेरिकी दबाव में भी पाक आतंक के खिलाफ कार्रवाई का संकल्प दोहरा चुका है। पेशावर में दो बार बड़े आतंकी हमले झेलने, लाहौर-कराची में आतंकी विस्फोट का सामना करने व अफगानिस्तान से सटे सीमाई क्षेत्र में तालिबान आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाने से भी लगा कि पाकिस्तान वाकई आतंकवाद के खिलाफ संजीदा है। लेकिन बुरहान के मामले को लेकर भारत के आंतरिक मामले में बेजा दखल देने से स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान अच्छा आतंकवाद और बुरा आतंकवाद में फर्क कर ही रहा है।
भारत ने कई अंर्तराष्ट्रीय मंचों से चेताया है कि पाकिस्तान आतंकवाद को अच्छे-बुरे के चश्मे से देखना बंद करे। लेकिन पाकिस्तान है कि भारत के खिलाफ आतंकवाद को वह अच्छा मानने से बाज नहीं आ रहा है। कश्मीर में आतंकवाद को हवा देने की अपनी फितरत पर पाक कायम रहना चाहता है। वह भारत के खिलाफ आतंक का जहर उगलना बंद नहीं करेगा। तभी तो हाफिज सईद के आतंकी बुरहान को शहीद बताने और हिज़्बुल मुखिया सलाहुद्दीन के पाक को कश्मीर में भारत विरोध भावना भड़का कर मौके का फायदा उठाने को कहने पर पाक सरकार को आपत्ति नहीं होती है। उल्टे शरीफ कहते हैं कि कश्मीर में बेगुनाहों को गोली मारी जा रही है। लेकिन बुरहान जैसे आतंकियों ने कितने बेगुनाहों को मारे हैं, वह शरीफ को नहीं दिखाई दे रहा है।
नवाज ने यह भी कहा कि वह अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार से जोड़कर बुरहान मुद्दे को उठाएंगे। लेकिन किस मुंह से, आतंकवाद के सर्मथक के रूप में या विरोधी के रूप में। जबकि सलाउद्दीन और सईद के एक साथ आने पर ग्लोबल स्तर पर फिर साबित हो गया कि पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए हो रहा है। भारत ने पाक को मुंहतोड़ जवाब भी दिया है कि वह भारत के अंदरुनी मामले में दखल नहीं दे। पाकिस्तान को भारत के खिलाफ आतंकवाद को शह देना बंद करना चाहिए।
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