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लोकतांत्रिक देश में कानून व्यवस्था से ऊपर नहीं है कोई

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में कानून व्यवस्था से ऊपर कोई नहीं है।

लोकतांत्रिक देश में कानून व्यवस्था से ऊपर नहीं है कोई
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बहुचर्चित हिट एंड रन मामले में सलमान खान को निचली अदालत ने पांच साल कैद की सजा सुनाई है। इससे एक बात स्पष्ट होती है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में कानून व्यवस्था से ऊपर कोई नहीं है। आरोपी कितना भी धनी, चर्चित, ताकतवर या पहुंच वाला क्यों न हो यदि वह दोषी साबित होता है तो उसे कानूनी धाराओं के तहत सजा मिलनी तय है। उसकी सामाजिक, राजनीति या आर्थिक हैसियत कानून को प्रभावित नहीं कर सकती। इस तरह रसूखदार लोगों को कानून तोड़ने की सजा मिलती हैतो समाज में सकारात्मक संदेश भी जाता है कि देश में कानून का शासन है।
इससे पहले भी देश ने देखा है कि किस तरह पूर्वप्रधानमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक, उद्योगपति और अभिनेता तक को अदालत ने उनके किए की सजा सुनाई है। हालांकि हमारी न्यायव्यवस्था की एक कमजोरी है कि यहां समय से न्याय नहीं मिलता है। दरअसल, जरूरी संसाधनों का अभाव होने से कोर्ट में मुकदमों के अंबार लगे हुए हैं। जिससे फैसला आने में बीस से तीस साल तक की देरी होती है। इस समस्या को दूर किया जाना चाहिए। जैसे सलमान खान के मामले में भी निचली अदालत में ही फैसला आने में करीब 13 साल लग गए। यह मामला 28 दिसंबर, 2002 का है, जब रात को सलमान खान की कार मुंबई के हिल रोड पर अमेरिकन एक्सप्रेस बेकरी में घुस गई थी। बेकरी के बाहर फुटपाथ पर सो रहे एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और चार अन्य लोग घायल हो गए थे। दुर्घटना के बाद सलमान खान घटनास्थल से भाग गए थे।
उन्होंने सुबह पुलिस स्टेशन में सरेंडर किया था, जहां उनकी गिरफ्तारी हुई, लेकिन कुछ ही समय बाद जमानत भी मिल गई थी। धारा 304 (2) के तहत गैर इरादतन हत्या, धारा 279 के तहत लापरवाही से ड्राइविंग, धारा 337 तथा 338 के तहत चोट पहुंचाकर दूसरों की जान जोखिम में डालने और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 34 ए, बी के साथ धारा 181 के तहत नियमों का उल्लंघन कर वाहन चलाने व 185 के तहत नशे में तेज रफ्तार वाहन चलाने का उन पर केस दर्ज हुआ। अब सलमान खान इन सभी धाराओं में दोषी पाए गए हैं। यानी यह सच है कि दुर्घटना के समय वे ही गाड़ी चला रहे थे। उस दौरान वे नशे में थे। इसके अलावा उनके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था।
घटना के दौरान गाड़ी में मौजूद रहे सलमान खान के अंगरक्षक रवींद्र पाटिल की गवाही काफी अहम साबित हुई है। उसने जो प्राथमिकी लिखवाई थी उसमें कहा गया है कि दुर्घटना के समय गाड़ी सलमान ही चला रहे थे। उसने मजिस्ट्रेट के सामने दिए बयान में भी कहा था कि उन्होंने उस समय शराब पी थी। सलमान खान की ओर से भी बचाव में कई दलीलें दी गर्इं, लेकिन कोर्ट ने उनको मानने से इंकार कर दिया। जाहिर है, कोर्ट को उनमें सच्चाई नहीं दिखी। फिलहाल सलमान को बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी है, लेकिन इससे उनकी सजा कम नहीं हुई है। अब आगे हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई होगी। यदि उन्हें लगता है कि हाईकोर्ट में भी न्याय नहीं मिला तो वे उसके बाद सुप्रीम कोर्ट भी जा सकते हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस मामले की सुनवाई जल्द पूरी होगी और दोनों पक्षों को न्याय मिलेगा।

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