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डॉ. सुरेश यादव का लेख : ड्रैगन को घेरने नया सैन्य मंच

हिंद प्रशांत और द. चीन सागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन व ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष नेताओं ने 15 सितंबर को वर्चुअल मीटिंग में संयुक्त बयान जारी कर महत्वाकांक्षी तीन-तरफा रणनीतिक रक्षा गठबंधन ‘ऑकस पैक्ट’ की घोषणा की है

डॉ. सुरेश यादव का लेख : ड्रैगन को घेरने नया सैन्य मंच
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डॉ. सुरेश यादव

हिंद प्रशांत और दक्षिणी चीन सागर में 'चीन' की अति सक्रियता और अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के गठन की घोषणा के तत्काल बाद उसे 31 मिलियन यूएस डॉलर (200 मिलियन युआन) की सहायता की घोषणा ने न केवल पश्चिमी देशों की चिन्ता को बढ़ाया, अपितु अफगान मामले में कड़ी आलोचना झेल रहे यूएस राष्ट्रपतति जो बाइडेन की बेचैनी को भी बढ़ा दिया।

अंततः हिंद प्रशांत और द. चीन सागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन व ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष नेताओं ने 15 सितंबर को वर्चुअल मीटिंग में संयुक्त बयान जारी कर महत्वाकांक्षी तीन-तरफा रणनीतिक रक्षा गठबंधन 'ऑकस पैक्ट' की घोषणा की है। यद्यपि इस गठबंधन की योजना का ब्लू प्रिंट आगामी 18 महीने में पूर्णरूप से तैयार हो पाएगा, परंतु अमेरिका व ब्रिटेन ने तत्काल प्रभाव से साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और महासागर में अपनी क्षमताओं में वृद्धि सहित तमाम सैन्य क्षमताओं को बेहतर बनाने के अपनी तकनीक को साझा करेंगे। ऑस्ट्रेलिया को 'टॉम हॉक क्रूज मिसाइलों' से लैस परमाणु ऊर्जा से संचालित घातक पनडुब्बी देने की घोषणा की गई है। यह अत्याधुनिक तकनीकी एवं रडार की पहंुच से बाहर की क्षमता से लैस है।

गौरतलब है कि अपनी अद्वितीय विशेषताओं के कारण टॉम हॉक क्रूज मिसाइलों को 'अमेरिका का ब्रह्मास्त्र' भी कहा जाता है। वर्ष 2040 तक आठ सबमरीन के बेड़े के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है जिनको ऑस्ट्रेलिया अपनी सामरिक जरूरतों के अनुसार तैनात करेगा। उल्लेखनीय है कि 1958 में ब्रिटेन के बाद अमेरिका अपनी इस तकनीक को ऑस्ट्रेलिया के साथ ही साझा कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया अपने मौजूदा कोलिन्स पनडुब्बी बेड़े को बदलने के लिए 12 डीजल संचालित पनडुब्बियों के निर्माण के लिए 2016 में फ्रांस से 90 बिलियन डॉलर का अनुबंध किया था जो इस समझौते के बाद समाप्त हो जायेगा। इस करार के रद होने से न केवल फ्रांस की अंतरराष्ट्रीय साख को धक्का लगा है, अपितु भारी आर्थिक हानि के साथ इस रक्षा क्षेत्र में कार्यरत बहुसंख्य दक्ष लोगों को भारी बेरोजगारी का सामना करना पड़ेगा। निःसंदेह यह राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के लिए एक बड़ा झटका है।

फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-यवेस ले ड्रियन ने इसे समझ से परे बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा 'यह एकतरफा निर्णय डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों की तरह है।' उन्होंने ऑस्ट्रेलिया पर फ्रांस की पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया है। यद्यपि ऑस्ट्रेलिया ने फ्रांस की नाराजगी की परवाह किए बिना इस समझौते को अपने देश की वर्तमान जरूरतों के अनुरूप बताया है। प्रधानमंत्री स्कॉट मोरिसन ने ट्वीट कर कहा, 'ऑस्ट्रेलिया ने यूके और अमेरिका के साथ त्रिपक्षीय सुरक्षा साझेदारी की शुरुआत की है, इससे हमारी सुरक्षा और रक्षा क्षमताएं और मजबूत होंगी, अनिश्चितता भरे दौर में हमारे देश की सुरक्षा को मजबूत करने का यह ऐतिहासिक मौका है।'

इससे साफ है कि ऑस्ट्रेलिया के लिए स्वराष्ट्र हित सर्वोपरि है न कि संबंध, परंतु मोरिसन को याद रखना चाहिए कि ऐसी ही संधि 1951 में अमेरिका ने न्यूजीलैंड के साथ भी की थी जो आज हाशिए पर है। इसी तरह का संदेश इस अवसर पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने दिया है, 'यह हमारी ताकत के सबसे बड़े स्रोत में निवेश है। हमारा गठबंधन (ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ) और उन्हें इस तरह से अपडेट करना ताकि वे आज और भविष्य में आने वाले खतरों से अच्छे से निपट सकें। यह अमेरिका के वर्तमान सहयोगियों और भागीदारों को नए तरीके से जोड़ना है।' अति आत्मविश्वास से लबरेज जॉनसन ने लंदन से अपने संबोधन में कहा 'तीन देश स्वाभाविक सहयोगी थे, भले ही हम भौगोलिक रूप से अलग हो सकते हैं यह गठबंधन एक नई रक्षा साझेदारी और रोजगार और समृद्धि का निर्माण करेगा।' इस डील पर चीन की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा 'तीनों देशों ने विशुद्ध रूप से शीतयुद्ध कालीन मानसिकता और संकीर्ण सोच वाली भू-राजनीतिक अवधारणा का परिचय दिया है। ये देश परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियों के क्षेत्र में सहयोग कर रहे हैं जो क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता को काफी कमजोर कर देगा, हथियारों की होड़ बढ़ा देगा और परमाणु अप्रसार की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को नुकसान पहुंचाएगा।' गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण की न्यायिक जांच की मांग के उपरांत चीन और ऑस्ट्रेलिया की मैत्री में आई दरार अब कटु संबंधों में बदल चुकी है। ऑस्ट्रेलिया ने चीन की 5-जी नेटवर्क परियोजना के रद कराने के बाद चीन ने न केवल ऑस्ट्रेलिया आयातित शराब व बीफ पर पाबंदी लगाई, अपितु ऑस्ट्रेलिया में अपने निवेश को साठ फीसद तक कम कर दिया। चीन की आलोचना के प्रत्युत्तर में व्हाइट हाउस ने कहा है " इस गठबंधन का संबंध किसी एक देश से नही है, बल्कि इसका मकसद अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाना है।'

भले ही चीन की प्रतिक्रिया में पश्चिमी देशों की दक्षिण-पूर्व से बढ़ते लगाव का भय स्पष्ट नजर आ रहा है, परंतु यह साफ है कि सामयिक परिदृश्य में एक तरफ भू- राजनीति में ऑस्ट्रेलिया की भूमिका में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। वहीं काफी समय से हाशिए पर रहे ब्रिटेन ने भी अब अंगड़ाई ली है। तीनों देशों की जुगलबंदी सफलता के कितने आयाम छू पाएगी ये तो भविष्य के गर्भ में है, परंतु हिन्द प्रशांत और दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में ऑकस के सहारे अमेरिका चीन और रूस के साथ- साथ ईरान व उत्तरी कोरिया को संतुलित करने में अवश्यमेव सफल रहेगा।

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