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सस्ते इंटरनेट से आएगा डाटा क्रांति का नया दौर

गांवों के अंतिम छोर तक इंटरनेट कनेक्टिविटी की है संकल्पना

सस्ते इंटरनेट से आएगा डाटा क्रांति का नया दौर
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भारत में एक बार फिर से टेलीकॉम इंडस्ट्री की तस्वीर बदलने वाली है। रिलायंस जियो की डिजिटल वर्ल्ड में धमाकेदार एंट्री से भारतीय इंटरनेट की दुनिया ही बदल गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 तक जिस डिजिटल इंडिया की बात करते हैं, उसमें गांवों के अंतिम छोर तक इंटरनेट कनेक्टिविटी की संकल्पना है। वैसे तो पीएम के इस सपने को साकार करने का दायित्व सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल पर है, लेकिन उद्योगपति मुकेश अंबानी प्रोमोटेड कंपनी रिलायंस जियो के दुनिया का सबसे सस्ता इंटरनेट प्लान लांच करने से पीएम के गरीब से गरीब आदमी तक इंटरनेट पहुंचाने के लक्ष्य पूरे होने के आसार बढ़ गए हैं। मुकेश अंबानी ने अपने इस प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही सर्मपित भी किया है। मुकेश ने कहा कि हम डिजिटल इंडिया का सपना पूरा करेंगे और 2019 तक देश के 90 फीसदी लोगों तक इंटरनेट पहुंचाएंगे।
दरअसल, डिजिटल इंडिया की राह में सबसे बड़ी बाधा भारत में इंटरनेट पैक (डाटा) का महंगा होना है। देश के अधिकांश कंज्यूमर निम्न मध्य और गरीब वर्ग के हैं। उनके लिए महंगा डाटा अफोर्ड करना संभव नहीं है। इसकी वजह भी सरकार की 3जी स्पेक्ट्रम नीलामी नीति की खामियां और डाटा रेट रेगुलेशन के लिए कंपनियों पर नकेल में उदासीनता हैं। जिससे इंटरनेट डाटा महंगा ही बना रहा। इसके चलते डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट के परवान चढ़ने की संभावना क्षीण है। लगता है रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मुखिया मुकेश अंबानी ने इसे समझा है और उन्होंने इन्हीं वर्ग को ध्यान में रखते हुए अपने टेलीकॉम कारोबार के मॉडल को शेप दिया है। उन्होंने जियो की लांचिंग पर युवाओं से कहा भी कि अब डाटागिरी कीजिए। वाकई जियो की डाटागिरी टेलीकॉम इंडस्ट्री की गेमचेंजर साबित होगी। इससे पहले जैसे टेलीकॉम सेक्टर को बाजार के लिए खोलने और टूजी स्पेक्ट्रम की सस्ती नीलामी के बाद देश का मोबाइल संसार ही बदल गया था।
दुनिया में सबसे सस्ती कॉलिंग रेट भारत में हो गई। हर हाथ में मोबाइल आ गया। अनिल अंबानी की कंपनी आरकॉम की ओर से पांच सौ रुपये में मोबाइल हैंडसेट उपलब्ध करवाने के बाद तो जैसे समूचे भारतीयों की दुनिया ही मुट्ठी में आ गई थी। वह दौर मोबइल क्रांति का माना गया । अब डाटा वर्ल्ड में गेम चेंज हुआ है। जियो के इंटरनेट प्लान डाटा क्रांति का दौर शुरू करेंगे। जियो के लांच होने से पहले ही सभी प्रतिद्वंद्वी टेलीकॉम कंपनियों ने अपने इंटरनेट डाटा रेट 67 फीसदी तक घटाए। लांच के 45 मिनट के भीतर एयरटेल, आइडिया, आरकॉम को ग्यारह हजार करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगी। तीनों ही कंपनियों के शेयरों में पांच से सात फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी टेलीकॉम कंपनियों को भी झटका लगा है।
अब आगे भी टेलीकॉम कंपनियों के बीच प्राइसवार छिड़ने की संभावना है। जियो की आंधी से खुद को बचाने के लिए अन्य कंपनियां आकर्षक व सस्ते डाटा प्लान लेकर आएंगी। लेकिन इस सब में अंतत: उपभोक्ताओं की चांदी होगी। उन्हें मोबाइल क्रांति के वक्त भी फायदा हुआ था और अब डाटा क्रांति से भी लाभ होगा। इससे देश में नॉलेज का तेजी से विस्तार होगा। शिक्षा व प्रशासन की तस्वीर बदलेगी। लेकिन प्रतिद्वंद्विता के चलते के एक सप्ताह में दूसरी टेलीकॉम कंपनियों पर जियो नंबर के पांच करोड़ कॉल फेल होने से नेटवर्क पर नियंत्रण की आशंका भी बढ़ी है। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिहाज नए प्लेयर की राह में रुकावट डालना उचित नहीं है। टेलीकॉम नियामक ट्राई को इस पर नजर रखनी चाहिए और दोषी कंपनियों को दंडित करने का प्रावधान करना चाहिए।
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